ओबीसी आरक्षण केस में सुप्रीम कोर्ट में लगी एसएलपी में दस खामियां, दूर करने के बाद ही लिस्टिंग होगी

Sanjay Gupta | Sootr Creatives | Oct 26, 2026, 13:32 IST
OBC आरक्षण केस में 10 खामियों ने रोकी सुनवाई की राह
मध्य प्रदेश में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर को अपने फैसले में 2019 के आरक्षण कानून को असंवैधानिक घोषित किया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी। हालांकि याचिका में 10 खामियां सामने आई हैं।

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर भी इनका जिक्र है। इन खामियों को दूर करने के बाद ही केस की लिस्टिंग हो सकेगी। सुनवाई में हो रही देरी से उम्मीदवारों की चिंता बढ़ गई है।



सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की SLP में बताईं ये 10 खामियां

1. याचिका के कवर पेज और पेज नंबर B व 162 पर तारीखें अलग-अलग हैं। इंडेक्स में भी तारीखें मेल नहीं खा रही हैं।



2. याचिका के पन्नों की नंबरिंग तय नियमों के अनुसार ठीक करनी होगी।



3. याचिका में जज का नाम नहीं दिया गया है। पन्नों की नंबरिंग भी सही करनी होगी।



4. पेज नंबर 11 से 13 तक के दस्तावेज साफ नहीं हैं। कुछ स्थानीय भाषा में हैं। कुछ पर अंडरलाइन या वॉटरमार्क हैं। इनकी टाइप की हुई कॉपी देनी होगी।



5. जिन पन्नों में रंगीन जानकारी है। उनकी चार रंगीन कॉपियां जमा करनी होंगी।



6. याचिका के पेज नंबर 18 पर दर्ज तारीख दूसरे दस्तावेजों से मेल नहीं खा रही है।



7. याचिका के कई पन्नों की नंबरिंग में गड़बड़ी है। इसे ठीक करना होगा।



8. पेज नंबर 392 और 393 साफ दिखाई नहीं दे रहे हैं। इनकी साफ कॉपियां जमा करनी होंगी।



9. वकालतनामे में 'पहचाना गया' और 'प्रमाणित' जैसे जरूरी शब्द नहीं हैं। दूसरे याचिकाकर्ता के हस्ताक्षर भी कराने होंगे।



10. एसएलपी में कोर्ट से राहत मांगने वाले हिस्से में मामले की अतिरिक्त जानकारी लिखी गई है। इसे हटाना होगा।



सुप्रीम कोर्ट में सरकार की SLP में 10 खामियां

अभी एसएलपी नंबर जारी नहीं हुआ

याचिका में 10 खामियां होने के कारण मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लिस्ट नहीं हुआ है। सरकार को पहले इन खामियों को दूर करना होगा। इसके बाद ही केस की लिस्टिंग आगे बढ़ सकेगी। फिलहाल याचिका को नियमित एसएलपी नंबर नहीं मिला है। अभी इसका डायरी नंबर 65767/2026 है।



उम्मीदवारों ने सरकार पर लगाए जानबूझकर देरी के आरोप

ओबीसी आरक्षण मामले में हो रही देरी से उम्मीदवार नाराज हैं। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों का आरोप है कि सरकार जानबूझकर 13 फीसदी होल्ड पदों का मामला लटका रही है। वहीं ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों का कहना है कि सरकार उन्हें 27 फीसदी आरक्षण नहीं देना चाहती। इसलिए केस की सुनवाई में देरी हो रही है। उम्मीदवारों का कहना है कि सरकार के पास अनुभवी वकील हैं। इसके बावजूद याचिका में इतनी खामियां होना सवाल खड़े करता है। सरकार को जल्द खामियां दूर करके सुप्रीम कोर्ट में केस लिस्ट कराना चाहिए।



हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर को सुनाया था फैसला

ओबीसी आरक्षण मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर को फैसला सुनाया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि याचिका में कुछ खामियां सामने आई हैं। इन्हें अभी तक दूर नहीं किया गया है। इसी वजह से केस की लिस्टिंग नहीं हो सकी है। वहीं हाईकोर्ट ने सरकार को अपने आदेश का पालन करने के लिए 90 दिन का समय दिया है। यह समयसीमा 9 जनवरी 2027 को पूरी होगी।



एमपी हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षण पर क्या आदेश दिए?

जबलपुर हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर को ओबीसी आरक्षण मामले में अहम फैसला सुनाया था। कोर्ट के आदेश की मुख्य बातें इस प्रकार हैं।



  • 27 फीसदी आरक्षण का कानून रद्द: हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी करने वाले 2019 के एक्ट को असंवैधानिक घोषित किया है। कोर्ट के मुताबिक ओबीसी वर्ग को 14 फीसदी आरक्षण ही दिया जा सकता है।
  • 14 फीसदी आरक्षण पर जारी होंगे रिजल्ट: एमपीपीएससी और कर्मचारी चयन मंडल समेत सभी भर्ती एजेंसियों को 14 फीसदी ओबीसी आरक्षण के आधार पर रिजल्ट जारी करने होंगे।
  • पुरानी नियुक्तियां रहेंगी मान्य: मार्च 2019 से सितंबर 2022 के बीच अतिरिक्त ओबीसी आरक्षण के तहत हुई नियुक्तियां मान्य रहेंगी। इन पदों का समायोजन आगे की तीन भर्तियों में किया जाएगा।
  • 13 फीसदी होल्ड पद होंगे अनारक्षित: कोर्ट के आदेश के मुताबिक रोके गए 13 फीसदी पद अनारक्षित वर्ग में जाएंगे। सरकार को आदेश का पालन करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है।

FAQ's



  1. सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई में देरी का कारण क्या है?
    ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई में देरी का मुख्य कारण याचिका में मौजूद 10 खामियां हैं, जिन्हें सरकार को पहले दूर करना होगा।
  2. क्या एमपी सरकार को ओबीसी आरक्षण के मामले में सुनवाई के लिए समयसीमा दी गई है?
    हाँ, जबलपुर हाईकोर्ट ने सरकार को ओबीसी आरक्षण संबंधी आदेश का पालन करने के लिए 90 दिन का समय दिया है, जो 9 जनवरी 2027 को समाप्त होगा।
  3. एमपी हाईकोर्ट के द्वारा ओबीसी आरक्षण पर दिए गए फैसले में क्या प्रमुख बातें हैं?
    हाईकोर्ट ने 2019 के कानून द्वारा ओबीसी आरक्षण को 27 फीसदी से घटाकर 14 फीसदी करने का फैसला सुनाया है और आदेश दिया है कि सभी भर्ती एजेंसियों को रिजल्ट 14 फीसदी के आधार पर जारी करने होंगे।
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