सातवें वेतन आयोग का पूरा हक दें: MP के पेंशनर्स ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र

Amresh Kushwaha | Aug 06, 2026, 16:01 IST
MP के पेंशनर्स ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र
मध्यप्रदेश के पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने सातवें वेतन आयोग के तहत 27 महीने का बकाया एरियर देने की मांग की है। एसोसिएशन ने मुख्य सचिव और वित्त विभाग को पत्र लिखा है। जानें पेंशनर्स की क्या है मांग...

समझें क्या है पूरा मामला...

  • पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने मुख्य सचिव को पत्र लिखा है।
  • 27 महीने का बकाया एरियर देने की मांग की गई है।
  • यह मांग सातवें वेतन आयोग से जुड़ी है।
  • न्यूनतम पेंशन 9000 रुपए करने की भी मांग है।
  • अभी न्यूनतम पेंशन 7750 रुपए प्रतिमाह तय है।

जानें पेंशनर्स की क्या है मांग

मध्यप्रदेश पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने राज्य सरकार से बड़ी मांग की है। एसोसिएशन चाहता है कि 7वां वेतन आयोग (7th Pay Commission) का पूरा लाभ पेंशनरों को भी मिले। इसके लिए मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव, वित्त को पत्र लिखा गया है। पत्र में 27 महीने का बकाया एरियर जल्द जारी करने का निवेदन किया गया है। यह पत्र 5 अगस्त 2026 को भेजा गया है।



27 माह का एरियर बकाया

राज्य के सरकारी कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का फायदा 1 जनवरी 2016 से मिला था। वहीं, पेंशनरों के लिए यह तारीख अलग रखी गई। पेंशनरों को संशोधित पेंशन का लाभ 1 अप्रैल 2018 से दिया गया। इससे 1 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2018 तक का समय छूट गया। यह कुल 27 महीने का समय बनता है। एसोसिएशन का कहना है कि इस अवधि का एरियर अब तक नहीं मिला है। उनकी मांग है कि यह बकाया राशि जल्द दी जाए।



एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आमोद कुमार सक्सेना और संरक्षक गणेश दत्त जोशी ने यह जानकारी दी। दोनों ने बताया कि पेंशनरों को भी बराबर हक मिलना चाहिए। उनका कहना है कि यह सिर्फ पैसों का मामला नहीं है। यह पेंशनरों के सम्मान से भी जुड़ा मुद्दा है।



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छत्तीसगढ़ से तुलना

एसोसिएशन ने अपने पत्र में छत्तीसगढ़ सरकार का उदाहरण भी दिया है। छत्तीसगढ़ शासन ने एक समिति बनाई थी। इस समिति ने पेंशनरों के लिए भी 1 जनवरी 2016 से संशोधित पेंशन लागू करने का प्रस्ताव दिया था। यह प्रस्ताव मध्यप्रदेश को भी भेजा गया था।



वहीं, आरोप है कि मध्यप्रदेश वित्त विभाग ने इस प्रस्ताव को नजरअंदाज कर दिया। एसोसिएशन का कहना है कि यह फैसला संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है। उनका तर्क है कि जब दूसरे राज्य में ऐसा हो सकता है तो मध्यप्रदेश में क्यों नहीं।



एसोसिएशन के आरोप

प्रांतीय सचिव यशवंत सिंह बैस और भोपाल जिला अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने वित्त विभाग पर सीधा आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विभाग पेंशनरों के आर्थिक हितों की लगातार अनदेखी कर रहा है। यशवंत सिंह बैस ने एक अहम बात भी बताई।



सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति ने पेंशन तय करने के लिए समिति बनाई थी। इस समिति ने महंगाई और जीवन यापन की लागत को ध्यान में रखा था। समिति ने सामाजिक सुरक्षा के सिद्धांत भी देखे थे। इसके बाद न्यूनतम पेंशन 9000 रुपए प्रतिमाह तय की गई थी।



न्यूनतम पेंशन का मामला

वहीं, वित्त विभाग ने इस सिफारिश को पूरी तरह नहीं माना। सरकार ने न्यूनतम पेंशन 7750 रुपए प्रतिमाह ही तय की। एसोसिएशन का कहना है कि यह फैसला सातवें वेतन आयोग की मूल भावना के खिलाफ है। उनका मानना है कि जब समिति ने 9000 रुपए तय किए थे, तो सरकार को वही लागू करना चाहिए था। कम पेंशन मिलने से बुजुर्ग पेंशनरों को परेशानी हो रही है। खासकर महंगाई के इस दौर में यह राशि पर्याप्त नहीं है।



उपाध्यक्षों की मांग

एसोसिएशन के उपाध्यक्ष शैलेन्द्र श्रीवास्तव, संतोष ठाकुर और शकुंतला वर्मा ने भी सरकार से अपील की है। तीनों ने न्यूनतम पेंशन 7750 रुपए से बढ़ाकर 9000 रुपए प्रतिमाह करने की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि इससे बुजुर्ग पेंशनरों को आर्थिक राहत मिलेगी। एसोसिएशन ने यह भी कहा कि यह मांग लंबे समय से लंबित है।



अब आगे क्या

एसोसिएशन ने मुख्य सचिव से जल्द भुगतान आदेश जारी करने का अनुरोध किया है। पत्र की प्रतिलिपि विभिन्न मीडिया संस्थानों को भी भेजी गई है। एसोसिएशन चाहता है कि यह मुद्दा जल्द सुलझे। हजारों पेंशनर परिवार इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं। यदि मांग मानी जाती है तो कई पेंशनरों को राहत मिलेगी। फिलहाल सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।



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