अफसरों की संपत्ति: ससुराल हो या ननिहाल, रिश्तेदारों के लाड़ले बने MP के ये अफसर
मध्यप्रदेश के अफसरों पर लक्ष्मी कुछ ज्यादा ही मेहरबान हैं। उनकी नौकरी तो सरकारी है, पर असली कमाई खानदानी विरासत से हो रही है। किसी को ससुराल से आलीशान कोठी मिली है तो किसी को ननिहाल से सैकड़ों एकड़ खेती। बुआ-चाचा भी मेहरबानी करने में पीछे नहीं रहे।
अफसरों की झोली में खेत, मकान और दुकान यूं बरस रहे हैं, जैसे छप्पर फाड़कर नोट गिर रहे हों। इस फेहरिस्त में कुछ अफसर तो ऐसे हैं, जिन्हें ससुराल या बाहरी रिश्तेदारों से मिली संपत्ति पुश्तैनी विरासत से कहीं ज्यादा है।
उपहार और भेंट में मिली इस अचल संपत्ति ने अफसरों के परिवार की सालाना कमाई को भी बढ़ा दिया है। इसका असर भी इन अफसरों और उनके परिवार की लाइफस्टाइल पर नजर आता है।
thesootr ने GAD पोर्टल पर दर्ज अफसरों की अचल संपत्ति का हिसाब खंगाला तो चौंकाने वाली स्थिति मिली है। कई अफसरों को रिश्तेदारों से मिली संपत्ति उनकी पैतृक विरासत से भी ज्यादा निकली है।
हैरत की बात यह है कि उपहार में मिली ज्यादातर प्रॉपर्टी अफसरों की पत्नियों के नाम दर्ज है। यानी साहब की पत्नी मायके और ससुराल की मेहरबानी से सीधे करोड़पति क्लब में एंट्री मार चुकी हैं।
कहावत से दूर हैं अफसर...
आम आदमी के लिए कहावत है कि जरूरत आने पर अपने ही मुंह फेर लेते हैं। वहीं, मध्यप्रदेश के अफसरों के मामले में ऐसा नहीं है। यहां ससुराल, ननिहाल, बुआ, चाचा सब दिल खोलकर उनकी झोली भर रहे हैं। जहां आम लोग हजार रुपए का इन्वेस्टमेंट भी रिश्तेदार के नाम करने से कतराते हैं, वहीं अफसरों को लाखों-करोड़ों के खेत और बंगले यूं ही भेंट में मिल रहे हैं।
पैतृक संपत्ति छोड़िए, रिश्तेदारों से अचल संपत्ति बटोरने की रेस में आबकारी और प्रशासनिक अफसर सबसे आगे निकल गए हैं। thesootr Research में ऐसे 23 अफसर सामने आए हैं, जिन्हें ससुराल, ननिहाल और दूसरे रिश्तेदारों से लाखों-करोड़ों की प्रॉपर्टी मिली है। यह संपत्ति उस विरासत से अलग है, जो माता-पिता से मिली है। खुद की कमाई से खरीदी गई प्रॉपर्टी (एमपी अफसर संपत्ति) भी इस लिस्ट में शामिल नहीं है। यदि वह भी जोड़ दें तो आंकड़ा चक्कर ला दे।
आबकारी अधिकारी :
सहायक आबकारी आयुक्त अमिताभ जैन
रिश्तेदारों से विरासत में अचल संपत्ति पाने वालों में धार में पदस्थ सहायक आबकारी आयुक्त अमिताभ जैन भी पीछे नहीं हैं। पिता से मिली संपत्ति के अलावा सहायक आयुक्त जैन को अपने दिवंगत ताऊजी शीतलचंद जैन से 0.30 हेक्टेयर जमीन 2006 में मिली थी।
मंडला के निवास स्थित इस संपत्ति की अनुमानित कीमत 1.25 लाख दर्शाई गई है। इसके साथ ही जैन को उनके ससुराल पक्ष से गुना कैंट में 0.376 हेक्टेयर भूमि मिली है। इसका बाजार मूल्य 15 लाख बताया गया है।
इस संपत्ति का चौथाई हिस्सा सहायक आयुक्त के ससुर देवेन्द्र कुमार जैन के निधन के बाद उनकी पत्नी एकता जैन के नाम पर दर्ज किया गया था। सहायक आबकारी आयुक्त अमिताभ जैन को उनके भाई अनुराग जैन के निधन के बाद आवासीय भूखंड मिला है।
दरअसल उनके भाई अनुराग जैन ने आधारताल जबलपुर के लक्ष्मीपुर गांव में 2250 वर्गफीट का भूखंड खरीदा था। 35 लाख रुपए कीमत के इस भूखंड का आधा हिस्सा अपने पुत्र वेदांत जबकि शेष आधा भाग सहायक आयुक्त के पुत्र और अपने भतीजे अक्षत के नाम किया गया था। निधन के बाद उनकी वसीयत के आधार पर अब यह हिस्सा अमिताभ जैन के परिवार के पास आ गया है।
सहायक आयुक्त हर्षवर्धन राय - नाना मेहरबान
आबकारी विभाग के राज्यस्तरीय उड़नदस्ता में कार्यरत सहायक आयुक्त हर्षवर्धन राय को भी काफी अचल संपत्ति विरासत और उपहार में मिली है। हर्षवर्धन राय के नाना द्वारा सौंपी गई अचल संपत्ति का वर्तमान मूल्य करोड़ों रुपए है। उन्हें दिवंगत नाना केआर कोटिया की वसीयत के जरिए अशोकनगर जिले के पिपरई गांव में 11.183 हेक्टेयर सिंचित कृषि भूमि मिली है।
इससे उन्हें सालाना 15 लाख रुपए की आय हो रही है। जबकि नाना से मिली दूसरी अचल संपत्ति झांसी में दो भवनों के रूप में है। इससे उन्हें 3.60 लाख रुपए सालाना मिलते हैं। ये दोनों संपत्तियां राय और उनके भाई के नाम पर दर्ज हैं।
सहायक जिला आबकारी अधिकारी जिनेन्द्र कुमार जैन - ससुर जी ने मकान ही दे दिया
सहायक जिला आबकारी अधिकारी जिनेन्द्र कुमार जैन को ससुराल पक्ष से संपत्ति का लाभ हुआ है। उनके ससुर ने जबलपुर के लमती में 2011 में भवन खरीदकर दिया था। करीब 48 लाख रुपए बाजार मूल्य का यह भवन जैन की पत्नी दीप्ति के नाम पर दर्ज है। इससे उन्हें सालाना 1.20 लाख रुपए की अतिरिक्त आय भी प्राप्त हो रही है।
आबकारी उपायुक्त मुकेश नेमा - ससुराल ने दिखाया दुलार
आबकारी उपायुक्त मुकेश नेमा को परिवार से ज्यादा विरासत ससुराल से हासिल हुई है। हालांकि यह सभी अचल संपत्ति उनकी पत्नी के नाम पर है। नेमा को उनके दिवंगत ससुर लक्ष्मीप्रसाद नेमा से जबलपुर के दिवाखेड़ा में ढाई एकड़ सिंचित कृषि भूमि, जबलपुर के ही मानेगांव में तीन एकड़ कृषि भूमि के अलावा जबलपुर के हाथीताल कॉलोनी में एमआईजी भवन भी मिला है। इन सभी संपत्तियों की वर्तमान मार्केट वैल्यू का आकलन उपायुक्त ने संपत्ति की घोषणा के साथ नहीं दिया है।
सहायक जिला आबकारी अधिकारी राजीव कुमार थापक
सहायक जिला आबकारी अधिकारी राजीव कुमार थापक को ससुराल से दो एकड़ सिंचित कृषि भूमि मिली है। यह जमीन पन्ना जिले के गुन्नौर में स्थित है और उनकी पत्नी रुचिरा थापक के नाम पर दर्ज है। इसकी वर्तमान कीमत का उल्लेख थापक द्वारा संपत्ति के ब्यौरे के साथ नहीं किया गया है। हालांकि इस कृषि भूमि से उन्हें सालाना एक लाख रुपए की अतिरिक्त आय हो रही है।
सहायक जिला आबकारी अधिकारी डॉ. लोकेश तिवारी - बुआ ने दे दिया 80 लाख का मकान
आबकारी विभाग के सहायक जिला आबकारी अधिकारी डॉ. लोकेश तिवारी को भी रिश्तेदारों से अचल संपत्ति अर्जित हुई है। जीएडी को दी गई जानकारी के अनुसार डॉ. तिवारी को बुआ से दान में 80 लाख रुपए कीमत का आलीशान भवन मिला है।
यह घर भिंड में अटेर रोड पर है। इसके अलावा उन्हें ससुराल पक्ष से भूखंड भी मिला है। मुरैना के विजयगढ़ स्थित यह भूमि उनकी पत्नी प्रियंका तिवारी के नाम पर है। इसकी अनुमानित कीमत 1.20 लाख रुपए आंकी गई है।
सहायक जिला आबकारी अधिकारी देवेन्द्र शर्मा - ससुराल ने भेंट की जमीन
आबकारी विभाग के सहायक जिला आबकारी अधिकारी देवेन्द्र शर्मा भी अचल संपत्ति भेंट में हासिल कर चुके हैं। उन्हें ससुराल पक्ष से भिंड के मेहगांव में 2 बीघा जमीन मिली है। इसकी अनुमानित कीमत उनके द्वारा 5 लाख रुपए बताई गई है। जीएडी को दी गई जानकारी में उन्होंने ससुराल से भेंट में प्राप्त होने के कारण इसकी सूचना विभाग को न देने का भी उल्लेख किया है।
सहायक जिला आबकारी अधिकारी धर्मेन्द्र जोशी
आबकारी विभाग के सहायक जिला आबकारी अधिकारी धर्मेन्द्र जोशी ने भी ससुराल पक्ष से अचल संपत्ति के रूप में 0.061 हेक्टेयर क्षेत्रफल का भूखंड पाया है। इसकी मार्केट वैल्यू करीब सात लाख रुपए है। यह भूखंड भोपाल की हुजूर तहसील के अरहेड़ी गांव में है। यह भूखंड आबकारी अधिकारी जोशी और उनके दिवंगत ससुर घनश्याम शर्मा की संयुक्त संपत्ति के रूप में खरीदा गया था।
सरकारी अधिकारी और उनकी संपत्ति: बस कागजों का खेल?
वरिष्ठ पत्रकार अजय बोकील का कहना है कि लोकसेवकों को अचल संपत्ति घोषित करना जरूरी है। हालांकि यह एक औपचारिकता बन गया है। संपत्ति की निर्धारित प्रारूप में जानकारी नहीं दी जाती। सालाना घोषणा न करने वालों की संख्या भी कम नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि संपत्ति को गलत या अधूरी घोषित करने पर कोई कार्रवाई ही नहीं होती। सरकार को लोकसेवकों द्वारा अर्जित या अन्य माध्यमों से हासिल की गई संपत्ति का विस्तृत ब्यौरा जमा कराना चाहिए। जो अधूरी या गलत जानकारी दे रहे हैं, उन पर कार्रवाई करना भी जरूरी है।
FAQ
- क्या सरकारी अफसर रिश्तेदारों से संपत्ति गिफ्ट में ले सकते हैं?
सरकारी सेवा आचरण नियमों के तहत अफसरों को एक निश्चित सीमा से अधिक का उपहार लेने पर विभाग को सूचना देना अनिवार्य है। यदि संपत्ति का मूल्य तय सीमा से अधिक हो तो सरकारी अनुमति भी जरूरी होती है। GAD पोर्टल पर घोषणा इसी नियम के अंतर्गत की जाती है। - GAD पोर्टल क्या होता है और अफसरों की संपत्ति वहां क्यों दर्ज होती है?
GAD यानी General Administration Department का पोर्टल मध्यप्रदेश सरकार का वह प्लेटफॉर्म है जहां सरकारी अधिकारी अपनी चल-अचल संपत्ति की सालाना घोषणा करते हैं। यह पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार रोकने का सरकारी तंत्र है। इसी डेटा के आधार पर thesootr ने यह पड़ताल की है। - MP में किन विभागों के अफसरों को सबसे ज्यादा रिश्तेदारों से संपत्ति मिली?
thesootr की रिसर्च के अनुसार आबकारी और प्रशासनिक विभाग के अफसर इस सूची में सबसे आगे हैं। कुल 23 ऐसे अफसर सामने आए जिन्हें ससुराल, ननिहाल, बुआ या अन्य रिश्तेदारों से लाखों-करोड़ों की संपत्ति मिली। यह संपत्ति उनकी माता-पिता से मिली पैतृक विरासत से अलग है।
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