100 से अधिक पुरुष अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट से राहत, नर्सिंग भर्ती में शामिल करने के आदेश

Neel Tiwari | Apr 18, 2026, 20:46 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 100 से अधिक पुरुष अभ्यर्थियों को नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में शामिल होने की अनुमति दी। हालांकि, अंतिम निर्णय पर नियुक्ति और परिणाम निर्भर करेगा।

News in short

  • 100 से अधिक पुरुष याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत
  • नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में आवेदन और शामिल होने की अनुमति
  • परिणाम और नियुक्ति अंतिम आदेश के अधीन रखी गई
  • राज्य सरकार, लोक स्वास्थ्य विभाग और ESB को नोटिस
  • 100% महिला आरक्षण को संविधान के खिलाफ बताया गया

Intro

मध्य प्रदेश में नर्सिंग ऑफिसर भर्ती को लेकर बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है, जहां पुरुष अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने 100 से अधिक पुरुष याचिकाकर्ताओं को भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दे दी है। हालांकि इन अभ्यर्थियों का परिणाम और नियुक्ति अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।



News in detail

पुरुष अभ्यर्थियों का भर्ती में शामिल होने का रास्ता खुला

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर की जस्टिस विशाल घगट की एकलपीठ ने नर्सिंग ऑफिसर भर्ती को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम अंतरिम आदेश पारित किया है। कोर्ट ने सागर निवासी विकास अहिरवार सहित 100 पुरुष याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए उन्हें मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के विज्ञापित 800 से अधिक पदों पर आवेदन करने और पूरी भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति प्रदान कर दी है।



यह आदेश उन अभ्यर्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो अब तक केवल लिंग आधारित प्रतिबंध के कारण आवेदन करने से वंचित रह गए थे। हालांकि, कोर्ट ने इस राहत को अंतरिम बताते हुए स्पष्ट किया कि इन सभी अभ्यर्थियों का परिणाम और संभावित नियुक्ति इस याचिका में पारित होने वाले अंतिम निर्णय के अधीन ही मान्य होंगे। आपको बता दें कि इसके पहले भी याचिका क्रमांक 13056/2026 में 10 पुरुष अभ्यर्थियों को राहत मिल चुकी है।





राज्य सरकार और ESB को नोटिस

सुनवाई के दौरान जस्टिस घगट की एकलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के साथ-साथ मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने संबंधित विभागों से इस भर्ती प्रक्रिया में अपनाए गए प्रावधानों और 100% महिला आरक्षण के आधार को स्पष्ट करने के लिए जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यह मामला केवल एक भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समान अवसर और वैधानिक नियमों के पालन से जुड़ा व्यापक मुद्दा है, इसलिए सरकार का पक्ष जानना जरूरी है।



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100% महिला आरक्षण को कोर्ट में चुनौती

दरअसल, यह पूरा विवाद नर्सिंग ऑफिसर एवं सिस्टर ट्यूटर भर्ती परीक्षा-2026 के उस विज्ञापन से शुरू हुआ, जिसमें नर्सिंग ऑफिसर के सभी पदों को केवल महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कर दिया गया था। पुरुष अभ्यर्थियों ने इस प्रावधान को अन्यायपूर्ण बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनका कहना है कि इस तरह का पूर्ण आरक्षण उन्हें पूरी तरह से प्रतियोगिता से बाहर कर देता है, जिससे उनके रोजगार के अवसर खत्म हो जाते हैं। इसी आधार पर इस भर्ती विज्ञापन को चुनौती दी गई है।



भर्ती नियमों के विपरीत बताया गया प्रावधान

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने कोर्ट को बताया कि ‘मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा (अराजपत्रित) सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2023’ में नर्सिंग ऑफिसर के पद के लिए कहीं भी लिंग आधारित कोई प्रतिबंध निर्धारित नहीं किया गया है। इसके बावजूद भर्ती विज्ञापन में 100% पद केवल महिलाओं के लिए आरक्षित करना सीधे-सीधे इन वैधानिक नियमों का उल्लंघन है। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि जब नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, तो प्रशासनिक स्तर पर इस प्रकार का प्रतिबंध लगाना कानून के दायरे से बाहर है।



संविधान के अनुच्छेदों का उल्लंघन बताया

याचिका में यह भी प्रमुख रूप से तर्क दिया गया कि पुरुष और महिला दोनों ही अभ्यर्थी एक समान नर्सिंग पाठ्यक्रम जैसे B.Sc. Nursing और GNM करते हैं, तथा दोनों के पास समान योग्यता और पंजीकरण होता है। ऐसे में केवल लिंग के आधार पर पुरुषों को पूरी तरह से सरकारी नौकरी के अवसर से वंचित करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 15 (भेदभाव का निषेध) और अनुच्छेद 16 (सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर) का सीधा उल्लंघन है। इस आधार पर याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मांग की है कि भर्ती विज्ञापन के उस हिस्से को निरस्त किया जाए, जिसमें 100% पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं।



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अंतिम फैसले पर टिकी सबकी नजर

फिलहाल हाईकोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम राहत ने पुरुष अभ्यर्थियों को बड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन इस मामले का अंतिम परिणाम अभी बाकी है। कोर्ट द्वारा मांगे गए जवाब के बाद राज्य सरकार और कर्मचारी चयन मंडल का पक्ष सामने आएगा, जिसके आधार पर आगे की सुनवाई होगी। अंतिम निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि पुरुष अभ्यर्थियों की नियुक्ति और उनके परिणाम को लेकर क्या स्थिति बनेगी। फिलहाल इस आदेश के बाद सभी अभ्यर्थियों और संबंधित विभागों की नजर आगामी सुनवाई और कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।



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