एमपी के सरकारी कॉलेजों पर 486 करोड़ खर्च, 2 साल से 2,232 पदों पर भर्ती अटकी, यूट्यूब से पढ़ रहे छात्र

Aman Vaishnav | Oct 21, 2026, 12:40 IST
मध्य प्रदेश के पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में प्रोफेसर न होने से यूट्यूब के सहारे पढ़ाई करते छात्र।
मध्य प्रदेश के सभी जिलों के पुराने डिग्री कॉलेजों को अपग्रेड करके पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस बनाया गया था। सरकार ने इन कॉलेजों के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने और दूसरी सुविधाएं जुटाने के नाम पर 486 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर दिए। वहीं आधुनिक कोर्स पढ़ाने के लिए 2,232 नए पदों को मंजूरी देने का प्रस्ताव पिछले 2 साल से सरकारी फाइलों में अटका हुआ है।

करोड़ों खर्च, फिर भी यूट्यूब के भरोसे छात्र

मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बना था, जिसने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (National Education Policy 2020) को तेजी से लागू किया था। सरकार ने दावा किया था कि अब छात्रों को सिर्फ पुरानी डिग्रियों तक सीमित नहीं रहना पड़ेगा। उन्हें ऐसे आधुनिक कोर्स पढ़ाए जाएंगे जिनसे नौकरी पाने में मदद मिलेगी।



वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही है। दो साल बीतने के बाद भी इन कॉलेजों में पढ़ाने के लिए स्थायी प्रोफेसर नहीं हैं। इसके अलावा जरूरी प्रैक्टिकल लैब भी तैयार नहीं हुई। एआई और ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे नए विषय पढ़ने आए छात्र अब यूट्यूब देखकर प्रैक्टिकल सीखने को मजबूर हैं।



दो साल से अटकी 2,232 पदों की फाइल

सरकार ने इन एक्सीलेंस कॉलेजों में बड़े स्तर पर नई भर्तियां करने का भरोसा दिया था। आधुनिक विषय पढ़ाने के लिए 1,845 शिक्षकों समेत कुल 2,232 शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पद तैयार किए गए थे।



मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले दो साल से यह प्रस्ताव वित्त और सामान्य प्रशासन विभाग की फाइलों में अटका हुआ है। जानकारों का कहना है कि अगर सरकार आज भी इन पदों को मंजूरी दे देती है, तो मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के जरिए भर्ती पूरी होने में कम से कम 2 से 3 साल लग सकते हैं। ऐसे में इन नए विषयों में एडमिशन लेकर पढ़ाई कर रहे छात्रों का पहला बैच बिना स्थायी प्रोफेसरों के ही डिग्री लेकर कॉलेज से निकल सकता है।



जिलों में कागजों और जमीन पर क्या है हाल?

कागजों में पद मंजूर, पोर्टल पर एंट्री नहीं

मुरैना के पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में 26 पढ़ाने वाले और 5 गैर-शैक्षणिक पद मंजूर किए गए थे। ये पद आज तक आधिकारिक पोर्टल पर दर्ज ही नहीं हुए। कॉलेज के प्राचार्य ऋषिपाल सिंह के अनुसार पोर्टल पर नाम न आने से नई भर्तियां शुरू नहीं हो सकीं। कॉलेज में स्थायी शिक्षक नहीं हैं। इसका असर यह हुआ कि कुल 1,400 सीटों में से आधुनिक तकनीकी कोर्स की 300 सीटें पूरी तरह खाली रह गईं।



धरने के बाद भी नहीं हुई सुनवाई

श्योपुर जिले के कॉलेज में आधुनिक ड्रोन तकनीक पढ़ाना तो बहुत दूर की बात है, यहां भूगोल और संस्कृत जैसे बुनियादी विषय पढ़ाने के लिए भी शिक्षक नहीं हैं। छात्रों की मदद के लिए कोई हेल्पडेस्क तक नहीं बनाई गई है। लगातार उठ रही मांगों के बाद जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो छात्र संगठनों ने कॉलेज परिसर में बैठकर धरना दिया। इसके बाद भी अब तक शिक्षकों की कोई तैनाती नहीं हुई है।



खेल मैदान से भी नहीं हटा अतिक्रमण

सीधी जिले के पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस की 56 एकड़ की कीमती जमीन पर अवैध कब्जे और निर्माण कार्य चल रहे हैं। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने खेल मैदान और कैंपस से अतिक्रमण हटाने के लिए राजस्व विभाग को कई बार लिखित शिकायत भेजी। इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।



पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के 3 अधूरे वादे

पहला वादा: नए कोर्स से रोजगार मिलेगा दावा था कि छात्रों को एआई, ड्रोन और साइबर सिक्योरिटी जैसे आधुनिक कोर्स सिखाकर नौकरी दिलाई जाएगी। वहीं 1,845 शिक्षकों के पद दो साल से वित्त विभाग में फंसे हुए हैं। न तो विशेषज्ञ शिक्षक मिले और न ही प्रैक्टिकल लैब तैयार हो पाई।



दूसरा वादा: कॉलेज परीक्षा केंद्र नहीं बनेंगे घोषणा की गई थी कि पढ़ाई का माहौल बनाए रखने के लिए इन कॉलेजों को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा। दूसरी ओर मुरैना सहित लगभग सभी 55 जिलों के कॉलेजों में सालभर बीएड, एमएड और एमबीए की परीक्षाएं चलती रहती हैं।



तीसरा वादा: शिक्षकों की नई भर्ती होगी कुल 2,232 पदों पर भर्ती में अभी भी 2 से 3 साल का समय लग सकता है। सरकार ने नए शिक्षकों की भर्ती करने के बजाय दूसरे सामान्य कॉलेजों से प्रोफेसरों को यहां अटैच कर दिया है। इसका नुकसान यह हुआ कि जिन पुराने कॉलेजों से शिक्षक हटाए गए वहां भी शिक्षक कम हो गए।



क्या बोले शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार?

इस पूरे मामले पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार का कहना है कि पीएम एक्सीलेंस महाविद्यालयों में खाली पदों को भरने की प्रक्रिया शासन स्तर पर चल रही है। छात्रों की पढ़ाई का नुकसान न हो इसलिए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत दूसरे कॉलेजों से प्रोफेसर अटैच किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि नए पदों को बनाने और उन पर भर्ती की प्रक्रिया को भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।



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