ड्यूटी पर जवान रहेंगे सुरक्षित, गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए एमपी सरकार देगी 14 लाख
इलाज की चिंता हुई दूर
मध्य प्रदेश के पुलिसकर्मियों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से एक राहत देने वाली खबर आई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस जवानों को अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अपनी जेब खाली नहीं करनी होगी। एमपी सरकार ने पुलिस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता की सीमा को बढ़ा दिया है।
पुलिसकर्मियों को इस योजना के तहत अधिकतम 14 लाख रुए तक की आर्थिक मदद मिल सकेगी।
इन्हें मिलेगा फायदा
ड्यूटी के दौरान घायल होने वाले या कैंसर, किडनी और लीवर ट्रांसप्लांट जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे पुलिसकर्मी
DGP की बैठक में लिया फैसला
हाल ही में डीजीपी कैलाश मकवाना की अध्यक्षता में न्यासी मंडल की बैठक हुई थी। यह फैसला इसी बैठक में लिया गया है। जानकारी के अनुसार बैठक में न केवल सहायता राशि को बढ़ाने पर मुहर लगी, बल्कि इलाज की प्रक्रिया को आसान बनाने और आश्रितों के दायरों को बढ़ाने पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
अस्पतालों में मिलेगा कैशलेस इलाज
इस नए बदलाव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आपातकालीन स्थितियों का खास ख्याल रखा गया है। कई बार हार्ट अटैक या सड़क हादसे जैसी स्थिति में पुलिसकर्मी को तुरंत पास के किसी भी अस्पताल में ले जाना पड़ता है।
अब नए नियमों के मुताबिक अगर ऐसी स्थिति में मरीज को किसी गैर-अनुबंधित प्राप्त प्राइवेट अस्पताल में भी भर्ती कराया जाता है, तो वहां मरीज की हालत स्थिर होने तक कैशलेस इलाज की विशेष सुविधा दी जाएगी।
वर्तमान में उपलब्ध अस्पतालों की संख्या
योजना के तहत एमपी पुलिस विभाग ने कई बड़े अस्पतालों के साथ हाथ मिलाया है।
| अस्पताल का प्रकार | संख्या |
| मध्य प्रदेश के अंदर अनुबंधित निजी अस्पताल | 55 |
| मध्य प्रदेश के बाहर अनुबंधित निजी अस्पताल | 04 |
| कुल अनुबंधित अस्पताल | 59 |
विभाग का पूरा जोर इस बात पर है कि ज्यादा से ज्यादा सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को इस योजना से जोड़ा जाए, ताकि पुलिसकर्मियों को उनके अपने जिले या पास के इलाके में ही कैशलेस इलाज मिल सके।
गंभीर मामलों में शत-प्रतिशत सहायता राशि
बैठक में यह साफ कर दिया गया है कि मुश्किल परिस्थितियों में पुलिसकर्मियों की पूरी मदद की जाएगी। वर्तमान में मिलने वाली 50 प्रतिशत अंतर राशि को बढ़ाकर अब शत-प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसकी अधिकतम सीमा 14 लाख रुपए तय की गई है।
इन स्थितियों में मिलेगा PHPS निधि से भुगतान
- कानून-व्यवस्था की ड्यूटी के दौरान घायल होने पर।
- अपराध की जांच-पड़ताल के दौरान हुई हिंसा में घायल होने पर।
- पुलिस के अपने वाहनों या किराए के पुलिस वाहनों की दुर्घटना में चोटिल होने पर।
- कैंसर, किडनी और लीवर ट्रांसप्लांट, ओपन हार्ट सर्जरी जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में।
- कोमा या पैरालिसिस जैसी गंभीर शारीरिक स्थिति होने पर।
- इन सभी मामलों में मेडिकल रीइम्बर्समेंट यानी चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बाद जो भी पैसा बचेगा, उसका भुगतान पीएचपीएस (PHPS) फंड से किया जाएगा।
आश्रितों के दायरे को बढ़ाने की तैयारी
इस योजना में अपनों की देखभाल का भी पूरा ध्यान रखा गया है। बैठक में यह भी तय किया गया है कि जिन लोगों को अनुकंपा नियुक्ति मिली है, उन पुलिस कर्मचारियों पर आश्रित उनके छोटे भाई-बहनों और दिव्यांगजनों को भी इस स्वास्थ्य योजना का लाभ दिया जाए। इसके लिए सरकार को जल्द ही एक प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
FAQ
- पुलिस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत अब अधिकतम कितनी आर्थिक मदद मिलेगी?
मध्य प्रदेश सरकार के नए फैसले के अनुसार, अब पुलिसकर्मियों को इस योजना के तहत गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अधिकतम 14 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद मिल सकेगी। - पीएचपीएस फंड क्या होता है?
पीएचपीएस का पूरा नाम पुलिस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना है। यह मध्य प्रदेश पुलिस विभाग द्वारा तैयार किया गया एक विशेष फंड है, जिसका मकसद पुलिसकर्मियों और उनके परिवार को अचानक आने वाले मेडिकल खर्चों या गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सुरक्षा देना है।
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