मिनटों में आपके पास आएगी डायल 112, लेट होने पर एडिशनल एसपी लेंगे एक्शन
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोपाल में डायल-112 सेवा में बड़ा बदलाव हुआ है।
- कुछ जिलों में रिस्पांस टाइम बढ़ने की शिकायतें मिली थीं।
- अब वाहन 2 मिनट में न निकले तो एडिशनल एसपी को अलर्ट जाएगा।
- पहले यह जिम्मेदारी जिले के एसपी की थी।
- बता दें कि सरकार ने 2025 में नई गाड़ियां दी थीं और डायल-112 नंबर शुरू किया था।
क्यों आया यह बदलाव
भोपाल पुलिस रेडियो मुख्यालय को डायल-112 को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। शिकायत थी कि कई जिलों में डायल-112 की गाड़ियां समय पर नहीं पहुंच रही थीं। लोग मदद मांगते थे, लेकिन वाहन देर से पहुंचता था। इस वजह से रिस्पांस टाइम बढ़ने लगा था।
जांच करने पर बड़ी लापरवाही सामने आती थी। पता चलता था कि कई पायलट गाड़ी एक जगह खड़ी कर देते थे। वे घटनास्थल जाने के बजाय दूसरे काम में लग जाते थे।
इसी कारण इवेंट आने पर पहुंचने में देर हो जाती थी। शिकायतें बढ़ने पर अफसरों ने सिस्टम में बदलाव करने का फैसला लिया।
अब क्या है नई व्यवस्था
अब नई व्यवस्था में हर वाहन सीधे एडिशनल एसपी से जोड़ा गया है। पहले यह जिम्मेदारी जिले के एसपी की हुआ करती थी। बड़े इलाके की निगरानी करने में एसपी के पास समय कम रहता था।
2 मिनट में एनरूट जरूरी
बता दें कि जब कंट्रोल रूम में कोई घटना दर्ज होती है, तो पायलट को पहले उसे एकनॉलेज (Acknowledge – सूचना मिलने की पुष्टि) करना होता है। इसके बाद उसे एनरूट (En Route – घटनास्थल के लिए रवाना) होना होता है।
यह पूरी प्रक्रिया 2 मिनट के भीतर करनी होगी। वहीं अगर देरी हुई तो सिस्टम खुद ही एडिशनल एसपी को अलर्ट भेज देगा। इस अलर्ट में वाहन नंबर और थाना क्षेत्र भी दिखेगा। यानी अब हर देरी सीधे रिकॉर्ड में आ जाएगी।
9 महीने में 78 लाख कॉल
डायल-112 के आंकड़े इस बदलाव की जरूरत बताते हैं। जानकारी के अनुसार सितंबर 2025 से 26 मई 2026 तक यानी नौ महीने में लोगों ने 78 लाख बार मदद मांगी। इनमें से 21 लाख से ज्यादा मामलों में पुलिस वाहन भेजे गए।
सबसे ज्यादा शिकायतें साइबर क्राइम और महिला अपराध से जुड़ी रहीं। इतनी बड़ी संख्या में कॉल आने से समय पर पहुंचना बड़ी चुनौती बन गया था। ऐसे में हर मिनट की देरी मायने रखती है।
साइबर अपराध सबसे ज्यादा
साइबर क्राइम और महिला अपराध से जुड़ी शिकायतें सबसे ज्यादा हैं। ऐसे मामलों में तुरंत मदद पहुंचना बहुत जरूरी होता है। थोड़ी सी भी देरी पीड़ित के लिए मुश्किल बढ़ा सकती है।
इसी वजह से अफसरों ने रिस्पांस टाइम पर खास फोकस किया है। पुलिस मुख्यालय अब हर वाहन की लाइव लोकेशन भी देख सकता है। इससे यह पता चल जाता है कि कौन सा वाहन कितने समय से एक ही जगह खड़ा है।
सीएम की सौगात से शुरुआत
यह बदलाव अचानक नहीं हुआ है। साल 2025 में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एमपी पुलिस को बड़ी सौगात दी थी। उन्होंने 1200 नई महिंद्रा स्कॉर्पियो और बोलेरो गाड़ियां पुलिस को सौंपी थीं।
ये गाड़ियां आधुनिक तकनीक से लैस थीं। इसी दौरान पुलिस सहायता नंबर भी डायल-100 से बदलकर डायल-112 (मध्य प्रदेश डायल 112) कर दिया गया था।
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ये नई गाड़ियां विभिन्न थानों को सौंपी गई थीं। सरकार का दावा था कि इससे रिस्पांस टाइम कम होगा।
आम जनता को होगा फायदा
अब उसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए सिस्टम में नया बदलाव किया गया है। इस बदलाव से सीधा फायदा आम जनता को मिलेगा।
वहीं अगर किसी इमरजेंसी में फोन किया जाए तो मदद तेज मिलेगी। पायलट अब लापरवाही नहीं कर सकेंगे, क्योंकि हर मूवमेंट ट्रैक होगी। जिम्मेदारी तय होने से जवाबदेही भी बढ़ेगी।
ये खबरें भी पढ़िए...
ईवी फ्रेंडली बनेगी राजधानी भोपाल, 81 जगहों पर लगेंगे चार्जिंग स्टेशन
एयरपॉड बना पुलिस का जासूस, महज 2 घंटे में बताया चोर का पता, बचाए 10 लाख
गूगल मैप की गलती से थमा गांव का विकास, नहीं बन रहे सरकारी कागज
12 साल का इंतजार खत्म! बुरहानपुर के केले और इंदौरी आलू को मिला जीआई टैग