एमपी में 5600 फैक्ट्रियों पर तालाबंदी का खतरा: 20 हजार वर्कर्स को निकाला, एक शिफ्ट में हो रहा काम
News in Short
- पीथमपुर में 5,600 फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर, 20 हजार कर्मचारियों की छंटनी हुई।
- कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से उद्योगों में उत्पादन घटा, शिफ्ट कम हो रही हैं।
- 30 हजार स्थायी कर्मचारियों की सैलरी आधी की गई, आर्थिक संकट बढ़ा।
- गैस की सप्लाई प्रभावित होने से मजदूरों को महंगी गैस खरीदने में कठिनाई हो रही है।
- पीथमपुर का एक्सपोर्ट ठप, अमेरिका और यूरोप में भेजे जाने वाले उत्पादों पर असर पड़ा।
News in Detail
मध्य प्रदेश का औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर, जिसे 'मध्य प्रदेश का डेट्रॉयट' कहा जाता है, आज गंभीर संकट का सामना कर रहा है। यहां पर स्थित 5,600 फैक्ट्रियां अब बंद होने के कगार पर हैं। उद्योगपतियों का कहना है कि हालात अगर जल्दी नहीं सुधरे तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है। पीथमपुर में होने वाला एक्सपोर्ट अब लगभग पूरी तरह से रुक चुका है।
कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई मुश्किलें
पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष डॉ. गौतम कोठारी ने कहा कि कच्चे माल की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे प्रोडक्शन घटाना पड़ा है। इसके कारण फैक्ट्रियों में शिफ्ट कम हो रही हैं। कई फैक्ट्रियां तो अब शट-डाउन की स्थिति में हैं। इस संकट का सबसे ज्यादा असर अस्थायी मजदूरों पर पड़ा है। अनुमान के मुताबिक, करीब 20 हजार कॉन्ट्रैक्ट वर्कर अब काम से बाहर हो चुके हैं।
सैलरी आधी हो गई, क्या होगा कर्मचारियों का भविष्य?
पीथमपुर में काम करने वाले स्थायी कर्मचारियों की सैलरी अब आधी हो गई है। करीब 30 हजार कर्मचारियों को अपनी सैलरी में कटौती का सामना करना पड़ा है। इससे कर्मचारियों की जीवनशैली पर भी असर पड़ रहा है। लेबर कांट्रैक्टर सद्दाम पटेल ने बताया कि लेबर को अब गैस के छोटे-छोटे बॉटल लेने में भी परेशानी हो रही है क्योंकि उनकी सैलरी इतनी नहीं है।
सरकार पर सवाल उठाए गए
पीथमपुर के उद्योगपतियों ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जब संकट की घड़ी आती है, तो सरकार का मुंह देखते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को अब गैस की सप्लाई कम कर दी है, जो उद्योगों के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है। अगर सरकार समय रहते कदम नहीं उठाती तो आने वाले समय में स्थिति और भी खराब हो सकती है।
पीथमपुर के योगदान को नकारा नहीं जा सकता
पीथमपुर को मध्य प्रदेश का औद्योगिक इंजन कहा जाता है। यहां से हर महीने करोड़ों डॉलर का एक्सपोर्ट होता था। PE के पुर्जे, दवाएं और पैकेजिंग सामग्री अमेरिका, यूरोप और मिडिल ईस्ट जैसे बाजारों में भेजी जाती थीं। लेकिन अब फ्रेट चार्ज और बीमा प्रीमियम के बढ़ने के कारण एक्सपोर्ट पर भारी असर पड़ा है।
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