मध्य प्रदेश के इस जिले में विशाल बरगद के नीचे सजता है मां चौसठ योगिनी का अनोखा दरबार, लगता है दाल-बाटी का भोग
Panari Chausath Yogini: बुंदेलखंड की माटी में सनातन संस्कृति के अद्भुत रंग देखने को मिलते हैं। शारदीय नवरात्रि हो या आम दिन के पावन अवसर पर यहां भक्ति की अलग ही छटा देखने को मिलती है।
यहां प्रकृति और पूजा की परंपराएं सदियों से चली आ रही हैं। मध्य प्रदेश के सागर जिले की देवरी तहसील में पनारी गांव स्थित है। इस गांव में मां चौसठ योगिनी का एक पावन धाम है।
आमतौर पर देवी मंदिर ऊंचे पहाड़ों या भव्य परिसरों में होते हैं। लेकिन पनारी का यह धाम प्रकृति की सीधी गोद में बसा है। यह स्थान किसी पक्के मंदिर में नहीं बल्कि विशाल बरगद के नीचे है। इस विशाल वटवृक्ष के नीचे माता का दरबार सजता है।
यहां किसी कृत्रिम छत या गुंबद की जरूरत नहीं पड़ती। बरगद की विशाल शाखाएं ही इस मंदिर की असली छत हैं। पेड़ की घनी जड़ें ही माता के दरबार की दीवारें बनती हैं। श्रद्धालु बरगद की जड़ों को ही माता का स्वरूप मानते हैं। पूरे भक्ति भाव से लोग यहां आकर पूजन और अर्चन करते हैं।
क्या है पनारी धाम का अनोखा रहस्य
स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, यह वटवृक्ष साधारण पेड़ नहीं है। इसमें मां चौसठ योगिनियों की दिव्य शक्तियां समाहित मानी जाती हैं। यह विशाल बरगद का पेड़ लगभग 2 से 3 एकड़ में फैला है। यह सैकड़ों साल पुराना पेड़ माता के प्रकट होने का गवाह बना।
पेड़ की जड़ों और तनों को चीरकर माता प्रकट हुई थीं। इसी वजह से प्राकृतिक रूप में ही माता की पूजा की जाती है। लोग दूर-दूर से इस रहस्यमयी धाम का दर्शन करने आते हैं। यहां की असीम शांति भक्तों का मन मोह लेती है।
दाल-बाटी का लगता है विशेष भोग
स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, पनारी धाम की एक और अनूठी परंपरा यहां का खास प्रसाद है। माता को खुश करने के लिए पारंपरिक दाल-बाटी का भोग लगता है। यह परंपरा बुंदेलखंड की ग्रामीण संस्कृति का सुंदर हिस्सा है। भक्त अपनी श्रद्धा से यहां दाल और बाटी तैयार करते हैं। फिर माता के चरणों में इस सात्विक भोजन का भोग लगता है। यह प्रसाद भक्तों के बीच बड़े प्रेम से बांटा जाता है।
मन्नत पूरी होने पर बांधते हैं घंटे
इस दरबार में आने वाले भक्तों की अटूट आस्था जुड़ी है। माना जाता है कि सच्चे मन से मांगी मुराद पूरी होती है। जब मन्नत पूरी हो जाती है तो लोग धन्यवाद देने आते हैं। भक्त वटवृक्ष की शाखाओं पर पीतल के घंटे बांधते हैं। यहां लोहे और पीतल के सैकड़ों घंटे बंधे नजर आते हैं। ये घंटे भक्तों की सच्ची आस्था और विश्वास का सबूत हैं।
नवरात्रि में उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब
चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान यहां अद्भुत नजारा दिखता है। पनारी गांव का यह पावन धाम एक महाकुंभ जैसा लगता है। नौ दिनों तक यहां भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। मध्य प्रदेश के साथ देश भर से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। लोग माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस दौरान पूरा पनारी गांव भक्ति के माहौल में डूब जाता है।
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