NCRB Report: मध्य प्रदेश में महिलाओं के लिए अपने ही बने खतरा, 97% आरोपी परिचित
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2024 की ताजा रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश को फिर चौंका दिया है। महिला सुरक्षा के मोर्चे पर प्रदेश की स्थिति बेहद चिंताजनक और डराने वाली नजर आ रही है। एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में होने वाले दुष्कर्म के मामलों में अजनबी नहीं, बल्कि अपने ही शामिल हैं।
मध्य प्रदेश में घटित दुष्कर्म की कुल वारदातों में 97.4% आरोपी पीड़िता के करीबी या परिचित निकले हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं के लिए घर और रिश्तों का दायरा अब सुरक्षित नहीं रहा।
अपनों के बीच पनपती दरिंदगी
साल 2024 के दौरान मध्य प्रदेश में बलात्कार के कुल 3 हजार 61 मामले प्रमुखता से दर्ज किए गए। इनमें से 2 हजार 981 प्रकरण ऐसे थे, जिनमें आरोपी पीड़िता को पहले से ही अच्छी तरह जानता था। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो 281 मामलों में आरोपी सीधे तौर पर परिवार के सदस्य निकले।
वहीं, 1 हजार 148 वारदातों में दोस्त, लिव-इन पार्टनर या अलग हो चुके पति ही मुख्य आरोपी पाए गए। पारिवारिक मित्र, पड़ोसी और कार्यस्थल के बॉस द्वारा किए गए अपराधों की संख्या 1 हजार 252 दर्ज की गई। केवल 80 मामलों में ही आरोपी अज्ञात थे, जो कुल अपराधों का बहुत छोटा हिस्सा है।
ऑनलाइन दोस्ती का खतरा सबसे अधिक
समाज में भरोसे के संकट का अंदाजा शादी के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से लगाया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ऑनलाइन दोस्ती और शादी का झांसा देकर रेप के 1 हजार 448 मामले सामने आए हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह स्थिति समाज में बढ़ती मानसिक और शारीरिक हिंसा को दर्शाती है। प्रदेश में 2024 में कुल मिलाकर नौ हजार से ज्यादा बलात्कार के मामले दर्ज किए गए हैं। यह डेटा स्पष्ट करता है कि सार्वजनिक स्थानों की तुलना में निजी दायरे अधिक असुरक्षित हो गए हैं।
बच्चे और बुजुर्ग भी निशाने पर
मध्य प्रदेश केवल महिला अपराधों में ही नहीं, बल्कि बच्चों और बुजुर्गों के मामलों में भी शीर्ष पर है। वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराधों के मामले में एमपी देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है।
साल 2024 में बुजुर्गों के खिलाफ सर्वाधिक 5 हजार 875 केस मध्य प्रदेश में और 4 हजार 918 केस महाराष्ट्र में दर्ज हुए। साल 2022 से ही इन दोनों राज्यों की स्थिति इस श्रेणी में लगातार खराब बनी हुई है। बच्चों की सुरक्षा के मामले में भी प्रदेश की तस्वीर काफी धुंधली और विचलित करने वाली है।
लापता होते मासूम गिरते मापदंड
साल 2024 में मध्यप्रदेश से कुल 6 हजार 508 बच्चों के लापता होने की गंभीर जानकारी सामने आई है। लापता होने वाले बच्चों में लड़कियों की संख्या 8 हजार 914 और लड़कों की संख्या 2 हजार 757 दर्ज है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि प्रदेश में मानव तस्करी या अन्य अपराधों का जाल काफी फैला है।
समाज में अपनों के बीच बढ़ती इस दरिंदगी ने सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए हैं। सरकार और समाज दोनों को मिलकर अब सुरक्षा के नए और कड़े मापदंड तैयार करने होंगे।
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