करवाचौथ पर एमपी के इकलौते चौथ माता मंदिर में उमड़ी महिलाओं की भीड़, साल में सिर्फ एक दिन खुलते हैं पट

Amresh Kushwaha | Oct 30, 2026, 24:02 IST
उज्जैन के चौथ माता​ मंदिर की अनोखी परंपरा!
Crowds of women flock to MP only Chauth Mata temple; its doors open for only one day a year.
एलिशा द्विवेदी @ उज्जैन : करवाचौथ पर उज्जैन के चौथ माता मंदिर में महिलाओं की भारी भीड़ देखने को मिली है। जीवनखेड़ी में बने इस मंदिर में सुबह से ही दर्शन के लिए महिलाओं की लंबी लाइन लगी रही। महिलाओं ने चौथ माता की पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना की।

कई महिलाएं अपने पतियों के साथ भी मंदिर पहुंचीं। बताया जा रहा है कि मध्यप्रदेश में चौथ माता का यह इकलौता मंदिर है, जिसके दरवाजे साल में सिर्फ एक बार करवाचौथ के दिन ही खुलते हैं।



साल में सिर्फ एक दिन खुलता है मंदिर

उज्जैन के इंदौर-उन्हेल बायपास पर जीवनखेड़ी में चौथ माता का मंदिर है। इस मंदिर की खास बात यह है कि इसके दरवाजे साल में सिर्फ एक दिन करवाचौथ पर ही खुलते हैं।



कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी यानी करवाचौथ पर यहां खास पूजा होती है। इस दिन दूर-दूर से महिलाएं माता के दर्शन करने आती हैं।



इस बार भी सुबह से ही मंदिर में महिलाओं की लंबी लाइन लगी रही। महिलाओं ने चौथ माता की पूजा की और अपने पति की लंबी उम्र के साथ खुशहाल शादीशुदा जिंदगी की कामना की।



महिलाओं को बांटा गया कामाख्या सिंदूर और नेपाल का रुद्राक्ष

करवाचौथ पर मंदिर में दर्शन करने आए श्रद्धालुओं को खास प्रसाद भी बांटा गया। इसमें मां कामाख्या का पूजा किया हुआ सिंदूर, नेपाल के रुद्राक्ष, कपड़े और सिक्के शामिल थे।



महिलाओं में खासतौर पर कामाख्या सिंदूर को लेकर काफी उत्साह दिखा। धार्मिक मान्यता है कि यह सिंदूर पति की लंबी उम्र और सुहाग की रक्षा से जुड़ा है।



यही वजह है कि महिलाएं इस सिंदूर को अपने शादीशुदा जीवन में सुख-शांति और खुशहाली की कामना के साथ प्रसाद के रूप में लेती हैं।



मंदिर में कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं

चौथ माता मंदिर में चौथ माता के अलावा दूसरे देवी-देवताओं की मूर्तियां भी हैं। यहां मां पार्वती, रिद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ और संतोषी माता की प्रतिमाएं स्थापित हैं। करवाचौथ पर महिलाओं ने चौथ माता के साथ इन सभी देवी-देवताओं की भी पूजा की। मंदिर में सुबह से शाम तक विशेष पूजा और दर्शन का सिलसिला चलता रहा।



साल 2000 में हुई थी मंदिर की स्थापना

मंदिर के पुजारी डॉ. कैलाश अवंतिकापुरी वाले ने बताया कि इस मंदिर की स्थापना साल 2000 में हुई थी। महामंडलेश्वर शांतिस्वरूपानंद ने मंदिर की स्थापना कराई थी। मंदिर करीब 26 साल पुराना है।



पुजारी के अनुसार, हर साल करवाचौथ पर यहां विशेष धार्मिक आयोजन होता है। बड़ी संख्या में महिलाएं चौथ माता के दर्शन करने पहुंचती हैं। इस मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में खास आस्था है। साल में एक बार दर्शन का अवसर मिलने के कारण करवाचौथ पर यहां बड़ी संख्या में लोग आते हैं




FAQs

  1. चौथ माता मंदिर कब खुलता है?
    चौथ माता मंदिर वर्ष में केवल एक दिन, करवाचौथ के अवसर पर, खुलता है।
  2. इस मंदिर में महिलाएं क्यों आती हैं?
    महिलाएं चौथ माता की पूजा करने के लिए आती हैं, ताकि वे अपने पतियों की लंबी उम्र और खुशहाल शादीशुदा जीवन की कामना कर सकें।
  3. चौथ माता मंदिर की स्थापना कब हुई थी?
    चौथ माता मंदिर की स्थापना वर्ष 2000 में हुई थी।
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