नई तबादला नीति: गृह तहसील में अब नहीं होगी पटवारी पोस्टिंग, जानें नए नियम
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में पटवारी संविलयन नीति 2026 जारी की गई है।
- पटवारियों की गृह तहसील में पोस्टिंग पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दी गई है।
- नई नीति में जिला स्तर पर वरिष्ठता और सीनियरिटी तय होगी।
- केवल विशेष परिस्थितियों में ही अंतर जिला संविलयन की अनुमति दी जाएगी।
- ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया और रिक्त पदों पर ही तबादला संभव होगा।
मध्यप्रदेश राजस्व विभाग ने पटवारी संविलयन नीति 2026 जारी कर दी है। यह नीति तबादला अवधि खत्म होने से तीन दिन पहले आई है। नई नीति में गृह तहसील में पोस्टिंग पर रोक लगाई गई है। नए जिले में पदस्थापना के बाद वहीं की सीनियरिटी सूची से वरिष्ठता तय होगी। पटवारी पद जिला संवर्ग का होने के कारण यह अलग नीति बनाई गई है।
नीति क्यों जरूरी थी
पटवारी का पद जिला संवर्ग में आता है। इस कारण सामान्य तबादला नीति इस पर सीधे लागू नहीं होती। राजस्व विभाग ने इसी वजह से अलग संविलयन नीति बनाई है। इससे जिलों के बीच पटवारियों के तबादले की प्रक्रिया साफ हो गई है।
कौन होंगे पात्र
नीति के मुताबिक पटवारी परीक्षा 2022 का परिणाम आने से पहले नियुक्त हुए पटवारी अंतर जिला संविलयन के लिए पात्र होंगे। साथ ही 2022 की परीक्षा पास करने वाले पटवारियों को भी कुछ खास स्थितियों में मौका मिल सकता है।
2022 बैच के लिए खास शर्तें
2022 की परीक्षा पास करने वाले पटवारी कुछ शर्तों के साथ आवेदन कर सकेंगे। अगर पति या पत्नी सरकारी कर्मचारी हैं और एक ही जिले में पदस्थापना जरूरी है, तो पद रिक्त होने पर मौका मिलेगा।
विवाहित महिला, विधवा, तलाकशुदा या परित्यकता महिला पटवारी को भी प्राथमिकता मिल सकती है। इसके अलावा कैंसर, किडनी, डायलिसिस या ओपन हार्ट सर्जरी जैसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त पटवारी भी इस दायरे में आएंगे। आपसी सहमति से संविलयन के आवेदन भी स्वीकार किए जाएंगे।
गृह तहसील में पोस्टिंग नहीं
नीति में सबसे अहम बात यह है कि किसी भी पटवारी को उसकी गृह तहसील में पदस्थ नहीं किया जाएगा। जिले के भीतर पदस्थापना कलेक्टर द्वारा की जाएगी। लेकिन गृह तहसील का यह नियम सख्ती से लागू रहेगा।
नए जिले में वरिष्ठता कैसे तय होगी
संविलयन के बाद पटवारी की वरिष्ठता नए जिले की संधारित सूची के आधार पर तय की जाएगी। यानी पुराने जिले की सीनियरिटी मान्य नहीं होगी। पटवारी को नए जिले की सूची में नए सिरे से स्थान मिलेगा।
प्रोबेशन और रिकॉर्ड ट्रांसफर
जिन पटवारियों का संविलयन होगा, उनकी परिवीक्षा अवधि से जुड़ी कार्यवाही नए जिले में पूरी होगी। पुराने जिले से नए जिले को पटवारी की व्यक्तिगत नस्ती, जांच और दंड संबंधी जानकारी भेजी जाएगी। संविलयन की संख्या सामान्य प्रशासन विभाग की तबादला नीति के अनुसार तय होगी।
आवेदन प्रक्रिया कैसी होगी
आयुक्त भू संसाधन प्रबंधन मध्य प्रदेश द्वारा ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। आवेदन में अपनी श्रेणी जैसे सामान्य, पिछड़ा वर्ग, ईडब्ल्यूएस (EWS – Economically Weaker Section), एससी (SC – Scheduled Caste), एसटी (ST – Scheduled Tribe), दिव्यांग या भूतपूर्व सैनिक की जानकारी देनी होगी। आवेदन के साथ कोई दस्तावेज स्वीकार नहीं होंगे।
जिन पटवारियों के खिलाफ लोकायुक्त या अन्य कोई आपराधिक मामला दर्ज है, वे इस संविलयन के लिए अपात्र माने जाएंगे। संविलयन का आदेश आयुक्त भू संसाधन प्रबंधन मध्य प्रदेश द्वारा ही जारी किया जाएगा।
रिक्त पद पर ही होगा संविलयन
जिस जिले में संविलयन चाहा गया है, वहां संबंधित वर्ग का पद रिक्त होने पर ही संविलयन किया जाएगा। यह प्रक्रिया आरक्षण नियमों और जिला आरक्षण रोस्टर के अनुसार होगी।
आदेश के बाद क्या करना होगा
आदेश जारी होने के 15 दिन के भीतर पटवारी को नए जिले में उपस्थिति देनी होगी। एक बार जिला आवंटित होने के बाद दोबारा जिला बदलने की अनुमति नहीं मिलेगी। नए जिले में उपस्थिति देना अनिवार्य रहेगा।
आरक्षण नियमों का रहेगा ध्यान
नीति में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी जिले में आरक्षित पदों से अधिक या आरक्षण नियमों के विपरीत पदस्थापना नहीं की जाएगी। यानी संविलयन के दौरान भी रोस्टर का पूरा पालन किया जाएगा।
इस तरह मध्यप्रदेश की नई तबादला नीति पटवारियों के तबादले और संविलयन की प्रक्रिया को साफ और व्यवस्थित बनाती है। आने वाले दिनों में इसका असर बड़ी संख्या में पटवारियों पर पड़ेगा।
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