MP में बसेंगे कई नए मिनी शहर: रोजगार के बढ़ेंगे मौके, घर से लेकर अस्पताल तक मिलेंगी सुविधाएं; 2 महीने में तय होगी जगह
हर क्षेत्र का दायरा करीब 900 से 1100 एकड़ होगा। इसके लिए सर्वे का काम शुरू हो गया है। अगले दो महीने में तय होगा कि ये नए शहर कहां और कितनी जमीन पर बसाए जाएंगे।
भोपाल-इंदौर-उज्जैन के आसपास बसेंगे नए शहर
प्रदेश सरकार भोपाल रिंग रोड के पूर्वी-पश्चिमी बायपास, इंदौर-उज्जैन और उज्जैन-जावरा एक्सप्रेस लिंक के आसपास नए विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) बनाने की तैयारी कर रही है।
इन क्षेत्रों को आधुनिक सुविधाओं वाले छोटे शहरों की तरह विकसित किया जाएगा। यहां रहने के साथ नौकरी और कारोबार के अवसर भी उपलब्ध कराने की योजना है।
इन नए क्षेत्रों में सड़क, बिजली और अन्य जरूरी Infrastructure विकसित किया जाएगा, ताकि लोगों को रोजमर्रा की सुविधाओं के लिए दूर न जाना पड़े।
नौकरी और कारोबार के बढ़ेंगे अवसर
नए शहरों को बसाने का मकसद केवल मकान बनाना नहीं है। यहां उद्योग, आईटी और दूसरे रोजगार से जुड़े कामों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
इससे युवाओं के लिए Job Opportunities बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही कारोबार शुरू करने वालों को भी नए विकल्प मिल सकेंगे।
इन क्षेत्रों में आवासीय और व्यावसायिक इलाकों के साथ बाजार, स्कूल, अस्पताल और औद्योगिक गतिविधियों के लिए भी जगह तय की जाएगी।
इंदौर-उज्जैन के बीच 10 जगह चिह्नित
इंदौर और उज्जैन के बीच प्रस्तावित 48 किलोमीटर लंबे नए ग्रीनफील्ड कॉरिडोर पर 10 स्थान चिह्नित किए गए हैं।
वहीं, उज्जैन-जावरा रोड पर भी दो स्थान तय किए गए हैं। हालांकि, इन क्षेत्रों की अंतिम स्थिति और सीमाएं सर्वे के बाद स्पष्ट होंगी।
भोपाल रिंग रोड के आसपास भी नए विकास क्षेत्रों के लिए जगह तय की जाएगी।
अवैध कॉलोनियों और बेतरतीब निर्माण पर लगेगी रोक
नए विकास क्षेत्रों के लिए अलग Master Plan बनाया जाएगा। इसमें तय होगा कि कहां मकान बनेंगे, कहां दुकानें और बाजार होंगे और किस जगह उद्योग लगाए जा सकेंगे।
जमीन के उपयोग और भवन निर्माण के लिए सख्त नियम बनाए जाएंगे। इससे बिना योजना के होने वाले निर्माण, अतिक्रमण और अवैध कॉलोनियों पर नियंत्रण करने में मदद मिलेगी।
सर्वे के लिए 5 करोड़ रुपए का बजट
मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) को इस योजना की जिम्मेदारी दी गई है। निगम ने सर्वे और प्लानिंग के लिए दो कंसल्टेंसी फर्मों को काम सौंपा है।
भोपाल रिंग रोड की जिम्मेदारी इंटर-कॉन्टिनेंटल कंसल्टेंट्स एंड टेक्नोक्रेट्स प्राइवेट लिमिटेड (आईसीटीसी) को दी गई है।
वहीं, इंदौर-उज्जैन और उज्जैन-जावरा के लिए डिजाइन पॉइंट को चुना गया है। यह फर्म सूरत की रिंग रोड परियोजना पर भी काम कर चुकी है।
दोनों फर्मों के लिए करीब 5 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। ये जमीन का सर्वे करेंगी, लैंड पूलिंग की योजना तैयार करेंगी और नए विकास क्षेत्रों की सीमाएं तय करेंगी।
दो महीने में साफ होगी नए शहरों की तस्वीर
पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह के मुताबिक, एमपीआरडीसी को काम सौंप दिया गया है। जल्द नए विकास क्षेत्रों के स्थान तय किए जाएंगे।
इंदौर-उज्जैन के प्रस्तावित ग्रीनफील्ड मार्ग पर फिलहाल संभावित स्थानों को लेकर काम चल रहा है। भोपाल रिंग रोड और उज्जैन-जावरा मार्ग की योजना भी आगे बढ़ाई जाएगी।
अगले दो महीने में सर्वे के आधार पर नए क्षेत्रों की जगह और उनका दायरा तय होने की उम्मीद है।
इस योजना के जमीन पर उतरने से लोगों को रहने के नए विकल्प और युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, नए शहरों का वास्तविक निर्माण कब शुरू होगा, इसकी समयसीमा अभी सामने नहीं आई है।
FAQ
- मध्य प्रदेश में नए मिनी शहर कहां बसाए जाएंगे?
भोपाल रिंग रोड के पूर्वी-पश्चिमी बायपास, इंदौर-उज्जैन और उज्जैन-जावरा एक्सप्रेस लिंक के आसपास नए विशेष विकास क्षेत्र बनाए जाने की योजना है। इनकी अंतिम जगह सर्वे के बाद तय होगी। - नए शहरों के विकास के लिए कितनी जमीन आवंटित की जाएगी?
प्रत्येक विशेष विकास क्षेत्र का दायरा करीब 900 से 1100 एकड़ रखने की योजना है। अगले दो महीने में इनके स्थान और सीमाएं तय होने की उम्मीद है। - नए विशेष विकास क्षेत्रों में लोगों को कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध होंगी?
इन क्षेत्रों में आवासीय और व्यावसायिक इलाकों, बाजारों, स्कूलों, अस्पतालों और औद्योगिक गतिविधियों के लिए जगह विकसित करने की योजना है। इसके लिए अलग मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। - नए शहरों में आम लोगों को कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी?
इन क्षेत्रों में मकान, बाजार, स्कूल, अस्पताल, व्यावसायिक और औद्योगिक सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इनके लिए अलग मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा।