कर्मचारियों की उम्मीदों पर फिरा पानी! पेंशनर्स को एरियर्स न देने कोर्ट जाएगी सरकार
मध्य प्रदेश सरकार पेंशनर्स को एरियर्स देने के बजाय कोर्ट से स्थगन लेने की तैयारी कर रही है। यह मामला 32 महीने और 27 महीने के पेंशन पुनरीक्षण एरियर से जुड़ा है। वित्त विभाग ने सभी विभागों को भुगतान रोकने और स्थगन लेने के निर्देश दिए हैं। इससे सरकार करीब 4400 करोड़ रुपए बचाना चाहती है। मामला फिलहाल हाईकोर्ट में लंबित है और आगे की कार्रवाई अदालत के आदेश पर निर्भर है।
सरकार का नया आदेश
मध्य प्रदेश के पेंशनर्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार उन्हें 59 महीने का एरियर्स देने से बच सकती है। इसके लिए सरकार कोर्ट से स्थगन लेने की तैयारी में है। वित्त विभाग ने सोमवार को सभी विभागों को इस बारे में आदेश जारी किए। आदेश में साफ कहा गया है कि भुगतान करने के बजाय स्थगन के लिए प्रयास किए जाएं।
यह निर्देश सिर्फ विभागों तक सीमित नहीं है। संभागीय आयुक्तों और जिला कलेक्टरों को भी यही निर्देश भेजे गए हैं। यानी पूरे प्रदेश में यह प्रक्रिया एक साथ लागू होगी।
कौन सा एरियर अटका है
यह मामला दो अलग-अलग अवधि के एरियर से जुड़ा है। पहला मामला 1 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 तक के 32 महीने का है। यह छठवें वेतनमान से जुड़ा एरियर है। दूसरा मामला 1 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2018 तक के 27 महीने का है। यह सातवें वेतनमान से संबंधित है। दोनों ही मामलों में अब सरकार भुगतान की बजाय स्थगन चाहती है।
हाईकोर्ट का क्या आदेश है
वित्त विभाग ने अपने आदेश में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के फैसलों का हवाला दिया है। आदेश में दो मामलों का जिक्र है, WA-760/2026 और WA-2182/2025। विभाग का कहना है कि इन मामलों में स्थिति साफ हो चुकी है।
दरअसल यह कानूनी मुद्दा बड़ी पीठ के पास भेजा गया है। इस वजह से सुनवाई अभी लंबित है। जब तक बड़ी पीठ फैसला नहीं सुनाती, तब तक पुराने आदेशों पर स्थगन प्रभावी रहेगा। सरकार इसी आधार पर अन्य मामलों में भी स्थगन मांगना चाहती है।
4400 करोड़ का गणित
सरकार का यह कदम बड़ी रकम बचाने के लिए है। 32 महीने का एरियर न मिलने वाले पेंशनर्स की संख्या 2 लाख 46 हजार है। इन्हें भुगतान करने पर करीब 400 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
वहीं 27 महीने के एरियर के दायरे में साढ़े 4 लाख पेंशनर आते हैं। इस पर सरकार को करीब 4000 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे। दोनों को मिलाकर कुल रकम 4400 करोड़ रुपए तक पहुंचती है। यही बड़ी वजह है कि सरकार भुगतान टालना चाहती है।
प्रदेश में फिलहाल चार लाख से ज्यादा पेंशनर्स हैं। हालांकि आदेश में यह साफ नहीं है कि इनमें से कितने मामलों में एरियर देना बाकी है।
लंबित मामलों में आगे क्या
वित्त विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं। सभी लंबित मामलों और अवमानना याचिकाओं में सरकारी अधिवक्ता के जरिए स्थगन लिया जाए। यह कार्रवाई हाईकोर्ट के पहले से जारी स्थगन आदेशों के आधार पर होगी।
पेंशनर्स के लिए इसका मतलब
यह आदेश सीधे तौर पर उन्हीं पेंशनर्स से जुड़ा है, जिनके मामले अदालत में लंबित हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि सभी पेंशनर्स का भुगतान तुरंत शुरू हो जाएगा। असल में सरकार सिर्फ यह सुनिश्चित करना चाहती है कि लंबित मामलों में कानूनी कार्रवाई समय पर हो।
फिलहाल यह पूरा मामला न्यायिक प्रक्रिया पर टिका है। आगे क्या होगा, यह अदालत के अगले आदेशों पर निर्भर करेगा। जब तक बड़ी पीठ फैसला नहीं सुनाती, पेंशनर्स को इंतजार करना होगा।
यह खबरें भी पढ़ें...
एमपी में सस्ते में मिलेगी बिजली, सीएम मोहन का ऐलान-मुरैना प्रोजेक्ट तैयार
एमपी पुलिस के स्टार अफसर या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर? DGP की गाइडलाइन से पड़ेगा फर्क?
एमपी के लाखों गैस उपभोक्ताओं पर संकट, 2 अक्टूबर तक नहीं कराई LPG e-KYC तो कट जाएगा कनेक्शन
नक्सलियों के नाम पर 45 करोड़ का सड़क घोटाला, 24 सड़कें कागजों में, केंद्र को झूठा सबूत