ओबीसी केस के कारण कब तक होल्ड रहेंगे रिजल्ट और भर्ती विज्ञापन, सरकार क्या सोच रही है
सरकार के स्तर पर क्या चल रहा है।
ओबीसी केस में हाईकोर्ट के आए फैसले के बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ एसएलपी दायर कर दी है। यह याचिका भी दस खामियों की वजह से अभी तक मंजूर नहीं हुई है और न ही इसका एसएलपी नंबर जनरेट हुआ है।
यह केस कब लिस्ट होगा इसकी कोई संभावना अभी नहीं है। इन सभी असमंजस के बीच उम्मीदवारों के लगातार सवाल यही हैं कि क्या रिजल्ट और भर्ती विज्ञापन नहीं आएंगे। इस पर सबसे पहले जवाब द सूत्र ने 10 अक्टूबर को दिया था।
क्यों रुके हैं रिजल्ट और भर्ती विज्ञापन
हाईकोर्ट ने ओबीसी केस के फैसले में ओबीसी आरक्षण को 27 प्रतिशत करने के एक्ट को गैर-संवैधानिक घोषित किया। साथ ही कहा कि आरक्षण 14 प्रतिशत ही रहेगा। वहीं फैसले के बिंदु 221 में सबसे अहम बात कही कि अब चयन एजेंसियां सारे रिजल्ट इसी आधार पर जारी करेंगी। यानी एक तरह से 87-13 प्रतिशत फॉर्मूला खारिज कर दिया। अब चयन एजेंसियों को इस आदेश के तहत ओबीसी को 14 प्रतिशत आरक्षण के अनुसार 100 प्रतिशत रिजल्ट देना है। इस आदेश के बाद ही रिजल्ट, विज्ञापन सब होल्ड हो गए।
अब सरकार के स्तर पर क्या चल रहा है
यही सबसे अहम है। भोपाल स्तर से मिली जानकारी के अनुसार सरकार, विधि विभाग और जीएडी ने फिलहाल सारा मामला सुप्रीम कोर्ट के पाले में डाल दिया है। यानी जब तक सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिलती, तब तक सरकार इसमें कोई कदम नहीं उठाने वाली है। जीएडी ने पीएससी, ईएसबी को इसमें आगे कोई भी निर्देश नहीं देने की नीति बनाई है। यानी रिजल्ट, भर्ती विज्ञापन होल्ड ही रहेंगे।
क्यों होल्ड रखना चाहती है सरकार
सरकार ओबीसी को नाराज नहीं करना चाहती है। इसलिए वह 14 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के साथ 100 प्रतिशत रिजल्ट नहीं देना चाहती है। ऐसा करने से इतने सालों से रुके 13 प्रतिशत होल्ड पद भी अनारक्षित वर्ग को जाएंगे। सरकार को डर है कि इससे ओबीसी समाज एकदम से भड़क जाएगा, क्योंकि वह इन पदों पर अपना अधिकार मानता है।
इसी तरह भर्ती विज्ञापन में भी पदों को आरक्षण के अनुसार बांटना होता है। आरक्षण की स्थिति बतानी होगी। अभी की स्थिति में ओबीसी को 14 प्रतिशत ही आरक्षण है। ऐसे में सरकार यहां भी नाराजगी नहीं लेना चाहती है, क्योंकि आगे रिक्त पदों के हिसाब से काफी पद आने हैं। इसलिए भर्ती विज्ञापन भी अभी रोक दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार क्या चाहती है
कुल मिलाकर सरकार की मंशा सुप्रीम कोर्ट में यही है कि कैसे भी करके हाईकोर्ट के 09 अक्टूबर के फैसले पर स्टे मिल जाए। फिर भले ही सुप्रीम कोर्ट में केस चलता रहे। जैसे कि जब ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत करने का मामला पहली बार सुप्रीम कोर्ट गया था, तब भी सरकार की मंशा और मांग पहले यही थी कि जो भर्ती निकली है, उसमें 27 प्रतिशत आरक्षण के तहत रिजल्ट जारी करने दिए जाएं और पद भरने दिए जाएं। सरकार ने छत्तीसगढ़ की तरह राहत मांगी थी जो मान्य नहीं हुई थी। अभी भी सरकार की पहली प्राथमिकता यही है कि पहले हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगे और फिर बाद में केस चलता रहे।
स्टे मिलने से क्या होगा, सक्रिय होगा 87-13 फॉर्मूला
हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे मिलने से सरकार को तत्काल यह राहत मिलेगी कि फिर से 27 प्रतिशत आरक्षण का एक्ट जीवित हो जाएगा। यानी 87-13 प्रतिशत फॉर्मूला भी सक्रिय हो जाएगा और सरकार तत्काल सभी चयन एजेंसियों से कहेगी कि इस फॉर्मूले से सभी रिजल्ट जारी कर दो। साथ ही इसी फॉर्मूले के तहत भर्ती विज्ञापन जारी होने शुरू हो जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने स्टे नहीं दिया तो क्या होगा
इस मामले में यूथ फॉर इक्वेलिटी ने कैविएट भी दायर कर दी है, जिससे एकपक्षीय स्टे न मिले। यदि स्टे नहीं मिलता है तो सरकार क्या करेगी? इस पर कानूनविदों का कहना है कि सामान्य तौर पर स्टे मिल जाता है, ताकि संवैधानिक मसलों पर सुप्रीम कोर्ट मेरिट के आधार पर इस मुद्दे को देख सके। दूसरी ओर यदि स्टे नहीं मिलता है तो यह उम्मीदवारों के लिए बड़ा झटका होगा, क्योंकि पूरी आशंका है कि सरकार 14 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर रिजल्ट और भर्ती विज्ञापन जारी नहीं करेगी। यानी ये होल्ड पड़े रहेंगे।
90 दिन में पालन करना है हाईकोर्ट का आदेश
हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर के आदेश में इसका पालन करने के लिए 90 दिन की समयसीमा दी है। इसमें साफ है कि होल्ड 13 प्रतिशत पद अनारक्षित वर्ग को देने हैं। सामान्य वर्ग इस मामले में पीएससी, ईएसबी, जीएडी और सीएस को लीगल नोटिस भी दे चुका है। ऐसी स्थिति में पालन नहीं होने पर सामान्य वर्ग अवमानना केस लगा सकता है।
इससे बहुत फायदा होगा, ऐसा नजर नहीं आता है, क्योंकि जब कोई मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया तो वहां हाईकोर्ट बहुत ज्यादा दखल नहीं देता है। वहीं सरकार को अवमानना केस में भी कहने के लिए रहेगा कि हमारी याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगी हुई है।
कुल मिलाकर 13 फीसदी पद होल्ड ही रहेंगे
इसमें फिलहाल स्थिति तो यही बन रही है कि सरकार इन 13 प्रतिशत होल्ड पदों को अनारक्षित वर्ग को देने के मूड में बिल्कुल भी नहीं है। ऐसा करने से सरकार को अपनी राजनीतिक स्थिति ओबीसी वर्ग के बीच खराब होते दिखेगी। वहीं कांग्रेस इस मामले को राजनीतिक तौर पर भुनाएगी। इसलिए हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी ये 13 प्रतिशत पद होल्ड ही रहने वाले हैं।
सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार हार जाए तो
अब सबसे अंतिम स्थिति यह है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी केस हार जाए तो क्या होगा। इस स्थिति में मोहन सरकार मास्टर स्ट्रोक ला सकती है। इसके तहत फिर से ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत करने का ऑर्डिनेंस लाया जा सकता है या फिर विधानसभा में एक्ट लाया जा सकता है।
यानी सारी स्थितियों के अनुसार सरकार 13 प्रतिशत पद होल्ड ही रखेगी या फिर ओबीसी को देगी। अनारक्षित वर्ग को देने के लिए वह बिल्कुल भी तैयार नहीं होगी। पूरी कानूनी लड़ाई इसी आधार पर आगे लड़ने की तैयारी की जा रही है।
दिसंबर में देना होता है विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट में केस लिस्ट नहीं हो रहा है और उधर भर्ती विज्ञापन जारी करने की समयसीमा पास आ रही है। राज्य सेवा परीक्षा के विज्ञापन साल के अंत में दिसंबर माह के आखिरी सप्ताह में जारी होते हैं। यानी अब इसके लिए भी करीब 55 दिन ही बचे हुए हैं। वहीं पीएससी 2025 और 2026 के रिजल्ट होल्ड हो चुके हैं।
पीएससी 2025 तो पहले ही हाईकोर्ट के एक केस के चलते डेढ़ साल देरी से चल रही है और अब रिजल्ट होल्ड हो चुके हैं। ऐसे में मेन्स रिजल्ट के बाद होने वाले इंटरव्यू और अंतिम चयन सूची भी लंबे समय के लिए अटक गई है। वहीं सीएम डॉ. मोहन यादव रिक्त पदों को भरने के लिए साल 2027 में स्पेशल पीएससी कराने की भी घोषणा कर चुके हैं। ये सभी होल्ड पर हैं। आयोग का परीक्षा कैलेंडर भी अटका हुआ है।