एमपी के लाखों पेंशनर्स को झटका, केंद्र सरकार ने राशि बढ़ाने से किया साफ इनकार
मध्य प्रदेश के करीब 22 लाख 5 हजार पेंशनर्स के लिए एक निराश करने वाली खबर आई है। इन पेंशनर्स में बुजुर्ग, विधवाएं और दिव्यांग लोग शामिल हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्यसभा में यह साफ कर दिया है कि, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत दी जाने वाली पेंशन राशि बढ़ाने या लाभार्थियों का दायरा बढ़ाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।
केंद्र सरकार का ये फैसला प्रदेश के उन लाखों लोगों पर असर डालेगा, जो महंगाई के इस समय में अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए सरकार से मदद की उम्मीद लगाए बैठे थे।
सामाजिक सुरक्षा के मामले में प्रदेश का दूसरा नंबर
राज्यसभा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश सामाजिक सुरक्षा के मामले में देश के प्रमुख राज्यों में से एक है। खासकर विकलांगता पेंशन (IGNDPS) के मामले में मध्य प्रदेश 1 लाख 1 हजार 470 लाभार्थियों के साथ दूसरे नंबर पर है। सिर्फ बिहार ही इसे पीछे छोड़ने में सफल रहा है।
पेंशन की राशि बढ़ाने से इनकार
मंत्रालय ने माना है कि, नीति आयोग और अन्य अध्ययनों ने पेंशन की राशि बढ़ाने और भुगतान प्रक्रिया को मजबूत करने की सिफारिश की थी। इन अध्ययनों में यह भी बताया गया कि, लोग इस पेंशन का इस्तेमाल मुख्य तौर पर खाने-पीने और स्वास्थ्य देखभाल जैसी जरूरी चीजों के लिए कर रहे हैं। इसके बावजूद सरकार ने अभी पेंशन की राशि बढ़ाने से मना कर दिया है।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना: इसके तहत मध्य प्रदेश में बुजुर्गों को हर महीने 600 रुपए पेंशन मिलती है। यह राशि उम्र और लाभार्थी की श्रेणी के हिसाब से बदलती है।
कोई बुजुर्ग 60 से 79 साल की उम्र के बीच है तो उसे 600 रुपए मिलते हैं। इसमें से केंद्र सरकार 200 रुपए देती है और मध्य प्रदेश सरकार 400 रुपए देती है। वहीं यदि किसी बुजुर्ग की उम्र 80 साल या उससे ज्यादा हो तो भी उसे 600 रुपए मिलते हैं। इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा बढ़कर 500 रुपए हो जाता है और राज्य सरकार का हिस्सा घटकर सिर्फ 100 रुपए रह जाता है।
इंदिरा गांधी विधवा पेंशन योजना: 40 से 79 साल तक की BPL (गरीबी रेखा से नीचे) विधवाओं को हर महीने 600 रुपए दिए जाते हैं। इसमें केंद्र और राज्य दोनों का योगदान होता है। यहां केंद्र 300 रुपए और राज्य 300 रुपए देता है।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन: 18 से 79 साल तक के लोग जिन्हें 80% या उससे ज्यादा दिव्यांगता हो उन्हें हर महीने 600 रुपए मिलते हैं। इसमें भी केंद्र और राज्य दोनों का योगदान 300-300 रुपए होता है। वहीं व्यक्ति 80 साल का हो जाता है तो केंद्र का हिस्सा 500 रुपए और राज्य का हिस्सा 100 रुपए हो जाता है।
पेंश योजना के मामले में टॉप पांच शहर
| योजना | नंबर 1 | नंबर 2 | नंबर 3 | नंबर 4 | नंबर 5 |
| वृद्धावस्था पेंशन | उत्तर प्रदेश (47.22 लाख) | बिहार (31.57 लाख) | मध्य प्रदेश (15.75 लाख) | ओडिशा (14.18 लाख) | तमिलनाडु (12.82 लाख) |
| विधवा पेंशन | उत्तर प्रदेश (10.25 लाख) | पश्चिम बंगाल (7.26 लाख) | बिहार (6.35 लाख) | तमिलनाडु (5.74 लाख) | मध्य प्रदेश (5.46 लाख) |
| दिव्यांग पेंशन | बिहार (1.27 लाख) | मध्य प्रदेश (1.01 लाख) | ओडिशा (90.2 हजार) | उत्तर प्रदेश (85.7 हजार) | तमिलनाडु (64.0 हजार) |
| परिवार लाभ | उत्तर प्रदेश (73.0 हजार) | बिहार (35.8 हजार) | महाराष्ट्र (34.9 हजार) | मध्य प्रदेश (30.8 हजार) | ओडिशा (24.6 हजार) |
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