छात्रों और मजदूरों को नहीं होगी LPG की किल्लत, मिल रहा पांच किलो का सिलेंडर
ईरान-इजराइल अमेरिका (मिडिल ईस्ट)युद्ध दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। इसी बीच मध्य प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को लेकर डर और चिंता फैल गई थी। इसके चलते पहली बार तीनों सरकारी तेल कंपनियां- इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम सामने आई हैं।
सोमवार 06 मार्च को इन कंपनियों ने एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बताया कि मध्यप्रदेश में ईंधन का स्टॉक पूरी तरह से पर्याप्त है। सप्लाई में कोई भी समस्या नहीं है।
छात्रों और श्रमिकों को पांच किलो का सिलेंडर
राहत के तौर पर कंपनियों ने अब पांच किलो के छोटे एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। यह खासतौर पर छात्रों और श्रमिकों के लिए है। इसमें उन्हें बिना किसी स्थानीय पते के प्रमाण के भी कनेक्शन मिल रहा है। इसके लिए पीथमपुर, मंडीदीप, देवास और गोविंदपुरा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में खास शिविर लगाए जा रहे हैं।
रोजाना दो लाख से ज्यादा सिलेंडर वितरण
इंडियन ऑयल के स्टेट हेड और चीफ जनरल मैनेजर अजय कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक, तीनों कंपनियां मिलकर रोज करीब दो लाख 20 हजार एलपीजी सिलेंडर वितरित कर रही हैं। ये सामान्य स्तर के बराबर है।
अफवाहों की वजह से बढ़ा था दबाव
अफवाहों की वजह से गैस बुकिंग का दबाव काफी बढ़ गया था। पहले रोजाना 65-70 हजार बुकिंग होती थी। अफवाहों के कारण बीच में ये बढ़कर एक से डेढ़ लाख प्रतिदिन तक पहुंच गई थी।
फिलहाल बुकिंग धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। कंपनियों ने साफ किया कि असली समस्या सप्लाई की नहीं, बल्कि पैनिक बुकिंग की वजह से दबाव बढ़ गया था।
मध्यप्रदेश में 13 बॉटलिंग प्लांट
मध्यप्रदेश में तीनों कंपनियों के पास 13 बॉटलिंग प्लांट हैं (6 इंडेन, 3 भारत पेट्रोलियम, और 4 एचपी) और 1552 वितरक सक्रिय हैं। सभी अपनी पूरे क्षमता से काम कर रहे हैं। हर बुकिंग पर डीएसी (ओटीपी) दिया जाता है। अगर सात दिन में डिलीवरी नहीं होती, तो उसे बदल दिया जाता है।
दो हजार से ज्यादा छापेमारी
वहीं कालाबाजारी को रोकने के लिए एक महीने में दो हजार 485 छापे मारे गए। इनमें तीन हजार 561 अवैध सिलेंडर जब्त किए गए हैं। इसके अलावा 10 मामलों में एफआईआर भी दर्ज की गई है।
प्रदेश में पेट्रोल- डीजल का हाल
प्रदेश में रोजाना लगभग आठ हजार किलोलीटर पेट्रोल और 16 हजार किलोलीटर डीजल सप्लाई हो रहा है। डीजल की मांग फसल कटाई के कारण बढ़ी है जबकि पेट्रोल की मांग स्थिर है।
प्रदेश में सात हजार 147 पेट्रोल पंप, 4 टर्मिनल और 13 डिपो से रेलवे और पाइपलाइन के जरिए सप्लाई जारी है। केंद्र ने दो हजार 400 किलोलीटर केरोसिन भी आवंटित किया है। अभी तक किसी जिले से इसकी मांग नहीं आई है।
FAQ
- क्या मध्यप्रदेश में पेट्रोल और डीजल खत्म होने वाला है?
नहीं, प्रदेश में ईंधन का स्टॉक बिल्कुल पर्याप्त है। कंपनियों के पास डिपो और टर्मिनल में पूरा माल है। सप्लाई चेन सुचारू रूप से काम कर रही है। अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक न हों।
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