मध्य प्रदेश की फार्मा इंडस्ट्री पर युद्ध का असर, 190 देशों को दवा सप्लाई रुकी, 100 कंपनियों पर शटडाउन का खतरा

Sanjay Dhiman | Apr 01, 2026, 20:12 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश की फार्मा इंडस्ट्री को इराक-इजराइल युद्ध के कारण भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है। 100 कंपनियों के निर्यात में ठहराव आया है और वैश्विक सप्लाई चेन पर गहरा असर पड़ा है।

News in Short

  • ईरान-इजराइल युद्ध का असर, मध्य प्रदेश की फार्मा इंडस्ट्री का निर्यात ठप हो गया है।
  • शिपिंग कंपनियों ने युद्ध के कारण समुद्र में जहाज भेजने से मना कर दिया।
  • कंटेनर के किराए में 40% की बढ़ोतरी, अफ्रीका के लिए कंटेनर रेट 3.5 लाख से बढ़कर 4.5 लाख हुआ।
  • बीमा कंपनियां समुद्री हमलों के डर से बीमा देने से बच रही हैं, प्रीमियम बढ़ा।
  • मध्य प्रदेश के उद्योग कच्चे माल के लिए मिडिल ईस्ट पर निर्भर, सप्लाई रुक गई है।

News in Detail

मध्य प्रदेश की फार्मा कंपनियों पर अब ईरान-इजराइल युद्ध का गहरा असर दिखने लगा है। ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण 190 देशों को दवाओं की सप्लाई पूरी तरह से रुक गई है। शिपिंग कंपनियों ने रेड सी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) जैसे समुद्री मार्गों से जहाज भेजने से मना कर दिया है। इससे दवा निर्यात ठप्प हो गया है।



एक्सपोर्ट ठप होने के कारण

जहाजों की कमी: युद्ध के खतरे के चलते शिपिंग कंपनियां अब जहाज समुद्र में नहीं उतार रही हैं। इस कारण बुकिंग पूरी तरह बंद हो गई है।


महंगा किराया: कंटेनर के किराए में 40% की बढ़ोतरी हो गई है। उदाहरण के तौर पर, अफ्रीका जाने वाले 40 फीट के कंटेनर का रेट 3.5 लाख से बढ़कर 4.5 लाख रुपए तक पहुंच गया है।


दोगुना तक बीमा प्रीमियम : समुद्र में हमलों के डर से इंश्योरेंस कंपनियां बीमा देने से बच रही हैं। जहां बीमा मिल भी रहा है, वहां प्रीमियम इतना ज्यादा हो गया है कि यह उत्पादन लागत से भी ऊपर निकल गया है।



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इंडस्ट्री में मंदी और उत्पादन में गिरावट

आईडीएमए के सचिव डॉ. अनिल सबरवाल के मुताबिक, कंपनियां अब प्रोडक्शन में भारी कटौती कर रही हैं। जो कंपनियां 24 घंटे (3 शिफ्ट) काम करती थीं, अब वे केवल एक शिफ्ट में काम कर रही हैं। आने वाले समय में हफ्ते में केवल 5 दिन ही काम होने की संभावना जताई जा रही है।



घाटे का सामना कर रही कंपनियां

पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष डॉ. गौतम कोठारी के अनुसार, कंपनियों के पास ऑर्डर तो हैं, लेकिन वे पुराने तय रेट पर माल नहीं भेज पा रही हैं। ट्रांसपोर्ट कॉस्ट 2 से 4 गुना बढ़ने के कारण निर्यात में भारी घाटा हो रहा है।



वैश्विक सप्लाई पर असर

मध्य प्रदेश की दवाइयां यूएई, सऊदी अरब, और ओमान जैसे देशों में सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा हैं। जस्ट-इन-टाइम इन्वेंटरी सिस्टम के कारण कंपनियों के पास ज्यादा स्टॉक नहीं होता। अगर युद्ध 10-15 दिन और चला, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में आवश्यक दवाओं की भारी किल्लत हो सकती है।



कच्चे माल की आवक में रुकावट

मध्य प्रदेश के करीब 5600 उद्योग कच्चे माल के लिए मिडिल ईस्ट पर निर्भर हैं। इन देशों से कच्चे माल की सप्लाई भी पूरी तरह रुक गई है। सऊदी अरब, कतर और बहरीन से आने वाले बल्क ड्रग्स की सप्लाई प्रभावित हो गई है।



चीन का भी प्रभाव

चीन से आने वाले कंटेनर का किराया 1.5 लाख से बढ़कर 3 लाख रुपए हो गया है। इस कारण चीन से भी आवक न के बराबर रह गई है।



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निर्यात की कमी और शटडाउन का खतरा

मध्य प्रदेश से हर महीने लगभग 80,000 कंटेनर कांडला और JNPT पोर्ट भेजे जाते थे, लेकिन अब यह पूरी तरह से थम गए हैं। हवाई कार्गो की क्षमता सीमित होने के कारण यह भी एक विकल्प नहीं बन पा रहा है।



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