MP के कई DSP पर लटकी डिमोशन की तलवार, PHQ खंगालेगा 250 अफसरों के पुराने रिकॉर्ड
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश पुलिस में डीएसपी पदोन्नति की दोबारा जांच होगी।
- करीब 250 अफसरों के रिकॉर्ड फिर से खंगाले जाएंगे।
- 15 से ज्यादा डीएसपी डिमोशन हो सकते हैं।
- समान नाम के कारण तीन अफसर सूची में आ गए।
- पीएचक्यू (Police Headquarters) रिव्यू डीपीसी के जरिए जांच करेगा।
मध्यप्रदेश पुलिस में हाल ही में हुई पदोन्नतियों पर अब सवाल खड़े हो गए हैं। निरीक्षक से डीएसपी बनाए गए अधिकारियों की पात्रता की दोबारा जांच होने जा रही है। यह जांच विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) के जरिए की जाएगी। करीब 250 अधिकारियों के रिकॉर्ड इस प्रक्रिया में शामिल होंगे।
क्यों पड़ी दोबारा जांच की जरूरत
प्रारंभिक जांच में कुछ अधिकारियों की पात्रता को लेकर गड़बड़ियां सामने आई हैं। इन्हीं गड़बड़ियों के आधार पर अब रिव्यू डीपीसी कराई जा रही है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक 15 से ज्यादा डीएसपी पदावनत हो सकते हैं।
हालांकि यह आंकड़ा अभी अंतिम नहीं है। पूरी जांच पूरी होने के बाद ही सही स्थिति सामने आएगी। अगर पद खाली होते हैं तो पात्र निरीक्षकों को डीएसपी बनने का मौका मिल सकता है।
समान नाम बनी बड़ी वजह
इस पूरे मामले में एक दिलचस्प वजह भी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक तीन ऐसे अधिकारी मिले हैं, जो सिर्फ समान नाम होने के कारण पदोन्नति सूची में शामिल हो गए। यानी असल पात्र अधिकारी की जगह किसी और का नाम सूची में चला गया।
इसके अलावा कुछ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच पहले से लंबित है। वहीं कुछ अधिकारी तय पदोन्नति शर्तें पूरी नहीं करते हैं। संबंधित इकाइयों से मिली जानकारी के आधार पर अब इन सभी मामलों की समीक्षा हो रही है।
पुलिस मुख्यालय ने मांगी थी जानकारी
डीएसपी पद पर पदोन्नति होने के बाद पुलिस मुख्यालय ने सभी इकाइयों से विस्तृत जानकारी मांगी थी। इसमें अधिकारियों के खिलाफ लंबित विभागीय जांच का ब्योरा शामिल था। साथ ही विभागीय दंड और न्यायालयीन प्रकरणों की जानकारी भी मांगी गई थी।
इसी प्रक्रिया के दौरान कुछ ऐसे मामले सामने आए, जिनमें पात्रता पर दोबारा विचार जरूरी लगा। इसके बाद रिव्यू डीपीसी की तैयारी शुरू हुई। अब संबंधित अधिकारियों के रिकॉर्ड की बारीकी से जांच होगी।
पहले भी हो चुकी हैं पदोन्नतियां निरस्त
यह पहला मौका नहीं है जब पुलिस मुख्यालय ने पदोन्नतियों की समीक्षा की हो। पहले भी विभागीय जांच, दंड और न्यायालयीन मामलों के आधार पर कई पदोन्नतियां रद्द की जा चुकी हैं। अब तक 150 से ज्यादा उप निरीक्षकों और निरीक्षकों की पदोन्नति निरस्त हो चुकी है।
हाल की एक समीक्षा में 83 उप निरीक्षकों की पदोन्नति रद्द हुई थी। इसी समीक्षा में 78 निरीक्षकों की पदोन्नति पर भी रोक लगाई गई थी। इससे साफ है कि पुलिस विभाग में पात्रता जांच की प्रक्रिया पहले से चलती आ रही है।
कितने पद हैं और कितने खाली
मध्यप्रदेश पुलिस में डीएसपी स्तर पर कुल 410 पद तय हैं। पदोन्नति प्रक्रिया जुलाई में शुरू होने से पहले इनमें से करीब 297 पदों पर कार्यवाहक डीएसपी काम कर रहे थे। वहीं 113 पद पदोन्नति कोटे में खाली बताए गए थे।
अब यदि रिव्यू डीपीसी में कुछ पदोन्नतियां रद्द होती हैं तो इन खाली पदों पर नए मौके बन सकते हैं। ऐसे में पात्र निरीक्षकों के लिए डीएसपी बनने की संभावना बढ़ सकती है।
अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ
फिलहाल 15 से ज्यादा डीएसपी के पदावनत होने की बात अभी पक्की नहीं है। यह सिर्फ शुरुआती जांच के आधार पर बताया जा रहा अनुमान है। रिव्यू डीपीसी में हर अधिकारी की पात्रता को अलग से जांचा जाएगा।
इसमें विभागीय जांच, दंड, न्यायालयीन मामले और अन्य शर्तें देखी जाएंगी। इस पूरी प्रक्रिया के बाद ही साफ होगा कि कितने अधिकारी अपने पद पर बने रहते हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि कितनों की पदोन्नति में बदलाव होता है।
आगे क्या हो सकता है
रिव्यू डीपीसी की प्रक्रिया पूरी होने में कुछ समय लग सकता है। इस दौरान संबंधित अधिकारियों के रिकॉर्ड की बारीकी से जांच जारी रहेगी। अगर कुछ पदोन्नतियां रद्द होती हैं तो विभाग में नई नियुक्तियों का रास्ता भी खुल सकता है। इससे लंबे समय से इंतजार कर रहे निरीक्षकों को फायदा मिल सकता है। पूरे मामले पर पुलिस महकमे में अधिकारियों की नजर बनी हुई है।
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