दिवाली से पहले मायूस हुए 10 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के चेहरे: विभागों की सुस्ती से अटका बोनस, सेडमैप का भुगतान से इनकार!
इससे हजारों परिवारों की दिवाली फीकी रहने की नौबत आ गई है। प्रदेश की प्रमुख मैनपावर सप्लाई एजेंसी सेडमैप ने साफ कर दिया है कि वह अपनी जेब से भुगतान नहीं करेगी। जब तक विभाग लिखित सहमति और बजट मंजूर नहीं करेंगे, तब तक त्योहार से पहले कर्मचारियों के खातों में बोनस की राशि पहुंचना मुश्किल है।
कैसे अटका हुआ है बोनस का पैसा?
सेडमैप ने विभागों से बोनस के बिल बनाने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। एजेंसी ने अपनी तरफ से बोनस का भुगतान करने से भी इनकार कर दिया है। उसका कहना है कि पहले विभागों को लिखित सहमति देनी होगी और अपने बजट से पैसे की व्यवस्था करनी होगी। इसके बाद ही बोनस का बिल तैयार होगा। यानी जब तक विभाग मंजूरी नहीं देंगे, तब तक कर्मचारियों को बोनस मिलने का रास्ता साफ नहीं होगा।
सेडमैप ने साफ कहा- विभाग उठाएं बोनस का खर्च
सेडमैप ने साफ कर दिया है कि बोनस का खर्च संबंधित विभागों को ही उठाना होगा। एजेंसी ने इसके लिए एक प्रक्रिया भी बताई है। विभागों को कर्मचारियों की अलग-अलग सूची और लिखित सहमति पत्र देना होगा। इसके साथ बोनस की गणना का पूरा ब्योरा भी देना होगा। इसी जानकारी के आधार पर सेडमैप बिल तैयार करके भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।
3 दिन की मोहलत दी, लेकिन 8 दिन बाद भी जवाब नहीं
सेडमैप ने सभी विभागों और कार्यालय प्रमुखों को पत्र भेजकर 3 दिन के अंदर सहमति मांगी थी। तय समय-सीमा खत्म होने के 8 दिन बाद भी ज्यादातर विभागों ने कोई जवाब नहीं दिया है। माइनिंग विभाग को छोड़कर किसी दूसरे विभाग ने अब तक अपनी सहमति नहीं भेजी है। सेडमैप ने बोनस का हिसाब तैयार करने के लिए कैलकुलेशन शीट भी जल्द भेजने को कहा है। इसके बिना बोनस का बिल बनाना संभव नहीं है।
माइनिंग विभाग ने दिखाई तेजी, बाकी विभागों की चुप्पी
बोनस के मामले में माइनिंग विभाग ने समय पर अपनी सहमति भेज दी है। वहीं, बाकी विभागों की तरफ से अब तक कोई मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में कर्मचारियों को बोनस मिलने में हो रही देरी की एक बड़ी वजह विभागों की सुस्ती बन रही है।
कर्मचारी संगठन ने श्रम विभाग से की शिकायत
बोनस में हो रही देरी को लेकर सेमी गवर्नमेंट एम्प्लाइज फेडरेशन ने शिकायत की थी। इसके बाद श्रम विभाग ने 29 सितंबर को श्रमायुक्त को कार्रवाई करने के निर्देश दिए। फिर 23 अक्टूबर को उप श्रमायुक्त ने करीब 10 लाख कर्मचारियों को बोनस अधिनियम का लाभ नहीं मिलने पर वैधानिक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बावजूद बोनस का मामला अब तक नहीं सुलझा है। दिवाली के मौके पर बोनस में देरी से कर्मचारियों के परिवारों का बजट भी प्रभावित हो रहा है।
विभागों की लेटलतीफी से बढ़ रही कर्मचारियों की परेशानी
बोनस मिलने में देरी की सबसे बड़ी वजह विभागों की मंजूरी और बजट का इंतजार है। हर विभाग की तरफ से सहमति और पैसे की व्यवस्था होनी बाकी है।
अब विभागों के फैसले पर टिकी बोनस की उम्मीद
अब सभी की नजर विभागों की मंजूरी पर है। विभाग बजट को मंजूरी देकर सहमति भेजते हैं, तो सेडमैप बोनस का बिल तैयार करेगी और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। वहीं अगर विभागों की तरफ से देरी जारी रही, तो कर्मचारियों को बोनस के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है। ऐसे में उनकी दिवाली की खुशियां भी प्रभावित हो सकती हैं।