MP में आधी रात बदल जाता है एंबुलेंस का काम, मरीज छोड़ ढो रहीं सब्जियां
समझें क्या है पूरा मामला...
- नर्मदापुरम में 108 एंबुलेंस से सब्जियां ढोने का मामला सामने आया है।
- रविवार रात हीरो होंडा चौराहे पर एंबुलेंस में सब्जियां लादी गईं।
- एक युवक ने पूरी घटना का वीडियो अपने मोबाइल में रिकॉर्ड किया।
- सोमवार को यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
- सीएमएचओ ने घटना को शर्मनाक बताते हुए कार्रवाई की बात कही है।
एंबुलेंस बनी मालगाड़ी
मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस अब चर्चा में है। स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। आपातकालीन 108 एंबुलेंस से मरीज ले जाने की बजाय सब्जियां ढोई जा रही हैं।
सोमवार, 21 सितंबर को इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो देखने के बाद लोगों में गुस्सा फैल गया। स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। सीएमएचओ ने इस घटना को शर्मनाक और गंभीर बताया है।
यह पूरा मामला नर्मदापुरम जिले का है। घटना हीरो होंडा चौराहे के पास हुई। रविवार देर रात एक 108 एंबुलेंस बीच सड़क पर खड़ी की गई। इसके पीछे के दरवाजे खोले गए। अंदर बने स्ट्रेचर पर सब्जियों से भरे कट्टे रखे गए। साथ ही कैरेट और बड़ी बोरियां भी ठूंस-ठूंस कर लादी गईं। यह नजारा देखकर वहां से गुजर रहे लोग हैरान रह गए।
कैसे हुआ पूरा खेल
उसी समय एक युवक वहां से गुजर रहा था। उसने पूरे मामले को अपने मोबाइल में कैद कर लिया। उसने एंबुलेंस में सामान लादे जाने का वीडियो बना लिया। यह वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। लोगों ने इसे शेयर करना शुरू कर दिया। कुछ ही घंटों में यह वीडियो हजारों लोगों तक पहुंच गया।
वीडियो में क्या दिखा
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि क्या हुआ। एक व्यक्ति ने एंबुलेंस में सामान लाद दिया। इसके बाद उसने पीछे का गेट बंद कर दिया। थोड़ी दूर आगे जाकर वह आगे वाली सीट पर बैठ गया। इसके बाद चालक ने एंबुलेंस को तेज रफ्तार से दौड़ा दिया। पूरी गाड़ी जैसे सब्जी ढोने वाला वाहन बन गई। यह नजारा किसी को भी हैरान कर सकता है।
घटना सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। अधिकारियों में इसे लेकर बेचैनी देखी गई। 108 एंबुलेंस सेवा की मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि आपातकालीन सेवा की निगरानी कौन करता है। यदि ऐसी लापरवाही होती रही, तो मरीजों की जान को खतरा हो सकता है। इस घटना ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है।
सीएमएचओ ने क्या कहा
मामले पर सीएमएचओ डॉक्टर नरसिंह गेहलोत ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। उनके मुताबिक यह घटना बेहद गंभीर और शर्मनाक है। उन्होंने बताया कि पहली बार ऐसा मामला सामने आया है। इससे पहले कभी एंबुलेंस में सब्जी ढुलाई की बात नहीं आई थी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
सीएमएचओ ने यह भी बताया कि पहले भी शिकायतें मिलती रही हैं। उनके मुताबिक कई बार एंबुलेंस देरी से पहुंचने की शिकायत आई थी। ऐसी लापरवाही की जानकारी अब वरिष्ठ कार्यालय को दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। दोषी कर्मचारी या ऑपरेटर पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
अभी कितनी एंबुलेंस चालू
सीएमएचओ ने जिले की एंबुलेंस व्यवस्था की भी जानकारी दी। उनके मुताबिक जिले में कुल 34 एंबुलेंस उपलब्ध हैं। इनमें से कुछ गाड़ियां रिपेयर होकर वापस आती रहती हैं। फिलहाल करीब 30 एंबुलेंस चालू हालत में हैं। इतनी बड़ी संख्या के बावजूद निगरानी में कमी सामने आई है। इससे पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा हो गया है।
पहले भी उठे सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब 108 एंबुलेंस सेवा पर सवाल उठे हों। पहले भी कई बार एंबुलेंस के देरी से पहुंचने की शिकायतें आई हैं। कई बार मरीजों को समय पर मदद नहीं मिल पाती। ऐसे में यह ताजा घटना और गंभीर मानी जा रही है। इससे आपातकालीन सेवा पर लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है।
आपातकालीन एंबुलेंस सेवा मरीजों के लिए जीवनरक्षक मानी जाती है। ऐसे में इसका गलत इस्तेमाल बड़ी लापरवाही की श्रेणी में आता है। यदि समय पर एंबुलेंस उपलब्ध न हो, तो जान को खतरा हो सकता है। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि निगरानी तंत्र कमजोर है। लोगों की मांग है कि इस पर जल्द सख्त कदम उठाए जाएं।
स्वास्थ्य विभाग कर रही जांच
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग जांच की बात कह रहा है। लोगों को उम्मीद है कि दोषियों पर जल्द कार्रवाई होगी। साथ ही एंबुलेंस सेवा की निगरानी बेहतर करने की मांग उठ रही है। आने वाले दिनों में विभाग की आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने की उम्मीद है। तब तक यह घटना चर्चा का विषय बनी रहेगी।
ग्रामीण इलाकों में 108 एंबुलेंस सेवा पर लोगों की निर्भरता ज्यादा होती है। कई गांवों में निजी वाहन आसानी से उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में मरीज सिर्फ सरकारी एंबुलेंस के भरोसे रहते हैं। अगर यही सेवा दुरुपयोग की भेंट चढ़ जाए, तो हालात गंभीर हो सकते हैं।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। लोगों की मांग है कि हर एंबुलेंस की जीपीएस (Global Positioning System) निगरानी हो। इससे किसी भी गड़बड़ी का तुरंत पता चल सकेगा।
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