क्राउड मैनेजमेंट सीखने यूपी जाएंगे एमपी के अफसर, उज्जैन सिंहस्थ 2028 में लागू होगा काशी मॉडल
मध्य प्रदेश सरकार अब धार्मिक स्थलों पर बढ़ती भीड़ को बेहतर तरीके से संभालने की ओर ध्यान दे रही है। इसके लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने के लिए एमपी के कई अफसर उत्तर प्रदेश जाएंगे।
ये अफसर वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में अपनाई गई क्राउड मैनेजमेंट प्रणाली का अध्ययन करेंगे।
भीड़ प्रबंधन व्यवस्था का जायजा लेंगे सीएम
31 मार्च को वाराणसी में एक निवेश सम्मेलन आयोजित होगा। इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री मोहन यादव भी हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का दौरा करेंगे।
वहां की भीड़ प्रबंधन, डिजाइन और संचालन व्यवस्था का जायजा लेंगे। इलके आलावा वे संबंधित अधिकारियों से जरूरी जानकारी भी लेंगे।
भीड़ प्रबंधन पर मिलेगा प्रेजेंटेशन
प्रदेश के अधिकारियों को ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कैमरों और जियोस्पेशियल तकनीकों के इस्तेमाल के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी।
इन नई तकनीकों का इस्तेमाल उज्जैन सिंहस्थ 2028में किए जाने की योजना है। उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारी आधुनिक भीड़ प्रबंधन पर प्रेजेंटेशन देंगे। इसका उपयोग भविष्य में उज्जैन के महाकाल मंदिर और प्रदेश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर किया जाएगा।
एमपी-यूपी के बीच होगा समझौता
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच एक समझौता (एमओयू) होगा, जो वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) पर्यटन और पारंपरिक कला की साझा ब्रांडिंग पर आधारित होगा। इस समझौते के तहत निवेश सत्र में मध्य प्रदेश में निवेश के अवसर, जीआई टैग और ओडीओपी के तहत किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की जाएगी।
उत्तर प्रदेश अपनी सफल ओडीओपी उत्पादों जैसे बनारसी सिल्क, लखनऊ की चिकनकारी, आगरा और कानपुर का लेदर उद्योग, और भदोही के हस्तनिर्मित कालीन के जरिए ब्रांड निर्माण की रणनीति दिखाएगा। वहीं मध्य प्रदेश चंदेरी और महेश्वर के पारंपरिक वस्त्रों की ब्रांडिंग की योजना प्रस्तुत करेगा।
गंगा-नर्मदा क्राफ्ट कॉरिडोर पर होगी चर्चा
बैठक में गंगा-नर्मदा क्राफ्ट कॉरिडोर बनाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा काशी, उज्जैन और चित्रकूट को जोड़ते हुए एक धार्मिक पर्यटन सर्किट बनाने की योजना पर भी विचार किया जाएगा। इससे दोनों राज्यों में पर्यटन को बढ़ावा मिल सकेगा।
इन मुद्दों पर भी होगी चर्चा
महाकाल लोक विस्तार के बाद उज्जैन में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या 50 हजार से एक लाख तक पहुंच गई है। वहीं काशी विश्वनाथ धाम में यह संख्या तीन गुना तक होती है। काशी में ड्रोन, एआई आधारित कैमरे और जियोस्पेशियल तकनीक के जरिए भीड़ का बेहतर प्रबंधन किया जा रहा है।
अधिकारियों के बीच इस बात पर चर्चा होगी कि भारी भीड़ के आने-जाने को कैसे सुचारू रूप से नियंत्रित किया जाता है। कॉरिडोर का डिजाइन कैसा है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है।
इसके अलावा प्रयाग महाकुंभ में अपनाई गई बेहतरीन प्रैक्टिसेज पर भी चर्चा होगी। श्रद्धालुओं को जोड़ने वाले मोबाइल एप, एआई आधारित निगरानी, और आधुनिक वेस्ट मैनेजमेंट पर भी चर्चा की जाएगी।
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