एमपी में शुरु होगी पीएम ई-बस सेवा, यात्रियों को सस्ते में मिलेगी लग्जरी सुविधाएं
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश के 6 शहरों में जुलाई 2025 से पीएम ई-बस सेवा शुरू होगी।
- पहले चरण में इंदौर, भोपाल और जबलपुर में कुल 350 एसी इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी।
- ग्रीन सेल मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड इन बसों को चलाएगी।
- किराया 1.5 रुपए प्रति किलोमीटर से शुरू होगा।
- टिकट बुकिंग चलो ऐप के जरिए होगी।
MP में बदलेगा सफर का तरीका
मध्य प्रदेश के शहरी यात्रियों के लिए जुलाई का महीना खास होने वाला है। इंदौर, भोपाल और जबलपुर में एसी इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतरेंगी। ये बसें पर्यावरण के अनुकूल हैं और डीजल बसों से कहीं सस्ती पड़ती हैं।
केंद्र सरकार की पीएम-ई बस सेवा के तहत प्रदेश के छह शहरों में कुल 582 ई-बसें चलाई जाएंगी। पहले चरण में इंदौर को 150, भोपाल और जबलपुर को 100-100 बसें मिलेंगी। दूसरे चरण में ग्वालियर, सागर और उज्जैन की बारी आएगी।
इंदौर से होगी शुरुआत
इंदौर में सबसे पहले ई-बसें दौड़ेंगी। यहां 8 रूटों पर 150 बसें तय की गई हैं। सबसे लंबा रूट रंगवासा से देपालपुर तक 52.30 किलोमीटर का होगा। यहां 12 बसें चलेंगी।
सबसे व्यस्त रूट महू नाका से सांवेर तक है। इस रूट पर 50 बसें चलाई जाएंगी। यात्रियों को बहुत कम इंतजार करना पड़ेगा।
भोपाल में 10 रूट, 100 बसें
बता दें कि राजधानी भोपाल में जुलाई के दूसरे या तीसरे हफ्ते से प्रधानमंत्री ई-बस सेवाशुरू होने की उम्मीद है। 10 रूटों पर 100 बसें चलेंगी। सबसे लंबा रूट सीहोर से रातापानी तक 68.5 किलोमीटर का है।
इस रूट से सीहोर, फंदा, चिरायु अस्पताल, बैरागढ़, कलेक्ट्रेट और हमीदिया अस्पताल जैसे अहम इलाके जुड़ेंगे। सबसे छोटा रूट अचारपुरा इंडस्ट्रियल एरिया से बीडीए कॉलोनी तक 32 किलोमीटर का है।
कितना लगेगा किराया
शुरुआत में यात्रियों से 1.5 रुपए प्रति किलोमीटर किराया लिया जाएगा। पांच किलोमीटर के सफर का खर्च सिर्फ 7.5 रुपए होगा। यह किराया डीजल बसों के मुकाबले काफी किफायती है।
वहीं आगे किराया बढ़ाकर 2 रुपए प्रति किमी करने का प्रस्ताव है। इस पर उच्च स्तरीय समिति फैसला लेगी। लंबी दूरी के लिए अधिकतम 3 रुपए प्रति किमी की दर लागू हो सकती है।
ई-बस में क्या-क्या मिलेगा
ये 25 सीटों वाली वातानुकूलित बसें हैं। हर बस में 7 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। ऑटोमैटिक दरवाजे, इमरजेंसी पैनिक बटन और हर खिड़की पर इमरजेंसी हैमर भी है।
दिव्यांग यात्रियों के लिए व्हीलचेयर रैंप की सुविधा है। एंट्री पर पैसेंजर काउंटिंग सिस्टम और पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम भी लगाया गया है।
डीजल से तीन गुना सस्ती है ई-बस
डीजल बस एक किलोमीटर चलाने में करीब 40 रुपए का खर्च आता है। इलेक्ट्रिक बस में यही दूरी तय करने में सिर्फ 12 रुपए की बिजली लगती है। यानी खर्च तीन गुना से भी कम हो जाता है।
यही वजह है कि सरकार इस योजना को बड़े पैमाने पर लागू कर रही है। पर्यावरण प्रदूषण भी कम होगा और यात्रियों को किफायती सफर मिलेगा।
कौन चलाएगा ये बसें
बसों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी ग्रीन सेल मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड को दी गई है। यह ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट मॉडल पर काम करेगा। कंपनी ड्राइवर, कंडक्टर और मेंटेनेंस स्टाफ खुद तैनात करेगी।
कंपनी को 58.14 रुपए प्रति किलोमीटर का भुगतान मिलेगा। इसमें 22 रुपए केंद्र सरकार सब्सिडी देगी। बाकी 36.14 रुपए प्रति किमी राज्य सरकार वहन करेगी।
हर बस को रोजाना कम से कम 180 किलोमीटर चलना जरूरी होगा।
9 डिपो और 9 चार्जिंग स्टेशन
छह शहरों में 9 अत्याधुनिक डिपो बनाए जा रहे हैं। भोपाल में बैरागढ़ और कस्तूरबा नगर में 14 करोड़ रुपए की लागत से दो डिपो बनेंगे। इंदौर में नायता मुंडला और चंदन नगर में 6 करोड़ रुपए में दो डिपो तैयार होंगे।
चार्जिंग के लिए 9 स्टेशन बनाए जाएंगे। इन पर करीब 59 करोड़ 47 लाख रुपए खर्च होंगे। निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए 41 किलोमीटर लंबी हाई टेंशन लाइन भी बिछाई जाएगी।
20 साल की जरूरत देखकर बना प्लान
हर शहर के लिए कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान बनाया गया है। इसमें अगले 20 वर्षों की शहरी आबादी की परिवहन जरूरतों का ध्यान रखा गया है। इससे रूट बार-बार बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
ग्रीन सेल मोबिलिटी के सीईओ देवेंद्र चावला ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य केवल बसों का विद्युतीकरण नहीं, बल्कि लंबे समय तक पर्यावरण अनुकूल, भरोसेमंद और तकनीक आधारित पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित करना है।
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