पेट्रोल पंप और दुकानों के लिए नए नियम: गलत माप देने पर लगेगा एक लाख का जुर्माना
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश सरकार ने तौल और माप से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है।
- अब दुकानों और पेट्रोल पंपों पर कम तौल देने पर 1 लाख रुपए तक जुर्माना लगेगा।
- यह बदलाव विधिक माप विज्ञान नियम 2011 के संशोधन के तहत हो रहा है।
- व्यापारियों, निर्माताओं और कांटा सुधारने वालों के लिए नई लाइसेंस दरें भी तय की गई हैं।
- सरकार ने इस ड्राफ्ट पर लोगों से 30 दिन में राय भी मांगी है।
व्यापारियों पर सीधा असर
बता दें कि प्रदेश में कई जगह उपभोक्ताओं को कम सामान देने की शिकायतें आती रही हैं। कई बार पेट्रोल पंपों पर भी कम तेल डालने के मामले सामने आए। इन शिकायतों को रोकने के लिए सरकार ने नियमों को सख्त किया है।
नए ड्राफ्ट के मुताबिक कोई भी दुकानदार, पेट्रोल पंप संचालक या कांटा सुधारने वाला अगर गलत माप या कम तौल करता पाया गया तो उस पर 1 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यह जुर्माना पहले की तुलना में काफी ज्यादा बताया जा रहा है।
अफसरों को मिलेगा जांच का अधिकार
नए नियमों के तहत अधिकारियों को दुकानों और पेट्रोल पंपों की जांच का पूरा अधिकार होगा। अब यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन की जाएगी।
व्यापारियों को अपने तौल कांटे और बांट की जानकारी भी अधिकारियों को समय-समय पर देनी होगी।
इससे जांच में पारदर्शिता आने की उम्मीद है। पहले यह प्रक्रिया मैनुअल होती थी, जिसमें देरी और गड़बड़ी की शिकायतें आती थीं। ऑनलाइन व्यवस्था से रिकॉर्ड रखना भी आसान होगा।
नई लाइसेंस दरें तय हुईं
सरकार ने व्यापारियों, निर्माताओं और कांटा सुधारने वालों के लिए नई लाइसेंस फीस तय की है।
- निर्माता या उत्पादक लाइसेंस के लिए 1 लाख 50 हजार रुपए देने होंगे।
- डीलर या ट्रेडर लाइसेंस के लिए 1 लाख रुपए तय हुए हैं।
- मरम्मतकर्ता यानी कांटा सुधारने वालों के लिए 50 हजार रुपए की फीस रखी गई है।
यह लाइसेंस पहले पांच साल के लिए मान्य रहेगा। इसके बाद हर तीन साल में इसे रिन्यू कराना जरूरी होगा। समय पर रिन्यू न कराने पर लाइसेंस अमान्य हो सकता है।
जांच शुल्क भी हुआ तय
पेट्रोल पंप, कांटों और बड़ी मशीनों की सरकारी जांच के लिए भी शुल्क तय किया गया है।
- पेट्रोल-डीजल पंप की जांच के लिए 3 हजार रुपए लगेंगे।
- सीएनजी गैसऔर एलपीजी डिस्पेंसर के लिए प्रति यूनिट 5 हजार रुपए तय हैं।
- 20 किलो तक के छोटे कांटे की जांच पर 200 रुपए शुल्क लगेगा।
- 5 टन से बड़े धर्मकांटे की जांच पर 5 जहार रुपए देने होंगे।
- अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की जांच पर 200 रुपए तय हैं।
यह शुल्क तय होने से जांच प्रक्रिया में एकरूपता आएगी। अलग-अलग जगहों पर अलग दरें वसूलने की शिकायतें अब कम हो सकती हैं।
अमानक कांटों पर सीधी कार्रवाई
अगर कोई व्यापारी अमानक यानी गलत कांटे या मशीन का इस्तेमाल करता पाया गया, तो उस पर सीधी कार्रवाई होगी। इसमें 1 लाख रुपए तक का जुर्माना शामिल है। सरकार का कहना है कि इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
साथ ही ईमानदारी से व्यापार करने वाले दुकानदारों और पेट्रोल पंप संचालकों को भी फायदा होगा। बाजार में अनुचित प्रतिस्पर्धा कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
30 दिनों में मांगी गई राय
सरकार ने इस संशोधित ड्राफ्ट को सार्वजनिक कर दिया है। आम लोग, व्यापारी संगठन और उपभोक्ता इस पर अपनी राय 30 दिनों के भीतर दे सकते हैं। इसके बाद ही नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
यह कदम पारदर्शिता की दिशा में उठाया गया माना जा रहा है। सरकार चाहती है कि नियम लागू करने से पहले सभी पक्षों की राय ली जाए।
लीगल मेट्रोलॉजी (विधिक माप विज्ञान) क्या है?
आसान भाषा में समझें तो लीगल मेट्रोलॉजी नाप-तौल से जुड़ा कानून है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में इस्तेमाल होने वाले तराजू, वजन मशीन, पेट्रोल पंप के डिस्पेंसर और अन्य मापने वाले उपकरण सही और सटीक हों। ताकि ग्राहकों को कम तौल या गलत माप देकर कोई नुकसान न पहुंचा सके।
क्या बदला?
सरकार ने नाप-तौल से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं। अब अगर कोई कम तौल देता है या गलत माप का इस्तेमाल करता है, तो उस पर 1 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इसके अलावा पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है, ताकि काम जल्दी और पारदर्शी तरीके से हो सके। अधिकारियों को जांच करने के ज्यादा अधिकार भी दिए गए हैं।
ये नियम दुकानदारों, निर्माताओं, पेट्रोल पंप और वजन मशीन या कांटा ठीक करने वालों पर लागू होंगे।
कम तौल कैसे पकड़ी जाएगी?
अगर किसी दुकान या संस्थान पर गड़बड़ी की शिकायत मिलती है, तो अधिकारी जांच कर सकते हैं।
जांच के दौरान...
- वजन मशीन की जांच होगी।
- पेट्रोल पंप के डिस्पेंसर की जांच की जाएगी।
- इलेक्ट्रॉनिक मशीनों की टेस्टिंग होगी।
- जरूरी रिकॉर्ड और दस्तावेज भी देखे जाएंगे।
ग्राहक कैसे पहचानें कि कम तौल हो रही है?
अगर आपको किसी दुकान पर कम तौल का शक हो, तो...
- मशीन पर लगी सरकारी सील जरूर देखें।
- खरीदारी की रसीद लें।
- जरूरत पड़े तो दोबारा वजन करवाएं।
- गड़बड़ी लगे तो संबंधित अधिकारी को इसकी जानकारी दें।
पुराने नियम और नए नियम में क्या अंतर है?
| पहले | अब |
|---|---|
| ज्यादातर प्रक्रिया ऑफलाइन होती थी | पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी |
| पुराने प्रावधान लागू थे | संशोधित नए नियम लागू होंगे |
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