नर्सिंग फर्जीवाड़ा: सुप्रीम कोर्ट में चंबल के छात्र हारे, HC भी कॉलेजों पर सख्त
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों की जांच सीबीआई कर रही है।
- ग्वालियर-चंबल के छात्र परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं।
- छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में राहत की मांग की थी।
- हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के बिना राहत नहीं दी।
- कुछ कॉलेजों ने अब सीबीआई जांच स्वीकार कर ली है।
नर्सिंग फर्जीवाड़े में आज दो अदालतों में सुनवाई
मध्यप्रदेश के चर्चित नर्सिंग मामले में मंगलवार को सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में अलग-अलग मामलों पर सुनवाई हुई। दोनों जगह परीक्षा और सीबीआई जांच का मुद्दा सामने आया। सुप्रीम कोर्ट में छात्रों ने राहत की मांग की। हाईकोर्ट में कॉलेजों की जांच का मुद्दा उठा।
सुप्रीम कोर्ट में ग्वालियर-चंबल के छात्रों को झटका
ग्वालियर-चंबल के नर्सिंग कॉलेजों से जुड़े छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। छात्रों ने 13 अगस्त के हाईकोर्ट आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोका था। छात्रों ने सीबीआई जांच पर रोक का हवाला दिया था। उन्होंने पुरानी व्यवस्था के आधार पर परीक्षा की मांग की।
छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में क्या तर्क दिया
छात्रों का कहना था कि सीबीआई जांच पर रोक लगी है। इसलिए उन्हें परीक्षा से रोकना उचित नहीं होगा। छात्रों ने पहले की तरह परीक्षा में बैठने की मांग की। उनका कहना था कि कॉलेजों की जांच पहले हो चुकी है। इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेज प्रबंधन पर सवाल उठाया
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने अहम टिप्पणी की। उन्होंने छात्रों से कॉलेज प्रबंधन से सवाल करने को कहा। छात्रों ने कॉलेजों को फीस और दूसरी रकम दी थी। इसलिए कॉलेज प्रबंधन को जांच का सामना करना चाहिए। जांच में कॉलेज सही मिला तो स्थिति साफ होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी खारिज कर दी
सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की एसएलपी खारिज कर दी। कोर्ट ने छात्रों को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी। परीक्षा की अनुमति के लिए हाईकोर्ट में मांग रखी जा सकती है। इससे छात्रों के लिए एक रास्ता खुला रहा। अब आगे का फैसला हाईकोर्ट में होना है।
हाईकोर्ट में नर्सिंग मामलों पर अलग सुनवाई
दूसरी ओर हाईकोर्ट में नर्सिंग मामलों की सुनवाई हुई। इसमें लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका भी शामिल थी। इसके अध्यक्ष अधिवक्ता विशाल बघेल ने याचिका दायर की है। अन्य नर्सिंग मामलों पर भी कोर्ट ने सुनवाई की। ग्वालियर-चंबल के कॉलेजों का मुद्दा भी सामने आया।
हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के बिना राहत नहीं दी
हाईकोर्ट ने भी ग्वालियर-चंबल के कॉलेजों को राहत नहीं दी। कोर्ट ने सीबीआई जांच को जरूरी माना। कोर्ट ने कॉलेजों के सामने एक विकल्प भी रखा। कॉलेज सीबीआई जांच कराने की लिखित सहमति दे सकते हैं। इसके बाद उनके छात्रों की परीक्षा पर विचार हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण लाने को कहा
हाईकोर्ट ने कॉलेजों को सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता बताया। कॉलेजों को जांच को लेकर स्पष्ट आदेश लाना होगा। इसके बाद हाईकोर्ट आगे की कार्रवाई कर सकता है। कोर्ट ने परीक्षा का रास्ता जांच से जोड़ दिया है। कॉलेज की स्थिति के आधार पर छात्रों को राहत मिल सकती है।
कुछ कॉलेजों ने सीबीआई जांच की अंडरटेकिंग दी
सुनवाई के दौरान कुछ कॉलेज आगे आए। उन्होंने सीबीआई जांच कराने की लिखित सहमति दी। हाईकोर्ट ने इन अंडरटेकिंग को रिकॉर्ड पर लिया। कोर्ट ने कॉलेजों को सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण लाने कहा। इसके बाद उनके छात्रों की परीक्षा पर फैसला हो सकता है।
2021 की जांच पर भी हाईकोर्ट ने सवाल उठाए
मामले में साल 2021 की जांच का भी जिक्र हुआ। उस समय ग्वालियर बेंच ने दस सदस्यीय समिति बनाई थी। हाईकोर्ट के अनुसार उस जांच में कमी रह गई थी। उसमें फैकल्टी डुप्लीकेसी की जांच नहीं हुई थी। इसी कारण पुरानी जांच को पर्याप्त नहीं माना गया।
परीक्षा की राह अब जांच के फैसले से जुड़ी
ग्वालियर-चंबल अंचल के छात्रों की परीक्षा का मामला उलझा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने सीधे परीक्षा की अनुमति नहीं दी। हाईकोर्ट ने भी बिना जांच राहत से इनकार किया। अब कॉलेजों की जांच स्वीकार करने की स्थिति महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट का स्पष्टीकरण भी अहम रहेगा।
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