ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में बढ़ी कानूनी हलचल, सरकार के बाद भाजपा OBC मोर्चा अध्यक्ष भी पहुंचे SC

Neel Tiwari | Oct 18, 2026, 08:29 IST
MP 27% OBC Reservation
मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। सरकार की स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) के बाद भाजपा ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष पवन पाटीदार ने भी याचिका दाखिल की है। सामान्य वर्ग की कैविएट के अलावा एक और कैविएट दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
legal battle Supreme Court 27 percent OBC reservation Madhya Pradesh intensified. Following government Special Leave Petition (SLP), Pawan Patidar, president BJP OBC Morcha, filed petition.

27% ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में बढ़ी हलचल

मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण (27% OBC Reservation) का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में और आगे बढ़ गया है। हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर 2026 को इस मामले में फैसला सुनाया था। इसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल की थी। अब भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पवन पाटीदार ने भी अलग से SLP दाखिल की है।



वहीं सामान्य वर्ग की ओर से पहले ही कैविएट लगाई जा चुकी है। अब एक और कैविएट दाखिल होने की जानकारी सामने आई है। यानी 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर अलग-अलग पक्ष अब सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखने की तैयारी कर रहे हैं।



पवन पाटीदार की SLP डायरी नंबर 66004/2026 से दर्ज

द सूत्र को मिली जानकारी के मुताबिक, भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष की ओर से दायर SLP का डायरी नंबर 66004/2026 है। यह याचिका 17 अक्टूबर को दोपहर 2:30 बजे सुप्रीम कोर्ट में दर्ज हुई है। अब सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करेगा या नहीं।



दरअसल, पवन पाटीदार हाईकोर्ट में चले आरक्षण के मूल मामले में पक्षकार नहीं थे। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट पहले तय करेगा कि उनकी याचिका सुनवाई के लायक है या नहीं। फिलहाल यह साफ नहीं है कि इस मामले की सुनवाई कब होगी और कौन सी बेंच इसे सुनेगी।



27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण मामले में दो कैविएट

सरकार की SLP के बाद भाजपा ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष की अलग याचिका

इससे पहले मध्यप्रदेश सरकार भी 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी है। सरकार ने स्टेट ऑफ मध्यप्रदेश विरुद्ध आशिता दुबे एवं अन्य मामले में SLP दाखिल की थी। इसका डायरी नंबर 65767/2026 है। यह याचिका 16 अक्टूबर को शाम 5:45 बजे सुप्रीम कोर्ट में दर्ज हुई थी।



मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी कहा था कि सरकार ओबीसी वर्ग के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। हाईकोर्ट के फैसले का हर पहलू समझने के बाद सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा जाएगा। अब पवन पाटीदार ने भी अलग से SLP दाखिल कर दी है। ऐसे में देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इन दोनों याचिकाओं पर आगे क्या फैसला लेता है और सुनवाई की प्रक्रिया कैसे बढ़ती है।



27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण मामले में नई SLP

सामान्य वर्ग की कैविएट के अलावा सत्यम नंदन की भी कैविएट

इस मामले में द सूत्र को एक और अहम जानकारी मिली है। सामान्य वर्ग की ओर से कैविएट दाखिल होने के अलावा सत्यम नंदन ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट लगाई है। इसका नंबर 20284/2026 बताया गया है। अब सवाल है कि कैविएट लगाने का मतलब क्या है?



दरअसल, कैविएट के जरिए कोर्ट से रिक्वेस्ट किया जाता है कि कोई भी आदेश देने से पहले संबंधित पक्ष की बात भी सुनी जाए। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि सत्यम नंदन ने किस पक्ष की ओर से कैविएट लगाई है और इसमें क्या मांग की गई है। इसकी पूरी जानकारी सामने आना बाकी है। अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होती है तो कैविएट लगाने वाले पक्षों की भूमिका भी अहम हो सकती है।



ओबीसी वेलफेयर एसोसिएशन ने सरकार की SLP पर भी उठाए थे सवाल

मध्यप्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में SLP दाखिल करने के बाद इस पर सवाल भी उठने लगे हैं। ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील रामेश्वर सिंह ठाकुर ने सरकार की कानूनी तैयारी पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग नहीं की है। साथ ही अंतिम फैसला आने तक ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ देने की मांग भी नहीं की गई है।



ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने ओबीसी प्रतिनिधियों के साथ बैठक तो की, लेकिन आरक्षण की कानूनी लड़ाई लड़ रहे संगठनों को नहीं बुलाया। ये सभी आरोप एसोसिएशन की ओर से जारी प्रेस नोट में लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह सरकार की SLP और उसके साथ दाखिल दस्तावेजों को देखने के बाद ही साफ हो सकेगा।



अब सुनवाई की तारीख और बेंच पर नजर

फिलहाल यह साफ नहीं है कि सरकार और पवन पाटीदार की SLP पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कब होगी। यह भी तय नहीं हुआ है कि दोनों याचिकाओं को एक साथ सुना जाएगा या अलग-अलग। पवन पाटीदार की याचिका पर सुनवाई होगी भी या नहीं, इसका फैसला भी सुप्रीम कोर्ट ही करेगा। वहीं, एक और कैविएट दाखिल होने से इस मामले में कानूनी हलचल बढ़ गई है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई पर टिकी है। सुनवाई की तारीख और बेंच को लेकर अभी कोई पक्की जानकारी सामने नहीं आई है। जैसे ही इस मामले में कोई नया अपडेट मिलेगा, द सूत्र अपने पाठकों तक इसकी जानकारी पहुंचाएगा।

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