ओबीसी आरक्षण केस की सुनवाई फिर टली, अब 24 जून को तय होगी आगे की राह
समझें क्या है पूरा मामला...
- ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई 16 जून को आगे नहीं बढ़ सकी।
- जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस भगवती प्रसाद शर्मा की बेंच ने नए सिरे से सुनवाई के संकेत दिए।
- पूर्ववर्ती बेंच के समक्ष हुई आंशिक सुनवाई को अब आधार नहीं माना जाएगा।
- 24 जून को तय होगी सुनवाई की रूपरेखा और समय-सारिणी।
आखिरकार लिस्ट हुआ, लेकिन सुनवाई फिर टल गई
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित ओबीसी आरक्षण मामले को लेकर मंगलवार, 16 जून को हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। मामला जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस भगवती प्रसाद शर्मा की नई डिवीजन बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध तो हुआ, लेकिन बहस आगे नहीं बढ़ सकी।
कोर्ट के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि पूर्ववर्ती खंडपीठ के समक्ष आरक्षण का विरोध करने वाले पक्ष की बहस आंशिक रूप से पूरी हो चुकी थी। साथ ही, पिछले आदेश के अनुसार उन्हें एक दिन का अतिरिक्त समय दिया जाना था। इसके बाद आरक्षण समर्थक पक्ष को अपनी दलीलें रखनी थीं।
बेंच बदली तो बदल गई पूरी प्रक्रिया
सुनवाई के दौरान नई डिवीजन बेंच ने स्पष्ट संकेत दिए कि परिस्थितियां अब पूरी तरह बदल चुकी हैं। कोर्ट ने माना कि जिस खंडपीठ के समक्ष पहले आंशिक सुनवाई हुई थी। उसकी जगह अब नई बेंच के सामने तथ्यों का आना आवश्यक है।
ऐसे में पूर्व मुख्य न्यायाधीश की बेंच के समक्ष हुई आंशिक सुनवाई का कोई औचित्य शेष नहीं रह जाता। इसी कारण मामले की सुनवाई अब बिल्कुल नए सिरे से की जाएगी। इसका अर्थ यह है कि पक्षकारों को दोबारा अपनी दलीलें रखनी होंगी। साथ ही, पूरा मामला फिर से सुना जाएगा।
24 जून को नहीं होगी मेरिट पर सुनवाई
कोर्ट ने मामले को 24 जून के लिए सूचीबद्ध किया है। वहीं, सुनवाई के दौरान ही कोर्ट के रुख से यह स्पष्ट हुआ कि उस दिन मुख्य विवाद पर सुनवाई नहीं होगी। बल्कि डिवीजन बेंच यह तय करेगी कि इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई आगे किस ढंग से की जाएगी। प्रतिदिन किस निश्चित समय पर होगी और सुनवाई की रूपरेखा क्या रहेगी।
सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एम. नटराजन उपस्थित रहे, जबकि ओबीसी वर्ग की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह ने पक्ष रखा। वहीं आरक्षण विरोधी पक्ष की मुख्य याचिका में पैरवी कर रहे अधिवक्ता आदित्य सांघी न्यायालय में उपस्थित नहीं थे।
अब हजारों अभ्यर्थियों और उम्मीदवारों की निगाहें 24 जून पर टिकी हैं, जब इस बहुप्रतीक्षित मामले की आगे की दिशा तय होगी।