OBC आरक्षण केस में अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर और विनायक शाह नहीं रखेंगे सरकार का पक्ष, SG और ASG को सौंपी कमान
News In Short
- कोर्ट में बहस के बाद सरकार ने पुराने काउंसिल को अलग किया।
- अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह अब सरकार का पक्ष नहीं रखेंगे।
- सॉलिसिटर जनरल (SG ) तुषार मेहता और ASG केएम नटराज को जिम्मेदारी सौंपी गई।
News In Detail
कोर्ट में बहस के बाद सरकार का बड़ा फैसला
OBC आरक्षण मामले की सुनवाई के दौरान एमपी हाईकोर्ट में स्थिति गंभीर हो गई। दरअसल, यह सामने आया कि कुछ अधिवक्ता, जिन्हें सरकार की ओर से नियुक्त किया गया है, वही सरकार के खिलाफ तर्क रखने की स्थिति में हैं।
इस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। इसके बाद स्पष्ट किया गया कि कोई भी सरकारी वकील सरकार के खिलाफ पक्ष नहीं रख सकता है। इसी विवाद के बाद अब मध्यप्रदेश सरकार ने तत्काल प्रभाव से अपनी लीगल टीम में बदलाव कर दिया है।
रामेश्वर ठाकुर और विनायक शाह हटाए गए
सरकार की ओर से OBC वर्ग का पक्ष रखने के लिए नियुक्त अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर और अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह को अब इस केस से अलग कर दिया गया है।
कोर्ट में हुई बहस के दौरान यह मुद्दा उठा था कि, अधिवक्ता विनायक शाह एक याचिका में 27% से अधिक आरक्षण की मांग रखते हैं। बता दें कि उन्हें सरकार की ओर से भी पैरवी के लिए नियुक्त किया गया था।
इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि ऐसी स्थिति स्वीकार्य नहीं है। इसके बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।
नई लीगल टीम से अधिवक्ता का नाम अलग
मंगलवार 28 अप्रैल को ही सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष माफी मांगी। साथ ही यह जानकारी दी की सामान्य प्रशासन विभाग, वल्लभ भवन भोपाल द्वारा 27 अप्रैल 2026 को आदेश जारी हुआ था।
इस आदेश के अनुसार अब इस मामले में राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज, महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और महाधिवक्ता कार्यालय के अन्य विधि अधिकारी पैरवी करेंगे।
इस आदेश के साथ ही इस विषय में पहले जारी सभी नियुक्ति आदेशों को निरस्त कर दिया गया है।
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