दिल्ली में साला, पटना में भाई या फिर सोशल मीडिया… कौन बनाएगा मध्य प्रदेश का नया डीजीपी?

Sumit Kumar | Oct 31, 2026, 19:45 IST
मध्य प्रदेश के नए डीजीपी की दौड़ में रिश्तेदारी और सोशल मीडिया की चर्चा।
MP next DGP selection: Family connections and social media presence draw attention as the race for the top police post heats up.
मध्य प्रदेश में डीजीपी की कुर्सी के लिए मुकाबला दिलचस्प हो गया है। किसी के साले दिल्ली में बड़े पद पर हैं, तो किसी का भाई पटना में मुख्य सचिव है। तीसरे दावेदार सोशल मीडिया पर खूब सक्रिय हैं। ऐसे में सवाल है कि वरिष्ठता भारी पड़ेगी या रिश्तों का रसूख? thesootr की जानकारी के मुताबिक, 20 नवंबर के बाद नए डीजीपी के नाम से पर्दा उठ सकता है।

डीजीपी की रेस में साला, भाई और सोशल मीडिया का कनेक्शन

मध्य प्रदेश के मौजूदा डीजीपी कैलाश मकवाना 30 नवंबर 2026 को रिटायर होंगे। उनकी जगह लेने की दौड़ में वरुण कपूर, उपेंद्र जैन और प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव सबसे आगे हैं। हालांकि, इस बार डीजीपी की कुर्सी को लेकर चर्चा सिर्फ सीनियरिटी तक सीमित नहीं है। दो दावेदारों की रिश्तेदारी देश के बड़े पदों पर बैठे अधिकारियों से है, जबकि तीसरे अपनी डिजिटल सक्रियता को लेकर चर्चा में हैं।



आईपीएस उपेंद्र जैन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बहनोई हैं। यानी ज्ञानेश कुमार उनके साले हैं। वहीं, आईपीएस प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव के भाई प्रत्यय अमृत बिहार के मुख्य सचिव हैं। इधर, आईपीएस वरुण कपूर इन दिनों सोशल मीडिया पर कुछ ज्यादा ही सक्रिय नजर आ रहे हैं।



तीनों अफसरों का सर्विस रिकॉर्ड साफ-सुथरा है और उनकी सीआर भी मजबूत बताई जा रही है। मगर दिल्ली में किसका पलड़ा भारी होगा, इसे लेकर रिश्तेदारी की भी चर्चा है।



ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बड़े पदों पर बैठे रिश्तेदार डीजीपी की कुर्सी तक पहुंचने में मदद करेंगे? हालांकि, नियमों के मुताबिक ऐसा नहीं है। डीजीपी का पैनल यूपीएससी तैयार करता है और अंतिम फैसला राज्य सरकार करती है।



उपेंद्र जैन: सीईसी ज्ञानेश कुमार के बहनोई

उपेंद्र जैन 1991 बैच के आईपीएस (IPS) अफसर हैं। दिसंबर 2024 से वे ईओडब्ल्यू (EOW) के डीजी हैं। इससे पहले वे पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक रह चुके हैं। उनका रिटायरमेंट अगस्त 2027 में है।



उपेंद्र जैन का दिल्ली से पारिवारिक कनेक्शन है। उनकी पत्नी रोली इंदौर में स्कूल चलाती हैं। रोली देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बहन हैं। इस रिश्ते से ज्ञानेश कुमार, उपेंद्र जैन के साले हैं।



ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस अफसर रहे हैं। उन्होंने 19 फरवरी 2025 को देश के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला था।



इस दावेदारी में एक दिलचस्प संयोग भी है। मौजूदा डीजीपी कैलाश मकवाना भी पुलिस की कमान संभालने से पहले इसी पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष थे।



प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव: पटना में भाई मुख्य सचिव

प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव 1991 बैच की आईपीएस अफसर हैं। फिलहाल वे मध्य प्रदेश होमगार्ड की डीजी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मई 2025 में वे होमगार्ड की पहली महिला मुखिया बनी थीं। इससे पहले वे पुलिस मुख्यालय में महिला सुरक्षा शाखा की स्पेशल डीजी रह चुकी हैं।



प्रज्ञा ऋचा का बिहार से भी खास कनेक्शन है। उनके भाई प्रत्यय अमृत बिहार के मुख्य सचिव हैं। वे भी 1991 बैच के आईएएस अफसर हैं। उन्होंने 1 सितंबर 2025 को बिहार के मुख्य सचिव का पद संभाला था।



दिलचस्प बात यह है कि भाई-बहन दोनों 1991 बैच के हैं। दोनों अलग-अलग सेवाओं में बड़े पदों तक पहुंचे। अब प्रज्ञा ऋचा के सामने मध्य प्रदेश पुलिस की सबसे बड़ी कुर्सी तक पहुंचने का मौका है।



अगर उनके नाम पर मुहर लगती है, तो प्रदेश में इतिहास बनेगा। वे मध्य प्रदेश की पहली महिला डीजीपी होंगी। यही वजह है कि उनकी दावेदारी को लेकर खास चर्चा है। उनका रिटायरमेंट फरवरी 2028 में है।



वरुण कपूर: सोशल मीडिया पर सक्रिय

वरुण कपूर भी 1991 बैच के आईपीएस अफसर हैं। वे फिलहाल मध्य प्रदेश के जेल डीजी हैं। जुलाई 2025 में उन्हें यह जिम्मेदारी मिली थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीनों प्रमुख दावेदारों में वे सबसे सीनियर हैं। उनका रिटायरमेंट मई 2027 में है।



वरुण कपूर को साइबर अपराध के खिलाफ चलाए गए अभियानों के लिए भी जाना जाता है। ब्लैक रिबन इनिशिएटिव और प्रोजेक्ट साइ-कॉप्स उनकी चर्चित पहल रही हैं।



हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने 110 पुराने मामलों के खुलासे का जिक्र किया था। वे संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत बोस्निया में भी तैनात रह चुके हैं।



इन दिनों वरुण कपूर सोशल मीडिया पर भी सक्रिय बताए जा रहे हैं। ऐसे में उनकी वरिष्ठता के साथ डिजिटल दुनिया में सक्रियता भी चर्चा का विषय बनी हुई है।



डीजीपी चयन की पूरी टाइमलाइन

  • 21 नवंबर 2024: यूपीएससी ने पिछली बार डीजीपी पैनल के लिए बैठक की।
  • 23 नवंबर 2024: देर रात कैलाश मकवाना के नाम का आदेश जारी हुआ।
  • 1 दिसंबर 2024: कैलाश मकवाना ने डीजीपी की कमान संभाली।
  • 31 अक्टूबर 2025: राज्य सरकार ने उनका कार्यकाल एक साल बढ़ाया।
  • सितंबर 2026: नए डीजीपी के चयन के लिए 12 अफसरों के दस्तावेजों की जांच शुरू हुई।
  • 20 नवंबर 2026: यूपीएससी की पैनल बैठक प्रस्तावित है।
  • 30 नवंबर 2026: कैलाश मकवाना रिटायर होंगे।
  • 1 दिसंबर 2026: नए डीजीपी कार्यभार संभालेंगे।

रिश्ते नहीं, यूपीएससी का पैनल करेगा फैसला

डीजीपी (Director General of Police) का पैनल संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) तैयार करता है। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह केस में दिए गए फैसले के आधार पर चलती है।



पैनल में शामिल होने के लिए 30 साल की सेवा और साफ रिकॉर्ड जरूरी है। इसके अलावा संबंधित अफसर की कम से कम छह महीने की नौकरी बची होनी चाहिए।



बैठक में यूपीएससी अध्यक्ष, प्रदेश के मुख्य सचिव और एक वरिष्ठ अफसर शामिल होते हैं। इसी प्रक्रिया के तहत तीन नामों का पैनल तैयार किया जाता है।



सूत्रों के मुताबिक, तीनों प्रमुख दावेदारों की सीआर (CR- Confidential Report यानी सालाना गोपनीय रिपोर्ट) बेहतरीन है। आखिर में मध्य प्रदेश के नए डीजीपी का नाम मुख्यमंत्री मोहन यादव तय करेंगे।

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