एमपी में अफसरों का टोटा : IAS की कमी में मध्य प्रदेश का देश में दूसरा नंबर, IPS में चौथा स्थान
News in Short
- मध्य प्रदेश में IAS अफसरों की कमी, देश में दूसरे नंबर पर है राज्य।
- प्रदेश में 459 स्वीकृत IAS पदों में से 68 पद खाली पड़े हैं।
- IPS पदों में 15% कमी, 48 पद खाली हैं, प्रदेश में चौथे नंबर पर।
- उत्तर प्रदेश में IAS अफसरों की सबसे ज्यादा कमी, 81 पद खाली हैं।
- प्रशासन और पुलिस महकमे में अधिकारियों की कमी से कार्यों में देरी हो रही है।
News in Detail
भोपाल के वल्लभ भवन से लेकर दिल्ली के गलियारों तक एक ही चर्चा है। चर्चा यह है कि एमपी में अफसरों की भारी कमी हो गई है। सरकारी दफ्तरों में फाइलें तो बहुत हैं, लेकिन साइन करने वाले हाथ कम हैं। केंद्र सरकार ने संसद में जो ताजा आंकड़े पेश किए हैं, वो चौंकाने वाले हैं।
मध्य प्रदेश अब अफसरों की कमी के मामले में देश में टॉप पर आ गया है। अगर हम आईएएस (IAS) अफसरों की बात करें, तो एमपी पूरे देश में दूसरे नंबर पर है। वहीं, पुलिस विभाग के बड़े अधिकारी यानी आईपीएस (IPS) की कमी में हम चौथे नंबर पर हैं। यह स्थिति राज्य के प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। चलिए विस्तार से समझते हैं कि आखिर माजरा क्या है और आंकड़े क्या कहते हैं।
IAS अफसरों की कमी: यूपी के बाद एमपी
देश में सबसे ज्यादा IAS अफसरों की कमी उत्तर प्रदेश में है, जहां 81 पद खाली हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश का नंबर आता है। यहां कुल 459 स्वीकृत IAS पद हैं, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 391 अफसर ही पदस्थ हैं। इससे स्पष्ट होता है कि मध्य प्रदेश में IAS अफसरों की कमी करीब 68 पदों पर हो रही है, जो कि प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
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देश के टॉप-5 राज्य जहां आईएएस (IAS) अफसरों का टोटा
अगर हम पूरे देश की बात करें, तो स्थिति काफी गंभीर नजर आती है। आईएएस कैडर में खाली पदों के मामले में ये पांच राज्य सबसे आगे हैं:
- उत्तर प्रदेश: यहां 81 पद खाली हैं, जो देश में सबसे ज्यादा है।
- मध्य प्रदेश: हमारे प्रदेश में 68 पद खाली हैं, हम दूसरे पायदान पर हैं।
- राजस्थान: यहां 64 पद खाली हैं, जो तीसरे नंबर पर आता है।
- बिहार: यहां 56 पद खाली हैं, प्रशासनिक चुनौतियां यहां भी कम नहीं हैं।
- AGMUT कैडर: यहां 51 पद खाली हैं, जो पांचवें नंबर पर है।
IPS अफसरों की कमी: बंगाल और ओडिशा के बाद एमपी
आईपीएस अफसरों की कमी का मामला भी कोई अलग नहीं है। पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा 59 पद खाली हैं, जबकि ओडिशा में 53 पद खाली हैं। मध्य प्रदेश इस मामले में चौथे स्थान पर है, जहां 319 स्वीकृत पदों में से 271 पद भरे हुए हैं और 48 पद खाली पड़े हैं। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि राज्य में पुलिस महकमे में भी अधिकारियों की भारी कमी है।
आईपीएस (IPS) कैडर में रिक्तियों की ताजा स्थिति?
आईपीएस अफसरों की कमी के मामले में भी कुछ राज्यों की हालत काफी खराब है। यहां एजीएमयूटी (AGMUT) कैडर सबसे ऊपर है जहां 115 पद खाली हैं। इसके बाद की सूची इस प्रकार है:
| राज्य का नाम | स्वीकृत पद | कार्यरत पद | रिक्त पद |
| पश्चिम बंगाल | 378 | 319 | 59 |
| ओडिशा | 248 | 132 | 53 |
| मध्य प्रदेश | 319 | 271 | 48 |
| आंध्र प्रदेश | 174 | 140 | 34 |
क्यों बढ़ी अफसरों की कमी?
इस स्थिति के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सबसे पहले पदों की संख्या के मुकाबले अफसरों की संख्या कम होने के कारण कार्यभार बढ़ रहा है, जो प्रशासनिक क्षमता को प्रभावित करता है। इसके अलावा अफसरों की कमी का असर न सिर्फ शासन व्यवस्था पर पड़ता है, बल्कि इससे जनहित की योजनाओं के क्रियांवयन में भी रुकावटें आ रही हैं।
क्या किया जा रहा है?
मध्य प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार इस कमी को दूर करने के लिए कदम उठा रही हैं, लेकिन यह मुद्दा आज भी गंभीर बना हुआ है। नए अधिकारियों की भर्ती, ट्रेनिंग और प्रशासन में सुधार के प्रयास जारी हैं, लेकिन तब तक यह कमी प्रदेश की कार्यक्षमता को प्रभावित करती रहेगी।
यह भी समझिए : क्या होता है AGMUT कैडर
AGMUT का पूरा नाम Arunachal Pradesh, Goa, Mizoram and Union Territories कैडर है। यह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय वन सेवा (IFS) का एक संयुक्त कैडर है।
आसान शब्दों में कहें तो यह किसी एक राज्य का कैडर न होकर कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का एक समूह है। इसमें अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम जैसे राज्यों के साथ-साथ दिल्ली, चंडीगढ़, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, लक्षद्वीप और अब जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख भी शामिल हैं।
इस कैडर के अधिकारियों का तबादला इन सभी क्षेत्रों में कहीं भी किया जा सकता है। चूंकि इसमें दिल्ली और जम्मू-कश्मीर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र आते हैं, इसलिए इसे बहुत ही पावरफुल और 'ग्लैमरस' कैडर माना जाता है। इसका नियंत्रण सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के पास होता है।
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