एमपी के IAS अफसरों की होगी परफॉर्मेंस जांच, काम कमजोर तो कलेक्टर का ट्रांसफर तय
मध्यप्रदेश सरकार अब प्रशासनिक अधिकारियों के कामकाज की सीधी समीक्षा करने जा रही है। भोपाल में जल्द ही कमिश्नर और कलेक्टर कॉन्फ्रेंस आयोजित होगी। इस बैठक में प्रदेश के सभी संभागायुक्त और कलेक्टर शामिल होंगे।
इस कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों के काम की परफॉर्मेंस रिपोर्ट देखी जाएगी। जिन जिलों में योजनाओं की रफ्तार धीमी मिली, उनसे जवाब मांगा जाएगा। वहीं कमजोर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों पर सरकार फैसला ले सकती है।
सूत्रों के मुताबिक यह बैठक 15 सितंबर के बाद भोपाल में होगी। यह दो दिन तक चलने की संभावना है। इसमें केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की समीक्षा होगी।
105 बिंदुओं पर होगी कलेक्टरों की परीक्षा
इस बार होने वाली कलेक्टर कमिश्नर कॉन्फ्रेंस पहले से ज्यादा अहम मानी जा रही है। बैठक में करीब 105 अलग-अलग बिंदुओं पर चर्चा होगी।
इनमें सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, विकास कार्यों की स्थिति और जिले की उपलब्धियां शामिल होंगी। इसके अलावा पिछड़े जिलों के कलेक्टरों से काम में कमी की वजह पूछी जाएगी।
अधिकारियों को अपने जिले में किए गए बेहतर कामों की जानकारी देनी होगी। साथ ही नए प्रयोग और नवाचारों की रिपोर्ट भी पेश करनी होगी।
सरकार यह देखेगी कि किस अधिकारी ने अपने जिले में क्या बदलाव किए हैं। किन योजनाओं को जमीन पर बेहतर तरीके से लागू किया गया है।
अफसरों को देना होगा अपना प्रेजेंटेशन
कॉन्फ्रेंस में हर संभागायुक्त और कलेक्टर को अपना प्रेजेंटेशन देना होगा। इसमें उनके कार्यकाल के दौरान किए गए प्रमुख काम शामिल होंगे।
इसके अलावा पिछली बैठकों में दिए गए निर्देशों की स्थिति भी बतानी होगी। अधिकारियों को यह जानकारी देनी होगी कि कौन से काम पूरे हुए हैं।
वहीं जिन निर्देशों पर काम नहीं हुआ, उसकी वजह भी बतानी होगी। सरकार यह पता लगाएगी कि देरी प्रशासनिक कारणों से हुई या लापरवाही के कारण।
इन रिपोर्ट्स को अधिकारियों की आगे की पोस्टिंग से जोड़कर देखा जाएगा। यानी भविष्य में ट्रांसफर और जिम्मेदारी तय करने में रिपोर्ट अहम भूमिका निभा सकती है।
नए मुख्य सचिव की पहली बड़ी बैठक
यह कॉन्फ्रेंस मध्यप्रदेश के नए मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल के कार्यकाल की पहली बड़ी बैठक होगी।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मुख्य सचिव अधिकारियों को नए लक्ष्य भी दे सकते हैं। ये लक्ष्य अलग-अलग जिलों की जरूरत और स्थिति के आधार पर तय किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से भी इन लक्ष्यों को लेकर चर्चा होने की संभावना है। सरकार चाहती है कि जिलों में योजनाओं का असर सीधे जनता तक पहुंचे।
हटाए गए अधिकारियों के काम की भी होगी जांच
इस बार कॉन्फ्रेंस में एक नया पहलू भी शामिल किया गया है। सरकार उन अधिकारियों के कार्यकाल की भी समीक्षा करेगी, जिन्हें हाल में पद से हटाया गया है।
उनके कार्यकाल में हुए कामों और प्रशासनिक फैसलों को देखा जाएगा। इससे अधिकारियों की कार्यप्रणाली और उपयोगिता का आकलन किया जाएगा।
सरकार यह समझना चाहती है कि किन अधिकारियों ने बेहतर काम किया और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत रही।
अक्टूबर 2025 की बैठक के निर्देशों की होगी जांच
पिछली कलेक्टर कमिश्नर कॉन्फ्रेंस अक्टूबर 2025 में हुई थी। उस बैठक में जिलों को कई निर्देश दिए गए थे।
अब नई बैठक में उन निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट मांगी जाएगी। अधिकारियों को बताना होगा कि उन्होंने कितने काम पूरे किए।
सरकार यह भी देखेगी कि दिए गए निर्देशों पर अधिकारियों ने कितनी गंभीरता दिखाई।
इस समीक्षा के बाद प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अंतिम फैसला सरकार की समीक्षा के बाद ही होगा।
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