MP नीट पीजी काउंसलिंग: हाईकोर्ट ने नहीं हटाई रोक, चिकित्सा विभाग की मांग खारिज, 17 नवंबर तक इंतजार

Neel Tiwari | Nov 05, 2026, 20:06 IST
मध्यप्रदेश में नीट पीजी काउंसलिंग के 30 प्रतिशत इन-सर्विस कोटे पर हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश बरकरार है।
The High Court's interim order regarding the 30 percent in-service quota for NEET PG counselling in Madhya Pradesh remains in effect.
मध्यप्रदेश में नीट पीजी काउंसलिंग को लेकर चल रहे विवाद में चिकित्सा शिक्षा विभाग को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने 30 प्रतिशत इन-सर्विस कोटे को लेकर पहले दिए गए आदेश में बदलाव करने से इनकार कर दिया है। इससे ओपन कैटेगरी के अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।

गुरुवार, 5 नवंबर को जबलपुर हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। एक्टिंग चीफ जस्टिस अल्पेश कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने दोनों पक्षों को सुना। चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से कोर्ट में आवेदन देकर 2 नवंबर के अंतरिम आदेश को रद्द करने या उसमें बदलाव करने की मांग की गई थी।



लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने विभाग की मांग नहीं मानी। यानी 30 प्रतिशत इन-सर्विस कोटे को लेकर 2 नवंबर को दिया गया अंतरिम आदेश फिलहाल लागू रहेगा। अब सभी की नजरें 17 नवंबर की सुनवाई पर टिकी हैं।



चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मांगी थी स्टे हटाने की अनुमति

दरअसल, चिकित्सा शिक्षा निदेशक भोपाल की ओर से हाईकोर्ट में 2 नवंबर के अंतरिम आदेश को निरस्त करने के लिए आवेदन पेश किया गया था। विभाग का कहना था कि इन-सर्विस डॉक्टरों को मिलने वाले प्रोत्साहन अंक (Incentive Marks) और उनकी मेरिट निर्धारित करने की प्रक्रिया राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के नियमों के अनुरूप है। यह एक नीतिगत निर्णय है। विभाग ने दलील दी कि प्रोत्साहन अंकों को ओपन मेरिट में जोड़ने और इन-सर्विस उम्मीदवारों की मेरिट तय करने की प्रक्रिया में कोई अवैधता नहीं है। ऑनलाइन काउंसलिंग भी निर्धारित नियमों के तहत पारदर्शी तरीके से हो रही है।



कई उम्मीदवार ले चुके हैं एडमिशन, समय-सारणी प्रभावित होने की दलील

चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अपने आवेदन में यह भी बताया कि पहले चरण में 29 अक्टूबर को सीटों का आवंटन हो चुका था। कई उम्मीदवार आवंटित मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश भी ले चुके हैं। पूरी काउंसलिंग ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के माध्यम से संचालित होती है। इसकी समय-सारणी भी निर्धारित है। ऐसे में प्रवेश प्रक्रिया रुकने से छात्रों के एडमिशन और आगे की पढ़ाई पर असर पड़ सकता है। विभाग ने इन्हीं परिस्थितियों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट से अंतरिम रोक हटाने की मांग की थी।



ओपन और इन-सर्विस मेरिट को लेकर है विवाद

इस पूरे मामले की शुरुआत ओपन कैटेगरी के उम्मीदवारों की याचिका WP 44909/2026 से हुई थी। डॉ. सर्वजीत सिंह और अन्य याचिकाकर्ताओं ने मध्य प्रदेश की NEET PG मेरिट सूची और काउंसलिंग निर्देशों को चुनौती दी थी। उनका मुख्य आरोप था कि इन-सर्विस डॉक्टरों को मिलने वाले प्रोत्साहन अंक उनकी आपसी वरीयता तय करने तक सीमित रहने चाहिए। लेकिन इन अंकों को सामान्य ओपन मेरिट सूची में भी जोड़ दिया गया। इससे ओपन कैटेगरी के उम्मीदवारों की मेरिट प्रभावित हो रही है। याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि दोनों श्रेणियों की मेरिट सूची अलग-अलग रखी जाए।



वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी ने स्टे हटाने का किया विरोध

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी ने चिकित्सा शिक्षा विभाग की मांग का विरोध किया। उन्होंने अदालत के सामने ओपन कैटेगरी के उम्मीदवारों के हित और इन-सर्विस कोटे की निर्धारित सीमा का मुद्दा रखा। उनका पक्ष था कि निर्धारित 30 प्रतिशत सीमा से अधिक सीटें इन-सर्विस उम्मीदवारों को नहीं दी जानी चाहिए। दोनों श्रेणियों की मेरिट को आपस में मिलाने से ओपन कैटेगरी के अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित होते हैं। विस्तृत सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पहले के अंतरिम आदेश में कोई बदलाव नहीं किया।



30 प्रतिशत सीटों की सीमा पर क्या है हाईकोर्ट का आदेश?

हाईकोर्ट ने 2 नवंबर को आदेश दिया था कि मध्यप्रदेश के सरकारी, स्वायत्त और निजी मेडिकल कॉलेजों में हर स्पेशलिटी की अधिकतम 30 प्रतिशत सीटें ही इन-सर्विस डॉक्टरों को दी जाएं। यानी नौकरी कर रहे डॉक्टरों को तय सीमा से ज्यादा सीटें नहीं मिल सकेंगी। कोर्ट ने यह भी कहा था कि ओपन कैटेगरी और इन-सर्विस डॉक्टरों की मेरिट लिस्ट अलग-अलग बनाई जाए। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कोर्ट से इस आदेश को हटाने की मांग की थी, लेकिन 5 नवंबर को हुई सुनवाई में कोई राहत नहीं मिली। ऐसे में कोर्ट का पुराना आदेश फिलहाल लागू रहेगा।



अब 17 नवंबर को होगी अगली सुनवाई, काउंसलिंग पर नजर

चिकित्सा शिक्षा विभाग की मांग पर राहत नहीं मिलने के बाद नीट पीजी काउंसलिंग (NEET PG Counselling) का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट के अगले आदेश पर टिक गया है। फिलहाल 2 नवंबर का अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा। इससे पहले विभाग हाईकोर्ट के आदेश के बाद 3 नवंबर को प्रथम चरण की प्रवेश प्रक्रिया पर अगले आदेश तक रोक लगा चुका है। अब 17 नवंबर को होने वाली सुनवाई में मामले के गुण-दोष और विभाग के जवाब पर आगे विचार होगा। तब तक ओपन कैटेगरी के उम्मीदवारों को मिली अंतरिम राहत जारी रहेगी।

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