नर्सिंग फर्जीवाड़ा: छात्रों की शिफ्टिंग पर हाईकोर्ट सख्त, काउंसिल और याचिकाकर्ता मिलकर बनाएंगे नया मॉड्यूल

Neel Tiwari | Oct 23, 2026, 21:06 IST
नर्सिंग छात्रों के भविष्य पर हाईकोर्ट गंभीर।
मध्य प्रदेश में अपात्र नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को दूसरे कॉलेजों में शिफ्ट करने के मामले में हाईकोर्ट ने अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने नर्सिंग काउंसिल और याचिका लगाने वालों से अपने-अपने सुझाव और आपत्तियां साझा करने को कहा है। इसके आधार पर छात्रों की शिफ्टिंग के लिए नई योजना तैयार करनी होगी। कोर्ट ने यह योजना अगली सुनवाई तक पेश करने के निर्देश दिए हैं।

छात्रों के भविष्य पर हाईकोर्ट का फोकस

मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और फर्जीवाड़े से जुड़े मामलों की हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने छात्रों की पढ़ाई और ट्रेनिंग को लेकर अहम निर्देश दिए। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डबल बेंच ने इन मामलों की सुनवाई की। इनमें लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट विशाल बघेल की जनहित याचिका भी शामिल थी। कोर्ट ने अपात्र नर्सिंग कॉलेजों में पढ़ रहे छात्रों को दूसरे कॉलेजों में शिफ्ट करने की प्रक्रिया सुधारने को कहा है। इसके लिए नया शिफ्टिंग मॉड्यूल तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।



काउंसिल के शिफ्टिंग मॉड्यूल पर याचिकाकर्ताओं की आपत्ति

सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश की। इसमें अपात्र कॉलेजों के छात्रों को दूसरे कॉलेजों में शिफ्ट करने की योजना बताई गई। साथ ही दो शिफ्ट में ट्रेनिंग देने का प्रस्ताव भी रखा गया। इस पर याचिकाकर्ताओं के वकील आलोक वागरेचा और विशाल बघेल ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि छात्रों की ट्रेनिंग में पारदर्शिता होनी चाहिए। कॉलेज चुनने में छात्रों की पसंद का भी ध्यान रखा जाए। इसके अलावा कॉलेजों में जरूरी सुविधाओं और ट्रेनिंग के खर्च को लेकर भी सवाल उठाए गए।



बैंक गारंटी से वसूली जाए पढ़ाई और ट्रेनिंग की लागत

याचिका लगाने वालों ने मांग की कि छात्रों की आगे की पढ़ाई और ट्रेनिंग का खर्च अपात्र नर्सिंग कॉलेजों से वसूला जाए। इसके लिए इन कॉलेजों की बैंक गारंटी जब्त की जाए। उन्होंने कहा कि छात्रों को दूसरे कॉलेजों में शिफ्ट करते समय कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। उनकी पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होनी चाहिए। साथ ही छात्रों को अच्छी ट्रेनिंग और सभी जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए।



प्रस्ताव और आपत्तियां साझा कर तैयार होगा नया मॉड्यूल

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता और छात्रों के भविष्य को देखते हुए अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने नर्सिंग काउंसिल और याचिका लगाने वालों से अपने-अपने प्रस्ताव और आपत्तियां साझा करने को कहा है। दोनों पक्ष मिलकर छात्रों की शिफ्टिंग के लिए नई योजना तैयार करेंगे। इस योजना को अगली सुनवाई तक कोर्ट में पेश करना होगा। कोर्ट चाहता है कि छात्रों को दूसरे कॉलेजों में शिफ्ट करने की प्रक्रिया आसान और पारदर्शी हो। साथ ही छात्रों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।



क्लिनिकल ट्रेनिंग की गुणवत्ता से समझौता नहीं

नर्सिंग की पढ़ाई में अस्पताल में दी जाने वाली ट्रेनिंग बहुत जरूरी होती है। ऐसे में अपात्र कॉलेजों से दूसरे कॉलेजों में भेजे जाने वाले छात्रों को अच्छी ट्रेनिंग मिलनी चाहिए। इसके साथ ही उन्हें सभी जरूरी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। नई शिफ्टिंग योजना में इन बातों का ध्यान रखा जाएगा। छात्रों की पढ़ाई और ट्रेनिंग की गुणवत्ता पर भी जोर रहेगा। शिफ्टिंग की प्रक्रिया साफ और पारदर्शी होनी चाहिए। इसके अलावा नर्सिंग कॉलेजों में हुए फर्जीवाड़े के लिए जिम्मेदार संस्थानों की जवाबदेही तय करना भी जरूरी है।



3 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

इस मामले में नर्सिंग काउंसिल की तरफ से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने कोर्ट में पक्ष रखा। अब नर्सिंग काउंसिल और याचिका लगाने वाले मिलकर शिफ्टिंग की नई योजना तैयार करेंगे। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर 2026 को होगी।

Tags:
  • मध्य प्रदेश
  • नर्सिंग फर्जीवाड़ा
  • नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता
  • जस्टिस आनंद पाठक
  • जस्टिस बीपी शर्मा
  • मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल
  • छात्रों की शिफ्टिंग