MPPSC महाआंदोलन में इस बार भीड़ क्यों नहीं, 13 महीने पहले पुराने आंदोलन से इस बार क्या बदल गया

Sanjay Gupta | Jan 25, 2026, 14:36 IST
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नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन का महाआंदोलन 24 से 27 जनवरी तक हो रहा है। इसे न्याय यात्रा 2.0 का नाम दिया गया है। यह आंदोलन पीएससी से संबंधित विविध मांगों को लेकर किया जा रहा है। हालांकि, आंदोलन में उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं जुट पाई है।

News In Short

  • न्याय यात्रा 2.0 आंदोलन 24 से 27 जनवरी तक मध्यप्रदेश में हो रहा है।
  • आंदोलन में उम्मीदवारों की संख्या कम है, पिछले आंदोलन के मुकाबले भीड़ घट गई।
  • प्रदर्शनकारियों ने पीएससी की विभिन्न भर्ती में पदों की बढ़ोतरी की मांग की।
  • आंदोलन में पुलिस की सख्ती और कोचिंग संचालकों पर दबाव की वजह से भीड़ कम है।
  • आंदोलन की मंजूरी पाने में कई कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ा था।

News In detail

नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन (NEYU) का महाआंदोलन 24 से 27 जनवरी तक हो रहा है। इस आंदोलन को न्याय यात्रा 2.0 नाम दिया गया है। यह आंदोलन पीएससी से संबंधित मांगों को लेकर किया जा रहा है।



इस आंदोलन को एक दिन और एक रात हो चुकी है। विरोध प्रदर्शनकारियों की संख्या एक हजार अनुमानित थी, लेकिन यह दस फीसदी भी नहीं है। बीते 13 माह पहले दिसंबर 2024 में हुए आंदोलन से इस बार बहुत कुछ बदला है।



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इस बार आंदोलन में भीड़ कम होने की वजह

  • सबसे अहम वजह है कि बीते आंदोलन के समय उम्मीदवारों को जोश था। उम्मीद थी की बात मानी जाएगी, उसमें आंदोलन शर्तों के साथ खत्म हुआ, सीएम से भी मुलाकात हुई। जब पांच दिन बाद ही पद आए तो महज 158 पद थे। इतने बड़े आंदोलन के बाद भी कोई मांग नहीं मानी गई। ना ही 87 फीसदी रिजल्ट की कॉपियां दिखाई गई। ऐसे में अब उम्मीदवार निराश हैं।
  • दूसरी वजह परीक्षाओं में देरी और कम पदों के कारण पहले ही उम्मीदवार कम हो चुके हैं। साथ ही अब इंदौर की जगह अधिकांश अपने गृह जिले लौट रहे हैं। इंदौर में अब वह भीड़ नहीं रही है। इसका दशा, बंद हो गई 70 फीसदी कोचिंग और कम आवेदन (2025 में मात्र 1.10 लाख आवेदन थे) खुद बताते हैं।
  • तीसरी वजह पुलिस की सख्ती है। बीते आंदोलनकारियों पर कई केस लाद दिए गए थे। ऐसे में जो वाकई चयनित होकर अधिकारी बनना चाहते हैं वह पुलिस केस से डरते हैं।
  • चौथी वजह कोचिंग पर सख्ती है। पहले भीड़ कोचिंग संचालक ही लेकर आए थे। इस बार पुलिस ने कोचिंग संचालकों पर सख्ती कर दी है। बीते आंदोलन में शामिल कुछ संचालकों पर बाउंडओवर हो चुका है। उन्होंने आंदोलन से दूरी बना ली है। ऐसे में एक बड़ी भीड़ कम हो चुकी है

उम्मीदवार अभी पीएससी और ईएसबी की किसी ना किसी परीक्षा की तैयारी में लगे हुए हैं। मेडिकल आफिसर के इंटरव्यू है, फिर पीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर के हैं। पीएससी प्री अप्रैल में होना है तो मेंस 2025 का भी इंतजार है।



ऐसे में तैयारी करना वाला उम्मीदवार चुपचाप अपने कमरे में बैठकर तैयारी में जुटा हुआ है। वह मान चुका है कि आंदोलनों से कुछ नहीं मिलेगा। इन मांगों में से पीएससी के हाथ में ज्यादा कुछ है भी नहीं, सब सरकार को करना है।



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क्या हैं आंदोलन की प्रमुख मांगें

  • मध्यप्रदेश राज्य सेवा परीक्षा 2024 में न्यूनतम 700 पदों पर भर्ती की जाए।
  • मध्यप्रदेश राज्य वन सेवा परीक्षा 2026 में कम से कम 100 पद सुनिश्चित किए जाएं। (विशेष रूप से UR-OBC-EWS वर्ग के लिए रिक्त पद बढ़ाए जाएं)।
  • भर्ती में हो रहे घपले घोटाले को रोकने के लिए राज्य स्तरीय सशक्त पेपर लीक कानून बने। इसकी ड्राफ्टिंग में छात्र प्रतिनिधियों को भी रखा जाए।
  • मध्यप्रदेश राज्य अभियांत्रिकी सेवा परीक्षा 2025 में न्यूनतम 400 पदों पर भर्ती की जाए।
  • ADPO भर्ती 2026 में कम से कम 300 पदों का विज्ञापन जारी किया जाए। अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को परीक्षा में सम्मिलित होने की अनुमति दी जाए।
  • सहायक प्राध्यापक परीक्षा (NET/SET Qualified) अंतिम वर्ष के छात्रों को परीक्षा में सम्मिलित करने की अनुमति दी जाए।
    (जैसा कि राजस्थान राज्य में यह व्यवस्था पहले से लागू है)
  • वन सेवा परीक्षा में कम से कम 87% उत्तर-कुंजी (कॉपी) अभ्यर्थियों को दिखाने की व्यवस्था लागू की जाए।
    100% पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
  • अतिथि-संविदा प्रथा को समाप्त किया जाए। सहायक प्राध्यापक परीक्षा में अतिथि विद्वान आरक्षण व्यवस्था समाप्त कर, पूर्व की भांति 20 बोनस अंक पुनः लागू किए जाएं।
  • इंटरव्यू प्रणाली में सुधार करते हुए राज्य सेवा परीक्षा में इंटरव्यू के अंक 100 निर्धारित किए जाएं।
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सहायक संचालक उद्योग सहित सभी विभागों में पदों को अराजनीतिक एवं पारदर्शी बनाते हुए योग्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।



परीक्षा प्रक्रिया में समयबद्धता सुनिश्चित की जाए। MPPSC की सभी परीक्षाएं UPSC की तर्ज पर एक वर्ष की समयसीमा में पूर्ण हों। परीक्षा विधि घोषित होने के बाद उसमें परिवर्तन न किया जाए और गलत प्रश्नों की संख्या 1–2 से ज्यादा न हो।



आंदोलनकरी लगातार उम्मीदवारों को बुला रहे

आंदोलनकारी राधे जाट, रणजीत किसानवंशी व अन्य आंदोलन में लगे हुए हैं। वह 24 जनवरी को दिन-रात रहे और 25 को भी वहीं जमे हुए हैं। लगातार लाइब्रेरी और कोचिंग संचालकों से आह्वान किया जा रहा है कि वह उम्मदीवारों को आंदोलन के लिए भेजें, ताकि इसे बल मिल सके। यह मांगे उन्हीं के बेहतर भविष्य के लिए है। यह सभी को बताया जा रहा है। लेकिन इन सभी के बाद भी जोश पूरा है लेकिन भीड़ कम है।



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बड़ी मुश्किल से मिली है मंजूरी

यह आंदोलन की मंजूरी बड़ी मुश्किल से मिली है। यह पहले 15 जनवरी को होना थी लेकिन पुलिस ने मंजूरी नहीं दी। इसके बाद हाईकोर्ट गए और वहां फैसला हुआ कि पुलिस नए सिरे से आवेदन लेकर फैसला ले। पुलिस ने फिर मंजूरी देने से मना कर दिया। इस पर एक बार फिर उम्मीदवार हाईकोर्ट गए।



अधिवक्ता विभोर खंडलेवाल और जयेश गुरनानी ने तर्क रखे और फिर हाईकोर्ट ने ही सीधी मंजूरी दी। इस सारी उठापठक में बार-बार तारीख बदली गई और आंदोलन पर असमंजस बना रहा। इसके चलते भी वैसी भीड़ नहीं जुट सकी।



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यह दो काम आयोग कर सकता है

यह बात भी सही है कि इसमें से अधिकांश मांग आयोग के बस में नहीं है, जैसे की अधिक पद आना। भर्ती नियमों जैसे कि अंतिम वर्ष के छात्रों को असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में बैठाना, फिर 100 फीसदी रिजल्ट देना। यह सभी शासन स्तर के फैसले हैं। यह भी सत्य है कि दो मांग आयोग के बस में है, पहली बड़ी मांग 87 फीसदी रिजल्ट की कॉपियां दिखाना जो 2019 की परीक्षा से ही बंद कर दी गई है।



यह भी कर दें तो एक बड़ी मांग पूरी होती है। इस पर बीते आंदोलन में सहमति बनी थी कि आयोग बोर्ड में प्रस्ताव लाकर इसे करेगा लेकिन फिर नहीं किया। दूसरे इंटरव्यू के अंकों में कमी। भले ही यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत 12 फीसदी अधिकतम अंक होने के दायरे में हैं। फिर भी अन्य आयोगों के मुकाबले यह काफी अधिक है।



इसके अंकों के चलते मेंस में अधिक अंक लाने के बाद भी उम्मीदवार काफी नीचे चला जाता है। ऐसे में इसका वेटेज कम कर बड़ी राहत दी जा सकती है। यह दो काम आयोग स्तर पर संभव है।



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