सीएम मोहन यादव से मुलाकात के बाद माने पटवारी, 12 अक्टूबर से शुरू करेंगे स्वामित्व योजना का काम
इ पटवारियों और सरकार के बीच सहमती बनने के बाद अब पटवारियों को न्यायिक संरक्षण देने के आदेश जारी किए जाएंगे। इस योजना के तहत करीब 50 लाख रजिस्ट्रियां की जानी हैं।
सीएम से मुलाकात में क्या तय हुआ
संघ के प्रांतीय अध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल के मुताबिक योजना में न्यायिक संरक्षण के आदेश जारी किए जाएंगे। साथ ही 17 सितंबर के बाद की गई कार्रवाइयों को शून्य करने पर भी सहमति बनी है।
बैठक में राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा मौजूद थे। भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर भी थे। पटवारी संघ के अध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल और प्रांतीय पटवारी संघ के अध्यक्ष अश्विन सैनी भी शामिल रहे।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी एक्स पर बैठक की जानकारी दी। उसके मुताबिक संघ के पदाधिकारियों ने योजना का काम पूरी निष्ठा से करने की बात कही है।
12 अक्टूबर से काम पर लौटेंगे पटवारी
पटवारी संघ ने ऐलान किया है कि 12 अक्टूबर से स्वामित्व योजना का काम फिर शुरू होगा। यानी रविवार के बाद सोमवार से काम पटरी पर आ सकता है।
अभी यह साफ नहीं है कि न्यायिक संरक्षण के आदेश कब तक आएंगे। शून्य की जाने वाली कार्रवाइयों में कौन सी शामिल होंगी, यह भी तय नहीं है। इन्हीं सवालों पर संघ और सरकार का अगला कदम देखना होगा।
आर्थिक मांगों पर आश्वासन
बैठक में पटवारियों की आर्थिक मांगों पर भी चर्चा हुई। भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर के मुताबिक सरकार ने वेतन विसंगति सहित अन्य मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है।
इस मामले में आयोग के गठन के बाद विचार होगा। मुख्यमंत्री ने 27 अक्टूबर को होने वाले महासम्मेलन में आर्थिक मांगों पर घोषणा का आश्वासन दिया है। यानी असली फैसला उसी दिन तक टला है।
मध्यप्रदेश स्वामित्व योजना का लक्ष्य
योजना की शुरुआत 17 सितंबर को हुई थी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर इसे शुरू किया था। सरकार का लक्ष्य एक महीने में 50 लाख रजिस्ट्रियों का था।
वहीं, 9 अक्टूबर तक की रिपोर्ट के अनुसार एक भी रजिस्ट्री नहीं हो पाई थी। सरकार का तर्क है कि रजिस्ट्री से भूधारकों के पास औपचारिक दस्तावेज होंगे। इससे वे बैंक से लोन ले सकेंगे।
पटवारी क्यों कर रहे थे विरोध
योजना में रजिस्ट्री की डीड (जमीन हस्तांतरण का दस्तावेज) तैयार करनी है। भूधारक आवेदन करेगा और डीड पटवारी तय करेगा। इसके बाद तहसीलदार या नायब तहसीलदार पंजीयन करेंगे।
विवाद की जड़ यहीं है। दस्तावेज में सरकारी जमीन के विक्रेता के रूप में पटवारी को दर्शाया गया है। पटवारियों का कहना था कि वे विक्रेता कैसे बन सकते हैं। भविष्य में अदालती केस हुआ, तो वे पक्षकार बन जाएंगे। इसी डर के कारण वे कानूनी संरक्षण मांग रहे थे।
हड़ताल के दौरान की कार्रवाई
हड़ताल के बीच सरकार सख्त दिखी थी। प्रदेश में 3430 पटवारियों को नोटिस मिले थे। 129 निलंबित हुए थे और 29 को बर्खास्त किया गया था। ये आंकड़े समझौते से पहले के हैं।
जबलपुर में 17 पटवारी निलंबित हुए थे और 164 को कारण बताओ नोटिस मिले थे। सिंगरौली में 10 पटवारियों पर निलंबन की कार्रवाई हुई थी। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कलेक्टरों को सात दिन में काम कराने की चेतावनी भी दी थी।
कटनी के बहोरीबंद में संघ ने एसडीएम (Sub Divisional Magistrate) श्लोक वायकर पर आरोप लगाया है। संघ के मुताबिक चार पटवारियों को रोककर मोबाइल जब्त किए गए और काम कराया गया था। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन का पक्ष भी सामने नहीं आया है।
अब आगे क्या होगा
अब सबसे बड़ा सवाल आदेशों का है। न्यायिक संरक्षण के आदेश कब और किस रूप में आएंगे? 17 सितंबर के बाद के निलंबन और बर्खास्तगी का क्या होगा? क्या कटनी और जबलपुर जैसे आरोपों की जांच होगी? इन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं।
अगर आदेश समय पर आए, तो 12 अक्टूबर से काम शुरू हो सकता है। फिर 50 लाख रजिस्ट्रियों का लक्ष्य जमीन पर उतरने लगेगा। नहीं आए, तो विवाद फिर भड़क सकता है।
सबकी नजर अब 27 अक्टूबर के महासम्मेलन पर भी है। वहां आर्थिक मांगों पर मुख्यमंत्री की घोषणा होनी है। तब साफ होगा कि पटवारी संघ की नाराजगी कितनी दूर हुई।
FAQs
- पटवारियों को न्यायिक संरक्षण देने का आदेश कब जारी होगा?
पटवारियों को न्यायिक संरक्षण देने का आदेश कब जारी होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। - 12 अक्टूबर से पटवारे कौन-कौन से कार्य फिर से शुरू करेंगे?
12 अक्टूबर से पटवारे स्वामित्व योजना के अंतर्गत रजिस्ट्रियों का काम फिर से शुरू करेंगे। - सरकार ने पटवारियों की आर्थिक मांगों पर क्या आश्वासन दिया है?
सरकार ने पटवारियों की आर्थिक मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए महासम्मेलन में घोषणा करने का आश्वासन दिया है।