अब बिना इंश्योरेंस नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल, पंप पर ही स्कैन होगी गाड़ियों की नंबर प्लेट

Aman Vaishnav | Sept 01, 2026, 07:40 IST
बिना इंश्योरेंस नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल
मध्य प्रदेश में बिना वैध इंश्योरेंस के गाड़ियों को पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट कमेटी ने भी इस नई व्यवस्था को हरी झंडी दे दी है। पेट्रोल पंपों पर एएनपीआर कैमरे लगेंगे जो गाड़ी की नंबर प्लेट स्कैन करके इंश्योरेंस चेक करेंगे।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • भोपाल में सुप्रीम कोर्ट कमेटी की बैठक हुई।
  • समिति ने बिना बीमा वाहनों पर सख्ती का फैसला किया।
  • अब पेट्रोल पंप पर बीमा की जांच होगी।
  • बिना वैध इंश्योरेंस वाहन को ईंधन नहीं मिलेगा।
  • मध्यप्रदेश में करीब 61 लाख वाहन बिना बीमा के चल रहे हैं।

मध्यप्रदेश में बिना बीमा वाहन चलाना अब आसान नहीं होगा। सरकार जल्द ही नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल नियम लागू करने जा रही है।



इसके तहत बिना वैध थर्ड पार्टी बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं मिलेगा। यह फैसला भोपाल में हुई एक अहम बैठक में लिया गया।



सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी लगातार सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर काम कर रही है। मध्यप्रदेश में लंबे समय से बिना बीमा वाहनों की समस्या बनी हुई है। सरकार अब तकनीक के जरिए इस पर नियंत्रण करना चाहती है।



क्या है नई व्यवस्था

बता दें कि भोपाल में हाल ही में सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता जस्टिस (रिटायर्ड) अभय मनोहर सप्रे ने की। बैठक में नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल व्यवस्था को मंजूरी दी गई।



जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश में करीब 1.75 करोड़ वाहन पंजीकृत हैं। इनमें से करीब 35 प्रतिशत यानी 61 लाख वाहनों के पास वैध बीमा नहीं है।



पहले चरण में सबसे ज्यादा गैर-बीमित वाहनों वाले जिले में पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा। इसके बाद यह नियम पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।



पेट्रोल पंप पर होगी जांच

इस योजना के तहत पेट्रोल पंपों पर खास कैमरे लगाए जाएंगे। इन्हें एएनपीआर (ANPR – Automatic Number Plate Recognition) कैमरे कहा जाता है। ये कैमरे केंद्र सरकार के वाहन पोर्टल से जुड़े होंगे।



जैसे ही कोई वाहन पंप पर पहुंचेगा, कैमरा तुरंत नंबर प्लेट स्कैन करेगा। इसके बाद सिस्टम बीमा की वैधता खुद जांच लेगा। अगर वाहन का बीमा नहीं मिला, तो उसे ईंधन नहीं दिया जाएगा।



क्यों जरूरी है यह कदम

बिना बीमा वाहन से हादसा होने पर पीड़ित परिवार को दोहरी मार झेलनी पड़ती है। ऐसे मामलों में मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT – Motor Accident Claims Tribunal) का हर्जाना सीधे वाहन मालिक से वसूला जाता है।



अगर मालिक के पास पर्याप्त संपत्ति नहीं है, तो पीड़ित को वर्षों इंतजार करना पड़ता है। कई बार कुर्की का आदेश आने के बाद भी प्रक्रिया सालों तक अटकी रहती है। इस वजह से पीड़ित को बीमा कंपनी से पूरा क्लेम भी नहीं मिल पाता।



सड़क हादसे रोकने की तैयारी

बैठक में पशुओं के कारण होने वाले सड़क हादसों पर भी चर्चा हुई। अब हर गांव और वार्ड स्तर पर विशेष समितियां बनाई जाएंगी। इन्हें सक्रिय रखने के लिए प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।



सड़क हादसों में मौतें शून्य पर लाने के लिए चल रहे फैटिलिटी डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम का दायरा भी बढ़ा दिया गया है। पहले यह योजना 6 जिलों में चल रही थी, अब इसे 9 जिलों तक बढ़ाया गया है।



शहडोल, रतलाम, रीवा, सागर, जबलपुर और खरगोन के साथ अब भोपाल, इंदौर और उज्जैन भी इसमें शामिल हो गए हैं।



फिटनेस सेंटर की लापरवाही उजागर

बैठक से पहले जस्टिस सप्रे ने भोपाल बायपास स्थित ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान वाहनों की जांच प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही सामने आई।



सिस्टम में फेल, फिर भी पास

निरीक्षण के दौरान एक वाहन की फिटनेस जांच हो रही थी। टेक्नीशियन ने बताया कि वाहन पास हो गया है। लेकिन कंप्यूटर सिस्टम की रिपोर्ट में वाहन फेल दिखा रहा था। हेडलाइट और हॉर्न में खराबी के कारण वाहन फेल हुआ था।



जस्टिस सप्रे ने इस गड़बड़ी पर सख्त नाराजगी जताई। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिए कि बिना फाइनल सिस्टम रिपोर्ट के कोई भी वाहन पास न किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी सूरत में अनफिट वाहन को फिट सर्टिफिकेट जारी नहीं होना चाहिए।



एंबुलेंस और जागरूकता पर जोर

बैठक में एंबुलेंस रिस्पॉन्स टाइम पर भी चर्चा हुई। शहरी इलाकों में अभी घायलों तक एंबुलेंस पहुंचने में औसतन 16 मिनट लगते हैं। स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम (NHM – National Health Mission) को यह समय घटाने के निर्देश दिए गए हैं।



इसके अलावा स्कूल और कॉलेजों में सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसका मकसद छात्रों को शुरू से ही सड़क सुरक्षा नियमों से जोड़ना है।



FAQ

  1. नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल नियम क्या है?
    यह नियम बिना वैध बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल पंप पर ईंधन देने से रोकता है। पेट्रोल पंप पर लगे कैमरे नंबर प्लेट स्कैन कर बीमा की जांच करेंगे। बीमा न होने पर वाहन को ईंधन नहीं मिलेगा।
  2. नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल नियम मध्यप्रदेश में कब से लागू होगा?
    पहले चरण में सबसे ज्यादा गैर-बीमित वाहनों वाले जिले में पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा। इसके बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। अभी तक कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं हुई है।
  3. बिना बीमा वाहन से हादसा होने पर क्या नुकसान होता है?
    पीड़ित परिवार को हर्जाने के लिए सीधे वाहन मालिक पर निर्भर रहना पड़ता है। मालिक के पास पर्याप्त संपत्ति न होने पर मुआवजा मिलने में वर्षों लग जाते हैं। बीमा कंपनी से भी पूरा क्लेम नहीं मिल पाता।

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