एमपी में अवैध कॉलोनियों पर लगेगी लगाम, गांवों में भी लागू होंगे एक जैसे नए नियम
News In Short
- मध्य प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों के नियम अब गांवों में भी लागू किए जाएंगे।
- अवैध कॉलोनी बनाने वाले डेवलपर्स को अब पहले से सख्त सजा दी जाएगी।
- सरकारी फीस में राहत देकर सस्ते घर बनाने पर ज्यादा जोर दिया जाएगा।
- हाईराइज बिल्डिंग के लिए पुराने भूमि विकास नियमों में बदलाव की तैयारी है।
- अफसरों की भी जिम्मेदारी तय होगी ताकि अवैध निर्माण रुक सके।
News In Detail
एमपी में अब अवैध कॉलोनियों को फैलने से रोकने के लिए नए नियम लागू किए जाएंगे। इन नियमों को यूनीफाइड कॉलोनी डेवलपमेंट रूल्स कहा जाएगा। यह नियम नगरीय क्षेत्रों में 2021 में लागू किए गए कॉलोनी डेवलपमेंट रूल्स को थोड़ा बदलकर अब गांवों में भी लागू होंगे।
क्या है इन नियमों का उद्देश्य?
इसके तहत कॉलोनी डेवलपमेंट के लिए सरकारी विभागों द्वारा ली जाने वाली फीस में कुछ राहत मिल सकती है। इसके अलावा, ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) और एलआईजी (निम्न आय वर्ग) के घरों के निर्माण पर जोर दिया जा सकता है। इसका उद्देश्य है कि गरीब और मध्यवर्गीय लोग अवैध कॉलोनियों की तरफ आकर्षित न हों।
अवैध कॉलोनियां बनाने पर सख्त सजा
इसके अलावा अवैध कॉलोनियां बनाने पर दी जाने वाली सजा को और सख्त किया जाएगा। साथ ही अफसरों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
प्रदेशभर के डेवलपर्स और संबंधित विभागों के अफसरों के साथ नगरीय विकास विभाग के एसीएस संजय दुबे की हाल ही में हुई बैठक में इन सभी बदलावों पर सहमति बनी है।
बैठक में भूमि विकास नियमों (भूमि विकास नियम 2012) पर भी चर्चा हुई है। साल 2012 में बने ये नियम हाईराइज बिल्डिंग बनाने के हिसाब से सही नहीं हैं।
खासकर रेसीडेंशियल के लिए केवल 1.25 एफएआर (फ्लोर एरिया रेश्यो) है, जबकि कई राज्यों ने एफएआर का कॉन्सेप्टही खत्म कर दिया है।
22 अप्रैल को होगी अगली बैठक
डेवलपर्स ने बेस एफएआर बढ़ाने और टीएंडसीपी के कॉलोनी डेवलपमेंट और नगर निगम के बिल्डिंग परमिशन सॉफ्ट वेयर को एक जैसा करने का सुझाव दिया है। साथ ही नगरीय विकास विभाग के एसीएस संजय दुबे ने बताया कि अगली बैठक 22 अप्रैल को होगी।
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