राम मंदिर चंदा विवाद के बाद आई सामने ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की दान व्यवस्था
समझें क्या है पूरा मामला...
- हाल ही में अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी की घटना सामने आई है।
- इस घटना ने सनातन धर्म से जुड़े लोगों को चिंता में डाल दिया है।
- मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर भी बड़ा दान केंद्र है।
- मंदिर प्रशासन का दावा है कि यहां दान में पहले से ही पारदर्शिता बरती जाती है।
- नकद राशि की गिनती एसडीएम के सामने वीडियोग्राफी से होती है।
अयोध्या में हुई दान चोरी की खबर ने पूरे देश को चौंका दिया है। मंदिरों में चढ़ने वाली राशि की सुरक्षा अब बड़ा सवाल बन गई है। ऐसे में मध्य प्रदेश के मशहूर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर का सिस्टम भी सामने आ रहा है। यह मंदिर खंडवा जिले में नर्मदा नदी के किनारे स्थित है। यहां हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।
हर साल करोड़ों का दान
बता दें कि ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट दान की सही राशि सार्वजनिक नहीं करता है। फिर भी अनुमान है कि मंदिर को सालाना 70 करोड़ रुपए से ज्यादा का दान मिलता है। यह राशि कई माध्यमों से आती है।
सबसे ज्यादा कमाई ऑनलाइन शीघ्र दर्शन व्यवस्था से होती है। इसके बाद प्रसादालय और लड्डू की बिक्री से भी अच्छी आमदनी होती है। श्रद्धालु दान पेटी में नकद राशि भी डालते हैं।
दर्शन करने आए भक्त सिर्फ नकद ही नहीं चढ़ाते। कई बार सोना-चांदी के आभूषण और सिक्के भी दान पेटी में मिलते हैं। मंदिर ट्रस्ट ने इन सभी को सुरक्षित रखने का अलग इंतजाम किया है।
कैसे होती है दान की गिनती
जानकारी के अनुसार मंदिर में आने वाली नकद राशि की गिनती मनमाने तरीके से नहीं होती है। यह काम सप्ताह में दो बार मंगलवार और शुक्रवार को होता है। दोनों दिन एसडीएम की मौजूदगी में गिनती की जाती है। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जाती है। इससे किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहती है।
मंदिर ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन दान की सुविधा भी शुरू कर रखी है। जो लोग मंदिर नहीं आ सकते, वे घर बैठे भी दान दे सकते हैं। इससे नकद के झंझट से भी राहत मिलती है।
2024 में लीक हुआ था आय का ब्योरा
मंदिर की कुल आय का आंकड़ा आमतौर पर सार्वजनिक नहीं होता है। वहीं साल 2024 में यह स्थिति थोड़ी बदल गई थी। मंदिर के आय-व्यय का एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।
इस पत्र के मुताबिक मंदिर की आय लगभग 33 करोड़ रुपए थी। हालांकि मंदिर प्रशासन ने इस आंकड़े पर खुलकर कुछ नहीं कहा।
उज्जैन महाकाल मंदिर में हुए विकास कार्यों के बाद ओंकारेश्वर में भी भीड़ बढ़ी है। उज्जैन का महाकाल लोक बनने के बाद से यहां श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।
आमतौर पर रोजाना 25 से 30 हजार लोग दर्शन करने आते हैं। पूर्णिमा, अमावस और शनिवार-रविवार को यह संख्या दोगुनी से तिगुनी हो जाती है।
ऑनलाइन बुकिंग से रोज लाखों की कमाई
शीघ्र दर्शन की सुविधा मंदिर ट्रस्ट के लिए आय का बड़ा जरिया है। रोजाना लगभग दो हजार स्लॉट इस सुविधा के लिए बुक किए जाते हैं। हर स्लॉट के लिए श्रद्धालु से 300 रुपए लिए जाते हैं। इस हिसाब से सिर्फ शीघ्र दर्शन से रोज करीब छह लाख रुपए की कमाई होती है।
प्रसादालय से भी ट्रस्ट को अच्छी आय होती है। यहां सिर्फ 30 रुपए में भोजन प्रसादी परोसी जाती है। रोजाना पांच हजार से ज्यादा लोग यहां भोजन करते हैं। यह सुविधा खासतौर पर दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए राहत भरी है।
कलेक्टर ने क्या कहा
खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने मंदिर के दान सिस्टम पर अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि ओंकारेश्वर मंदिर में अधिकतर दान ऑनलाइन माध्यम से ही आता है। जो नकद राशि आती है, उसकी गिनती में भी पूरी पारदर्शिता रखी जाती है।
कलेक्टर ने बताया कि दान देने वाले को मंदिर ट्रस्ट की ओर से रसीद भी दी जाती है। अगर कोई श्रद्धालु आयकर छूट के लिए प्रमाण पत्र मांगता है, तो वह भी उपलब्ध कराया जाता है।
कलेक्टर के इस बयान से साफ है कि मंदिर प्रशासन अयोध्या जैसी घटना को लेकर सतर्क है। मंदिर ट्रस्ट यह दिखाना चाहता है कि उनके यहां दान की हर प्रक्रिया पहले से पारदर्शी है।
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