थम गई MP NEET PG काउंसलिंग, DME ने पहले चरण की प्रवेश प्रक्रिया पर लगाई रोक, अब हाईकोर्ट के अगले आदेश का इंतजार
NEET PG काउंसलिंग पर लगा ब्रेक, DME ने जारी किया आदेश
मध्य प्रदेश में NEET PG की काउंसलिंग प्रक्रिया फिलहाल थम गई है। जबलपुर हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 3 नवंबर को बड़ा फैसला लेते हुए राज्य काउंसलिंग के प्रथम चरण की पूरी प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन (DME) की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अगले अदालती निर्देश मिलने तक सीट आवंटन के बाद चल रही प्रवेश प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से स्थगित रहेगी। इस फैसले से पहले चरण में सीट हासिल कर चुके अभ्यर्थियों की प्रवेश प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है।
सीट आवंटित हो चुकी थी, अब उम्मीदवारों को करना होगा इंतजार
लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा आयुक्त कार्यालय से जारी आदेश में सभी भाग लेने वाले उम्मीदवारों को संबोधित करते हुए कहा गया है कि राज्य काउंसलिंग के प्रथम चरण में जिन उम्मीदवारों को सीटें आवंटित की गई हैं, उन्हें यह सूचित किया जाता है कि हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के मद्देनजर चल रही प्रवेश प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से रोक दी गई है। यह रोक हाईकोर्ट के अगले निर्देशों और आदेशों तक प्रभावी रहेगी। यानी फिलहाल आवंटित सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ सकेगी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद रुकी काउंसलिंग
दरअसल, जबलपुर हाईकोर्ट में ओपन कैटेगरी के उम्मीदवारों ने NEET PG काउंसलिंग की मेरिट सूची और सीट आवंटन प्रक्रिया को चुनौती दी थी। याचिका WP 44909/2026 में डॉ. सर्वजीत सिंह एवं अन्य की ओर से इन-सर्विस और ओपन कैटेगरी के उम्मीदवारों की मेरिट सूची आपस में मिलाने तथा निर्धारित 30 प्रतिशत से अधिक सीटें सेवारत डॉक्टरों को देने का मुद्दा उठाया गया था। 2 नवंबर को चीफ जस्टिस अल्पेश कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने इस मामले में अंतरिम आदेश जारी किया था।
इन-सर्विस डॉक्टरों के लिए 30 प्रतिशत की सीमा बनी विवाद की वजह
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी ने अदालत में तर्क दिया था कि PG मेडिकल प्रवेश में मेरिट का विशेष महत्व है। ओपन और इन-सर्विस उम्मीदवारों की सूचियां आपस में मिलने से अधिक मेरिट वाले ओपन कैटेगरी के अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।
साथ ही इन-सर्विस डॉक्टरों को निर्धारित 30 प्रतिशत से अधिक सीटें दिए जाने का मुद्दा भी उठाया गया था। हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश में प्रत्येक विशेषज्ञता में इन-सर्विस डॉक्टरों को अधिकतम 30 प्रतिशत सीटें ही आवंटित करने के निर्देश दिए थे और दोनों श्रेणियों की मेरिट सूची अलग रखने के निर्देश दिए थे।
अब 5 नवंबर की सुनवाई पर टिकी निगाहें
हाईकोर्ट ने इस मामले में मध्य प्रदेश शासन और डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन को नोटिस जारी कर 5 नवंबर 2026 तक जवाब मांगा है। अब सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा। दूसरी ओर, काउंसलिंग प्रक्रिया रोकने के विभागीय आदेश के बाद हजारों अभ्यर्थियों की निगाहें अगली सुनवाई पर टिक गई हैं। हाईकोर्ट के अगले निर्देशों के बाद ही स्पष्ट होगा कि काउंसलिंग दोबारा कब और किस प्रक्रिया के तहत शुरू होगी। फिलहाल NEET PG के पहले चरण की प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह होल्ड है।
FAQs:
- NEET PG काउंसलिंग प्रक्रिया क्यों रोकी गई है?
NEET PG काउंसलिंग प्रक्रिया को जबलपुर हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के कारण रोका गया है। यह आदेश ओपन कैटेगरी के उम्मीदवारों द्वारा मेरिट सूची और सीट आवंटन प्रक्रिया को चुनौती देने के बाद जारी किया गया। - काउंसलिंग प्रक्रिया रुकने से अभ्यर्थियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
काउंसलिंग प्रक्रिया रुकने से पहले चरण में सीट प्राप्त कर चुके अभ्यर्थियों की प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित होगी। उन्हें अगले अदालत के निर्देशों का इंतजार करना पड़ेगा, जिससे उनकी सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया भी ठप हो गई है। - काउंसलिंग प्रक्रिया कब फिर से शुरू होगी?
काउंसलिंग प्रक्रिया कब फिर से शुरू होगी, यह हाईकोर्ट के अगले निर्देशों पर निर्भर करेगा। अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी, जहां मध्य प्रदेश शासन और डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन को अपना पक्ष रखना है।