अब अफसरों पर सीधा केस नहीं, सरकार की मंजूरी होगी जरूरी, PHQ का फैसला

Sandeep Kumar | Sept 11, 2026, 22:24 IST
अफसरों पर सीधे केस नहीं
मध्यप्रदेश में अफसरों के खिलाफ आधिकारिक कामकाज से जुड़े केस अब सरकार की मंजूरी के बगैर दर्ज नहीं होंगे। हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस मुख्यालय ने निर्देश जारी किए है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्यप्रदेश में अफसरों पर केस प्रक्रिया बदलेगी।
  • सरकारी काम से जुड़े मामलों में अनुमति जरूरी होगी।
  • हाईकोर्ट आदेश के बाद PHQ ने निर्देश जारी किए।
  • लोकायुक्त के 295 मामलों में मंजूरी लंबित है।
  • IAS IPS सहित कई अधिकारी मामलों में शामिल हैं।

मध्यप्रदेश में अब सरकारी अफसरों पर आसानी से केस नहीं होगा। आधिकारिक कामकाज से जुड़े मामलों में सरकार की मंजूरी जरूरी होगी। हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद पुलिस मुख्यालय ने यह फैसला लिया है। इसी बीच लोकायुक्त के 295 मामलों में सरकार ने अब तक मंजूरी नहीं दी है। इन मामलों में IAS, IPS और कई राजपत्रित अफसर शामिल हैं।



सरकारी अफसरों पर केस!

प्रदेश में अफसरों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई अब पहले जैसी आसान नहीं रहेगी। खासकर राजपत्रित अधिकारियों के मामलों में एक जरूरी शर्त जुड़ गई है। यदि कोई अफसर अपने सरकारी काम के दौरान कुछ करता है और उस पर शिकायत होती है, तो अदालत सीधे संज्ञान नहीं लेगी। पहले राज्य सरकार से अभियोजन स्वीकृति लेनी होगी। यह नियम खासतौर पर आधिकारिक कामकाज से जुड़े मामलों पर लागू होगा।



किन मामलों में जरूरी मंजूरी

हर शिकायत पर यह नियम लागू नहीं होगा। यह शर्त सिर्फ उन मामलों पर लागू होती है, जो अफसर के आधिकारिक कामकाज से सीधे जुड़े हों। यानी अफसर ने अपने पद पर रहते हुए कोई काम किया हो और उसी को लेकर शिकायत हो। ऐसे मामलों में अदालत के संज्ञान लेने से पहले शासन की अनुमति जरूरी होगी।



इस प्रावधान की जड़ पुरानी है। पहले यह दंड प्रक्रिया संहिता यानी CrPC (Code of Criminal Procedure) की धारा 197 में दर्ज था। अब नए कानून के तहत यह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita) 2023 की धारा 218 में शामिल है। हाईकोर्ट के आदेश ने इसी प्रावधान को फिर से याद दिलाया है।



आम जनता पर क्या असर

यह मत सोचिए कि अब अफसरों के खिलाफ शिकायत ही नहीं हो सकती। सामान्य शिकायतें पहले की तरह दर्ज होती रहेंगी। सिर्फ उन मामलों में फर्क पड़ेगा, जो अफसर के सरकारी कर्तव्य से सीधे जुड़े हों। ऐसे मामलों में अदालत तभी संज्ञान लेगी, जब सरकार से अभियोजन स्वीकृति मिल चुकी हो। विभागीय अफसरों का कहना है कि यह कदम कानूनी प्रक्रिया को सही ढंग से लागू करने के लिए उठाया गया है।



पुलिस को क्या निर्देश मिले

पुलिस मुख्यालय ने सभी इकाइयों से कहा है कि वे हाईकोर्ट के पूरे आदेश का अध्ययन करें। जरूरत पड़ने पर आदेश में दिए गए न्यायिक फैसलों का हवाला भी दिया जा सकता है। आदेश में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का भी जिक्र है। इन फैसलों में अभियोजन स्वीकृति से जुड़े प्रावधानों की विस्तार से व्याख्या की गई है। यानी पुलिस को अब हर कदम पर कानूनी प्रक्रिया का पूरा ध्यान रखना होगा।



लोकायुक्त के 295 केस अटके

इस बीच एक बड़ा आंकड़ा भी सामने आया है। लोकायुक्त पुलिस के पास ऐसे 295 मामले पेंडिंग हैं, जिनमें सरकार ने अभी तक अभियोजन स्वीकृति नहीं दी है। इनमें IAS, IPS और राज्य के कई राजपत्रित अफसर-कर्मचारी शामिल हैं। बिना मंजूरी के इन मामलों में आगे कार्रवाई नहीं हो पा रही है।



विभागवार आंकड़े देखें तो नगरीय विकास और आवास विभाग में सबसे ज्यादा 36 केस अटके हैं। पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग में 15, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण में 12 और सामान्य प्रशासन विभाग यानी GAD (General Administration Department) में 11 मामले पेंडिंग हैं। लोक निर्माण विभाग में 10 और राजस्व विभाग में 6 केस लंबित हैं। जल संसाधन, वन और उद्यानिकी विभाग में 5-5 मामले फंसे हैं। बाकी कई विभागों में एक-एक से लेकर चार-चार केस पेंडिंग हैं। इनके अलावा राज्य के अन्य निकायों के पास भी 166 मामले लंबित बताए गए हैं।



यह आंकड़ा दिखाता है कि अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया कितनी धीमी चल रही है। हाईकोर्ट के इस ताजा आदेश के बाद उम्मीद है कि सरकार और पुलिस, दोनों इस कानूनी प्रक्रिया को लेकर अधिक सतर्क रहेंगे।



आगे क्या बदलेगा

पुलिस मुख्यालय के इस निर्देश के बाद जिलों में भी असर दिखेगा। थाना स्तर पर पुलिस अब अफसरों से जुड़ी शिकायतों की जांच पहले करेगी। यह देखा जाएगा कि शिकायत आधिकारिक कामकाज से जुड़ी है या नहीं। यदि हां, तो केस दर्ज करने से पहले फाइल शासन को भेजी जाएगी। इससे प्रक्रिया थोड़ी धीमी जरूर होगी, लेकिन कानूनी तौर पर मजबूत रहेगी। साथ ही, जिन 295 मामलों में मंजूरी अटकी है, उन पर भी अब सरकार से जवाब मांगा जा सकता है।



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