'द सूत्र' की खबर के बाद एक्शन; सरकार ने एआईजी राजेश मिश्रा पर कसा शिकंजा, अब आरोप पत्र जारी
News in Short
- एआईजी पर एक्शन: फैशन डिजाइनर से धोखाधड़ी मामले में एआईजी राजेश मिश्रा को चार्जशीट जारी।
- द सूत्र का असर: मीडिया में खबर आने के बाद सरकार ने दबाई गई फाइल खोली।
- गंभीर आरोप: अधिकारी पर लाखों की ठगी और मानसिक उत्पीड़न के पुख्ता सबूत मिले हैं।
- जवाब की मोहलत: गृह विभाग ने राजेश मिश्रा को सफाई के लिए 15 दिन दिए हैं।
- जांच में पुष्टि: डीआईजी की 20 पन्नों की रिपोर्ट में महिला के आरोप सही पाए गए।
News in Detail
BHOPAL. जयपुर की एक फैशन डिजाइनर के साथ उत्पीड़न और उसके पैसों पर ऐश करने के गंभीर आरोपों में घिरे मध्यप्रदेश पुलिस के एआईजी राजेश मिश्रा पर आखिरकार सरकार ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। एक महीने तक जांच रिपोर्ट दबे रहने के बाद अब गृह विभाग ने मिश्रा को औपचारिक रूप से आरोप पत्र जारी कर दिया है। उनसे 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। इस कदम के बाद मिश्रा की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
दरअसल, इस पूरे मामले की जांच रिपोर्ट पहले ही पुलिस मुख्यालय से गृह विभाग तक पहुंच चुकी थी। रिपोर्ट पहुंचे लगभग एक महीना बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। इसी मुद्दे को 'द सूत्र' ने प्रमुखता से उठाया था। खबर सामने आने के बाद सरकार हरकत में आई और अब विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।
सूत्र बताते हैं कि इस मामले में देरी के पीछे एक मजबूत लॉबी सक्रिय थी। यह लॉबी राजेश मिश्रा को बचाने की कोशिश कर रही थी। जांच रिपोर्ट सामने आने के बावजूद फाइल आगे बढ़ाने के बजाय उसे दबाकर रखा गया था। हालात यह थे कि मिश्रा को न तो कोई नोटिस जारी किया गया था और न ही उनसे किसी तरह का स्पष्टीकरण मांगा गया था। इस पूरे मामले को लेकर 'द सूत्र' ने अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। इसके बाद दबाव बढ़ा और अब गृह विभाग ने फाइल को आगे बढ़ाते हुए मिश्रा को आरोप पत्र जारी कर दिया है।
यह है गृह विभाग के आरोप पत्र का मजमून
गृह विभाग की ओर एआईजी मिश्रा को जारी आरोप पत्र में कहा गया है कि आपके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इन आरोपों के संबंध में आप अपना लिखित जवाब इस पत्र की प्राप्ति से 15 दिन के भीतर सीधे विभाग को भेजें। साथ ही यह भी बताएं कि क्या आप स्वयं उपस्थित होकर अपने बचाव में कुछ कहना चाहते हैं। यदि तय समय के भीतर कोई जवाब प्राप्त नहीं होता है तो यह माना जाएगा कि इस मामले में आपको कुछ नहीं कहना है। ऐसी स्थिति में नियमों के अनुसार एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला
इस विवाद की शुरुआत वर्ष 2025 में हुई थी। उस समय राजस्थान की एक फैशन डिजाइनर ने मध्यप्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी एडिशनल इंस्पेक्टर जनरल राजेश मिश्रा पर धोखाधड़ी, शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। मामला सामने आते ही उस समय के डीजीपी कैलाश मकवाना ने निष्पक्ष जांच के आदेश दिए थे और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तरुण नायक को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
जांच को प्रभावित होने से बचाने के लिए जनवरी 2026 में राजेश मिश्रा को सीआईडी से हटाकर पीटीआरआई भेज दिया गया था। यह कदम इसलिए उठाया गया था ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो सके।
पीड़ित महिला के खुलासे
पीड़ित महिला ने अपनी शिकायत में कई चौंकाने वाले खुलासे किए थे। उसके मुताबिक, फरवरी 2025 में एक शादी समारोह के दौरान उसकी मुलाकात राजेश मिश्रा से हुई थी। इसके बाद मिश्रा ने उससे नजदीकियां बढ़ाईं और फैशन बुटीक के बिजनेस में साझेदारी का लालच दिया। भरोसा बनने के बाद धीरे-धीरे उससे पैसे खर्च करवाने शुरू किए गए।
महिला का आरोप है कि जयपुर के एक होटल में दोनों साथ ठहरे थे और करीब एक लाख रुपए का बिल उसने चुकाया। इसके अलावा मिश्रा ने महिला के पैसों से अपने परिवार के लिए करीब तीन लाख रुपए के कपड़े भी खरीदे। पीड़िता का कहना है कि यहीं मामला नहीं रुका। उसके मुताबिक लगभग 27 लाख रुपए की ज्वेलरी भी उसके पैसों से खरीदी गई। बाद में मिश्रा ने यह रकम लौटाने का वादा किया, लेकिन कुछ समय बाद उनका फोन ही ब्लॉक कर दिया गया।
नलखेड़ा में किया था हवन
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि यात्राओं के दौरान महंगे होटलों में ठहरने, शॉपिंग करने और महंगे गिफ्ट लेने के लिए उस पर लगातार दबाव बनाया गया। कई मौकों पर शारीरिक संबंध बनाने के लिए भी मानसिक दबाव डाला गया। जब उसने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए तो मिश्रा ने उससे दूरी बना ली और संपर्क पूरी तरह खत्म कर दिया।
इस पूरे मामले का सबसे सनसनीखेज पहलू नलखेड़ा के बगलामुखी मंदिर से जुड़ा बताया गया। महिला का दावा है कि वहां दोनों ने पति-पत्नी के रूप में हवन किया था। मंदिर में मौजूद लोगों के सामने खुद को दंपती बताया गया। बाद में अक्टूबर 2025 के बाद अचानक मिश्रा ने महिला का फोन उठाना बंद कर दिया और संपर्क खत्म कर दिया।
डीआईजी ने सौंपी जांच रिपोर्ट
खुद को ठगा हुआ महसूस करने के बाद महिला ने कोर्ट के माध्यम से पुलिस तक शिकायत पहुंचाई। जांच के दौरान उसने कई सबूत भी पेश किए। इनमें होटल के बिल, ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड, ज्वेलरी खरीद की रसीदें, क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट और कई तस्वीरें शामिल बताई जा रही हैं। जांच अधिकारियों को कई होटलों के सीसीटीवी फुटेज भी मिले हैं, जिनमें दोनों साथ दिखाई देते हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में डीआईजी तरुण नायक ने करीब 20 पेज की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर पुलिस मुख्यालय को सौंपी है। बताया जा रहा है कि इस रिपोर्ट में महिला द्वारा लगाए गए अधिकांश आरोपों की पुष्टि हो चुकी है। यानी जांच में उन दावों को लगभग सही पाया गया है, जिनके आधार पर यह पूरा विवाद खड़ा हुआ है।
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