अफसरों की संपत्ति: ससुराल से मिली प्रॉपर्टी कैसे बना रही अफसरों को अमीर?
चाचा, ताऊ और ससुरजी से मिली संपत्ति बना रही एमपी के अफसरों को अमीर?
मध्य प्रदेश के कई प्रशासनिक अधिकारियों को ससुराल और परिजनों सेरजिस्टर्डगिफ्ट व वसीयत के जरिए लाखों-करोड़ों की जमीन और मकान मिले हैं। सवाल यह है कि अफसर बनते ही रिश्तेदार कैसे करोड़ों की संपत्तियां गिफ्ट कर देते हैं?
आयकर और संपत्ति नियमों के नजरिए से भले ही यह कोई करप्शन न हो,मगर साहबों पर हुई इस मेहरबानी पर सवाल तो उठते ही हैं… आज पढ़िए प्रशासनिक अफसरों के बारे में…
ससुरजी की मेहरबानी
नीलेश कुमार शर्मा: संयुक्त कलेक्टर - नर्मदापुरम
नर्मदापुरम के संयुक्त कलेक्टर नीलेश कुमार शर्मा इस मामले में किस्मत के धनी हैं। शर्मा के ससुर ने रीवा जिले के इंदिरा नगर में 1210 वर्गफीट का भवन भेंट किया है। यह भवन संयुक्त कलेक्टर की पत्नी अनामिका मिश्रा के नाम पर है। इसकी मार्केट वैल्यू अब 86 लाखरुपएहै।
शर्मा को उनके ससुर से ही दूसरी अचल संपत्ति साल 2003 में रीवा के अनंतपुर में 1500वर्ग फीटके भूखंड के रूप में मिली थी। यह जमीन भी उनकी पत्नी अनामिका मिश्रा के नाम पर है,जिसकी वर्तमान कीमत 45 लाखरुपएअनुमानित है।
चाचाजी ने दे दी 6 बीघा जमीन
महेन्द्र सिंह सौजन्या: डिप्टी कलेक्टर - भिंड
भिंड जिले में पदस्थ डिप्टी कलेक्टरमहेंद्रसिंह सौजन्या को उनके चाचा जमनलाल सौजन्या ने 6 बीघा कृषि भूमि भेंट में दी है। करीब 90 लाखरुपएमूल्य की यह कृषि भूमि विदिशा जिले के सालपुर कलां में है। इससे उन्हें सालाना 1.50 लाखरुपएकी आय भी हो रही है।
सासुजी ने मकान गिफ्ट कर दिया
महेश कुमार बडोले: डिप्टी कलेक्टर - झाबुआ
झाबुआ के डिप्टी कलेक्टर महेश कुमार बडोले को उनकी सास लीलाबाई द्वारा 1500 वर्ग फीट भूखंड पर निर्मित बड़ा मकान उपहार में दिया था। यह भवन बड़ोले की पत्नी संगीता के नाम पर है। खरगोन कीब्रजविहारकॉलोनी में स्थित इस भवन की वर्तमान कीमत 45 लाखरुपएहै।इसमेंडिप्टी कलेक्टर का परिवार रहता है।
दादा-नाना सब मेहरबान
राजीव रंजन पांडेय: अतिरिक्त कलेक्टर - होशंगाबाद
होशंगाबाद में पदस्थ अतिरिक्त कलेक्टर राजीव रंजन पांडेय विरासत के मामले में धनीहैं। उन्हें न केवल अपने दादा और मां से बल्कि नाना त्रिवेणी प्रसाद तिवारी से भी विरासत मिली है। ननिहाल से मिली यह विरासत डेढ़ बीघा कृषि भूमि के रूप में है। यह जमीन बिहार के रोहतास जिले के गोडवार में है जो कि उनके नाना और मांकपूरा देवीके नाम पर संयुक्त रूप से दर्ज है। इसकी वर्तमान कीमत करीब 22 लाखरुपएबताई गई है।
ससुराल ने सौंपी 95 लाख की जमीन
डायरेक्टर राजेश राठौड़: एक्जीक्यूटिव - मध्य प्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन
मध्य प्रदेश इंडस्ट्रियलडेवलपमेंटकॉर्पोरेशन केएग्जीक्यूटिवडायरेक्टर राजेश राठौड़ को ससुराल पक्ष से दो संपत्तियां मिली हैं। ये दोनों संपत्तियां उनकी पत्नी सपना राठौड़ के नाम पर हैं। राजगढ़ जिले के जीरापुर में कृषि भूमि के रूप में ये संपत्तियां 3.748हेक्टेयरकी हैं।इनकावर्तमान मूल्य 95 लाखरुपएसे ज्यादा है। इनसे राठौड़ परिवार को सालाना साढ़े 5 लाखरुपएकी अतिरिक्त कमाई भी हो रही है।
ससुर ने दे दी 35 लाख की जमीन
राहुल कुमार पटेल: डिप्टी कलेक्टर - छिंदवाड़ा
छिंदवाड़ा के डिप्टी कलेक्टर राहुल कुमार पटेल राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। वे छिंदवाड़ा में डिप्टी कलेक्टर के रूप में पदस्थ हैं। उन्हें भी ससुराल से कीमती कृषि भूमि संपत्ति के रूप में मिली है। ससुर विजय पटेल द्वारा दी गई यह अचल संपत्ति विरासत के रूप में पत्नी कुमुद पटेल के नाम पर दर्ज है। 1.96हेक्टेयरसिंचित कृषि भूमि की वर्तमान मार्केट वैल्यू 35 लाखरुपएसे ज्यादा है। यह जमीन जबलपुर के मझौली के मुरैठ के खसरा में दर्ज है।
चाचाजी ने दे दी एक करोड़ की जमीन
रूपेश कुमार उपाध्याय: अपर कलेक्टर - श्योपुर
श्योपुर में अपर कलेक्टर रूपेश कुमार उपाध्याय भी विरासत के मामले में धनी हैं। उनके पास विरासत में मिली सात संपत्तियां हैं। इनमें से दो संपत्तियां ससुराल पक्ष से मिली हैं। ये दोनों संपत्तियां अपर कलेक्टर उपाध्याय के दिवंगत चाचा ससुर रामेश्वर दयाल शर्मा की विरासत से मिली हैं।
इनमें एक संपत्ति 232.61 वर्ग मीटर के आवासीय भूखंड के रूप में ग्वालियर के अलापुर में है। इसकी कीमत 56 लाख रुपए है। जबकि दूसरी संपत्ति ग्वालियर के मुरार में भदरौली गांव में 0.615 हेक्टेयर कृषि भूमि के रूप में है। इसका वर्तमान मूल्य 95 लाख रुपए बताया गया है। यानी उपाध्याय को ससुराल पक्ष से एक करोड़ से ज्यादा कीमत की अचल संपत्तियां ससुराल से हासिल हुई हैं।
ससुराल से मिला 17 लाख का प्लॉट
लोचनलाल अहिरवार: अतिरिक्त कलेक्टर - रीवा
रीवा में कार्यरत अतिरिक्त कलेक्टर लोचनलाल अहिरवार को ससुराल से 6 हजार वर्ग फीट का प्लॉट मिला है। इसका बाजार मूल्य 17.50 लाख रुपए से अधिक है। यह भूखंड जबलपुर के पनागर के अमखेरा में स्थित है। ससुर सुमरनलाल अहिरवार द्वारा सेवानिवृत्ति के बाद यह भूखंड अपनी पुत्री और अतिरिक्त कलेक्टर की पत्नी गायत्री अहिरवार के नाम पर खरीदा था।
सास-ससुर ने भेंट की 45 लाख की जमीन
विनीत कुमार तिवारी: अतिरिक्त कलेक्टर - भोपाल
विनीत कुमार तिवारी भोपाल में अतिरिक्त कलेक्टर हैं। उनके हिस्से में भी ससुराल से अचल संपत्ति आई है। उनकी सास मनोरमा अग्निहोत्री, ससुर सुरेन्द्र अग्निहोत्री और साले द्वारा उनकी पत्नी शिल्पी तिवारी को जबलपुर की सीहोरा तहसील के गरथपा में 14.50 लाख रुपए कीमत की 0.94 हेक्टेयर कृषि भूमि दी गई है। इसके अलावा सास-ससुर ने साल 2021 में जबलपुर के दयानंद सरस्वती वार्ड में 30 लाख रुपए कीमत का फ्लैट भी दिया है।
सास की मेहरबानी से 30 लाख की जमीन
शोभाराम सोलंकी: अतिरिक्त कलेक्टर - देवास
देवास के अतिरिक्त कलेक्टर शोभाराम सोलंकी को ससुराल पक्ष से 0.047 हेक्टेयर का भूखंड मिला है। धार की कुक्षी तहसील के बाग में स्थित इस भूखंड की वर्तमान कीमत करीब 30 लाख रुपए है। यह संपत्ति उनकी सास अंतर बाई की विरासत के माध्यम से पत्नी कमला सोलंकी के नाम पर दर्ज हुई है।
पापा-दादा ने भेंट की करोड़ों की जमीन
संजय कुमार जैन: संयुक्त कलेक्टर
संयुक्त कलेक्टर संजय कुमार जैन को पिता अशोक कुमार से मिली पैतृक संपत्ति के अलावा दादा आनंद कुमार जैन से भी अचल संपत्ति उपहार में मिली है। इसमें से एक संपत्ति साढ़े चार एकड़ की कृषि भूमि है। 41 लाख रुपए से ज्यादा कीमत की यह अचल संपत्ति उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के सोनरई में स्थित है। यह संपत्ति रजिस्टर्ड गिफ्ट से उन्हें मिली थी। वहीं दादा की ओर से उन्हें ललितपुर के ही मड़ावरा में 1.896 हेक्टेयर जमीन मिली है जिसका वर्तमान बाजार मूल्य 75 लाख रुपए बताया गया है।
पापाजी ने भेंट की 20 बीघा तो मम्मी ने मकान दे दिया
सपना अनुराग जैन: अपर कलेक्टर
अपर कलेक्टर सपना अनुराग जैन भी ससुराल और मायके से विरासत में मिली अचल संपत्ति से मालामाल हैं। ससुराल और पति से मिली संपत्ति के अलावा उन्हें अपने मायके से भी खूब अचल संपत्ति का लाभ मिला है। उन्हें अपने पिता अनिल कुमार जैन से अशोकनगर जिले के कचनार में 20 बीघा जमीन मिली है। इसका वर्तमान मूल्य 60 लाख बताया गया है।
वहीं उन्हें मां उर्मिला जैन की वसीयत से गुना में भवन प्राप्त हुआ है। वहीं ससुराल पक्ष यानी ताऊ ससुर से इंदौर में 50 लाख रुपए कीमत का भूखंड मिला है। यह उनके पति के नाम पर दर्ज है।
ससुरजी भेंट कर गए 12 लाख की जमीन
अंकुर मेश्राम: डिप्टी कलेक्टर- भोपाल
भोपाल में पदस्थ एसडीएम अंकुर मेश्राम को भी ससुराल से संपत्ति मिली है। दिवंगत ससुर जीटी रामटेके द्वारा दी गई यह जमीन उनकी पुत्री और अपर कलेक्टर की पत्नी निमिषा के नाम है। पत्नी के नाम से विरासत में मिली करीब 0.22 हेक्टेयर जमीन छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के ग्राम पोटिया कला में है। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 12 लाख रुपए बताई गई है।
सास ने भेंट की 54 लाख की जमीन
कलावती बयारे: संयुक्त कलेक्टर - नरसिंहपुर
नरसिंहपुर में पदस्थ संयुक्त कलेक्टर कलावती बयारे को भी ससुराल से अचल संपत्ति हासिल हुई है। उनकी सास द्वारा दमोह जिले के ढिंगसर गांव में 7.88 एकड़ जमीन उन्हें दी गई है। 54 लाख रुपए अनुमानित कीमत की यह जमीन अब उनके नाम पर रिकॉर्ड में दर्ज है।
ससुराल मेहरबान तो मिली एक करोड़ की जमीन
डॉ. अभय सिंह खरारी- डिप्टी कलेक्टर- उज्जैन
उज्जैन में पदस्थ रहे डिप्टी कलेक्टर डॉ. अभय सिंह खरारी भी भेंट और दान में अचल संपत्ति पाने के मामले में खुशकिस्मत हैं। डिप्टी कलेक्टर को उनके ससुराल पक्ष से धार जिले के सिन्दोड़ा गांव में 20 बीघा जमीन मिली थी। यह जमीन मूल रूप से उनकी पत्नी सुनीता खरारी के नाम से राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है।
डॉ. खरारी ने जीएडी को दिए संपत्ति के ब्यौरे में इसकी वर्तमान कीमत का उल्लेख नहीं किया है और न ही इससे होने वाली वार्षिक आय की जानकारी दी है। हालांकि धार की तिरला तहसील में फिलहाल कृषि भूमि का औसत भाव 5 लाख रुपए प्रति बीघा बताया जा रहा है। यानी अब डिप्टी कलेक्टर की जमीन एक करोड़ से कम की नहीं है।
अफसरों का ससुराली खेल: काली कमाई पर गिफ्ट का ठप्पा!
भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबे समय से काम कर रहे एक्टिविस्ट अजय दुबे का कहना है कि रिश्तेदारों की संपत्ति दर्शाने का खेल चल रहा है। यह एक तरह का इन्वेस्टमेंट है। संपत्ति संबंधी पुराने कानूनी मामलों को देखते हुए अब प्रशासनिक अधिकारी काफी एहतियात बरत रहे हैं। वे रिश्तेदारों के नाम से संपत्ति दर्शाते हैं। इसी वजह से सबसे ज्यादा मामलों में संपत्ति ससुराल पक्ष से उपहार या भेंट दर्शाई जाती है।
ज्यादातर मामलों में प्रशासनिक सेवा में आने के साथ ही ऐसी संपत्तियों का ब्योरा अधिकारी अपने नाम से दर्ज कराते हैं। जिससे बाद में बेनामी संपत्ति को अधिकृत दर्शाना आसान होता है। प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की संपत्ति की जांच के मानदंडों में बड़े बदलाव की जरूरत है ताकि बेनामी संपत्तियों को रिश्तेदारों का उपहार दर्शाने के खेल पर कसावट हो सके। (एमपी अफसर संपत्ति)
FAQ
- क्या सरकारी अफसर रिश्तेदारों से संपत्ति गिफ्ट में ले सकते हैं?
सरकारी सेवा आचरण नियमों के तहत अफसरों को एक निश्चित सीमा से अधिक का उपहार लेने पर विभाग को सूचना देना अनिवार्य है। यदि संपत्ति का मूल्य तय सीमा से अधिक हो तो सरकारी अनुमति भी जरूरी होती है। GAD पोर्टल पर घोषणा इसी नियम के अंतर्गत की जाती है। - GAD पोर्टल क्या होता है और अफसरों की संपत्ति वहां क्यों दर्ज होती है?
GAD यानी General Administration Department का पोर्टल मध्यप्रदेश सरकार का वह प्लेटफॉर्म है जहां सरकारी अधिकारी अपनी चल-अचल संपत्ति की सालाना घोषणा करते हैं। यह पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार रोकने का सरकारी तंत्र है। इसी डेटा के आधार पर thesootr ने यह पड़ताल की है।
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