एमपी में होंगी 44 लोकसभा सीटें! सीहोर-बीना के नाम पर चर्चा, प्रस्ताव तैयार
ऐसे समझें पूरा मामला
- सीटों में बढ़ोतरी: आर्थिक सलाहकार परिषद के मुताबिक एमपी में लोकसभा सीटें 29 से बढ़कर 44 हो सकती हैं।
- नया पैमाना: अब परिसीमन सिर्फ आबादी पर नहीं, बल्कि शहरीकरण और वोटिंग प्रतिशत के आधार पर होगा।
- शहरों का विभाजन: इंदौर और भोपाल जैसे बड़े महानगरों को बांटकर दो-दो लोकसभा सीटें बनाई जा सकती हैं।
- क्षेत्रीय प्रभाव: नए बदलावों का सबसे बड़ा असर मालवा-निमाड़ और महाकौशल की सीटों पर देखने को मिलेगा।
- सियासी फायदा: नए समीकरणों से बीजेपी को शहरी क्षेत्रों और कांग्रेस को आदिवासी बहुल इलाकों में फायदा होगा।
मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव होने वाला है। भविष्य में परिसीमन के बाद राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या 29 से बढ़कर 44 हो सकती है। यह दावा प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद यानी ईएसी-पीएम (EAC-PM – Economic Advisory Council to the Prime Minister) की रिपोर्ट में किया गया है।
परिषद ने साफ किया है कि यह कोई अंतिम प्रस्ताव नहीं है। यह सिर्फ एक स्टडी है। इसका मकसद जनप्रतिनिधित्व को बेहतर और संतुलित बनाना है।
समझें क्या है पूरा मामला
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने एक रिपोर्ट तैयार की है। इसमें एमपी के लिए 15 नई लोकसभा सीटें जोड़ने का सुझाव दिया गया है। इससे राज्य में सीटें 29 से बढ़कर 44 हो सकती हैं। देशभर में भी सीटें 543 से बढ़ाकर 824 करने की बात कही गई है। सबसे ज्यादा बदलाव भोपाल, इंदौर जैसे बड़े शहरों में संभव है।
क्या है ईएसी-पीएम की रिपोर्ट
रिपोर्ट में देश की 170 बड़ी लोकसभा सीटों को दो या तीन हिस्सों में बांटने का सुझाव दिया गया है। इसी आधार पर एमपी में करीब 52 प्रतिशत सीटें बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। यह सिर्फ एक मॉडल है। अभी कोई नया नक्शा जारी नहीं हुआ है।
सिर्फ आबादी नहीं, कई मानक तय होंगे
परिषद का कहना है कि परिसीमन सिर्फ जनसंख्या के आधार पर नहीं होना चाहिए। इसमें मतदाताओं की संख्या को भी देखा जाए। भौगोलिक विस्तार और शहरीकरण भी अहम मानक हैं।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति यानी एसटी (ST – Scheduled Tribe) की आबादी को भी ध्यान में रखा जाए। भाषाई और सामाजिक विविधता के साथ मतदान प्रतिशत भी शामिल होना चाहिए। परिषद मानती है कि इससे सांसद और मतदाता के बीच संपर्क बेहतर होगा। मतदान प्रतिशत में भी सुधार हो सकता है।
बड़े शहरों में सबसे ज्यादा असर
रिपोर्ट में सीटवार नया नक्शा नहीं दिया गया है। लेकिन तय मानकों के हिसाब से भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में बदलाव तय माना जा रहा है। उज्जैन, सागर, रीवा और छिंदवाड़ा भी इस सूची में हैं।
इन शहरों में मतदाता ज्यादा हैं। शहरीकरण तेजी से बढ़ा है। भौगोलिक विस्तार भी बड़ा है। नए जिले मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा भी आगे भूमिका निभा सकते हैं।
मालवा निमाड़ महाकौशल में बड़ा बदलाव
रिपोर्ट के अनुसार मालवा-निमाड़ और महाकौशल क्षेत्र में सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। मालवा-निमाड़ की मौजूदा 9 सीटों में इंदौर, उज्जैन, धार और खरगोन को बांटने का प्रस्ताव है। इससे यहां सीटें 13 तक हो सकती हैं।
महाकौशल की चारों सीटें भी बदल सकती हैं। छिंदवाड़ा, जबलपुर, मंडला और बालाघाट को बांटा जा सकता है। इससे यहां सीटों की संख्या 8 हो सकती है।
राजनीतिक असर क्या होगा
अगर एमपी में सीटें 44 होती हैं तो राष्ट्रीय राजनीति में राज्य का कद बढ़ेगा। संसद में प्रतिनिधित्व बढ़ने से केंद्रीय मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी भी बढ़ सकती है। राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति और संगठन में बड़े बदलाव करने होंगे। कई सीटों की सीमाएं पूरी तरह बदल सकती हैं।
किसे मिल सकता है फायदा
पिछले दो लोकसभा और विधानसभा चुनावों के रुझान देखें तो भाजपा के लिए कुछ नई सीटें मजबूत मानी जा सकती हैं। भोपाल की दूसरी सीट, इंदौर की दूसरी सीट, नागदा, बीना, ग्वालियर शहर, सीहोर, मऊगंज और लांजी इसमें शामिल हैं। इन इलाकों में भाजपा का प्रदर्शन लगातार अच्छा रहा है।
वहीं अगर परिसीमन स्थानीय सामाजिक और जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर होता है तो कांग्रेस को भी मौका मिल सकता है। पांढुर्णा, सरदारपुर, बड़वानी, डिंडौरी और उमरिया जैसी सीटें इसमें आती हैं। इन क्षेत्रों में आदिवासी और ग्रामीण मतदाता ज्यादा हैं।
यह पूरा मामला अभी शुरुआती स्तर पर है। असली परिसीमन में समय लग सकता है। लेकिन यह रिपोर्ट आने वाले वर्षों की राजनीतिक तस्वीर की एक झलक जरूर दे रही है।
FAQ
- एमपी में लोकसभा सीटें कितनी बढ़ सकती हैं?
एमपी में लोकसभा सीटें 29 से बढ़कर 44 हो सकती हैं। यह प्रस्ताव ईएसी-पीएम की रिपोर्ट में दिया गया है। अभी यह अंतिम फैसला नहीं है। - सबसे ज्यादा बदलाव किन शहरों में होगा?
भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में सबसे ज्यादा बदलाव संभव है। उज्जैन, सागर, रीवा और छिंदवाड़ा भी इसमें शामिल हैं। - यह रिपोर्ट किसने तैयार की है?
यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद यानी ईएसी-पीएम ने तैयार की है। परिषद ने इसे स्टडी बताया है, अंतिम प्रस्ताव नहीं।
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