वृद्धावस्था में तंगहाली से जूझते एमपी के पद्म सम्मानित, सरकार कर रहीं पेंशन की तैयारी

Sanjay Dhiman | Aug 15, 2026, 14:23 IST
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मध्य प्रदेश सरकार पद्म पुरस्कार विजेताओं को हर महीने 30 हजार रुपए पेंशन देने की योजना बना रही है। बुढ़ापे और बीमारी में उन्हें आर्थिक तंगी से बचाना मकसद है।

मध्य प्रदेश सरकार पद्म पुरस्कार विजेताओं को मासिक पेंशन देने पर विचार कर रही है। यह योजना उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तर्ज पर बनाई जा रही है। प्रस्ताव के तहत हर महीने 30 हजार रुपए मानदेय दिया जा सकता है। संस्कृति विभाग के अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक हो चुकी है। कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही योजना लागू होगी।



बुढ़ापे में क्यों आई नौबत

प्रदेश के कई हिस्सों से चिंताजनक खबरें सामने आईं हैं। पद्मश्री सम्मान पाने वाले कई लोग आर्थिक अभाव में जी रहे हैं। बीमारी और बुढ़ापे में उनके पास कोई स्थायी सहारा नहीं है। इसी वजह से सरकार अब स्थायी सम्मान निधि की तैयारी कर रही है।



जोधइया बाई की कहानी

उमरिया जिले की जोधइया बाई बैगा ने बैगा चित्रकला को दुनिया भर में पहचान दिलाई। साल 2023 में उन्हें पद्मश्री सम्मान मिला। लेकिन दिसंबर 2024 में लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया। इस दौरान उनके परिवार को कड़ा संघर्ष करना पड़ा। महज 30-35 साल की उम्र में उन्हें तीन बच्चों का पेट पालना था। उन्होंने लकड़ियां बीनीं, गोबर बेचा और मजदूरी भी की। करीब 69 साल की उम्र तक वे बदहाली से जूझती रहीं।



पैरा तैराक की पीड़ा

भिंड के मेहगांव निवासी सत्येंद्र सिंह लोहिया दिव्यांग पैरा तैराक हैं। उन्हें साल 2024 में पद्मश्री सम्मान मिला था। फरवरी में उन्होंने मीडिया के सामने अपनी पीड़ा खुलकर बताई। उन्होंने यूपी और हरियाणा जैसी सुविधाओं की मांग की। इनमें मासिक पेंशन, मुफ्त इलाज और सर्किट हाउस में ठहरने की सुविधा शामिल है। सत्येंद्र इंदौर में जीएसटी (GST – Goods and Services Tax) विभाग में तैनात हैं। वे इंग्लिश चैनल पार करने वाले एशिया के पहले पैरा तैराक हैं।



दूसरे राज्यों में क्या व्यवस्था

कई राज्य पहले से ही पद्म सम्मानितों को आर्थिक मदद दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश में हर महीने 50 हजार रुपए पेंशन दी जाती है। यह राशि यश भारती सम्मान वालों को भी मिलती है। ओडिशा में सभी पद्म विजेताओं के खाते में सीधे 30 हजार रुपए भेजे जाते हैं। तेलंगाना में 25 हजार रुपए मासिक पेंशन के साथ 25 लाख रुपए एकमुश्त पुरस्कार भी दिया जाता है। हरियाणा में 10 हजार रुपए पेंशन के अलावा वॉल्वो बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा है।



सरकार का पक्ष

संस्कृति विभाग के एसीएस (ACS – Additional Chief Secretary) शिवशेखर शुक्ला ने इस पहल पर बात की। उन्होंने कहा कि पद्म नायकों को बुढ़ापे या बीमारी में बेबस नहीं रहने दिया जाएगा। इसके लिए स्थायी मासिक सम्मान निधि का खाका तैयार किया गया है।



अब सबकी निगाहें कैबिनेट की मंजूरी पर टिकी हैं। योजना लागू होते ही प्रदेश के पद्म सम्मानितों को बड़ी राहत मिलेगी।



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