एमपी पुलिस हाउसिंग: निर्माण कार्यों में 63.20 करोड़ के कथित नुकसान का मामला, जिम्मेदारों से कब होगी वसूली?

Ramanand Tiwari | Nov 04, 2026, 23:07 IST
Waterlogging in 56 houses in Kanaki, complaint claims 14 crore loss
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मध्यप्रदेश पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के पुराने निर्माण कार्यों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। एक शिकायत में अलग-अलग परियोजनाओं से सरकारी धन को 63.20 करोड़ रुपए के संभावित नुकसान का दावा किया गया है। इनमें खराब निर्माण, अधूरे काम, जरूरत से ज्यादा खर्च और किराए के वाहनों के अनुबंध से जुड़े मामले शामिल हैं।

हालांकि, यह रकम अभी किसी अंतिम जांच या ऑडिट में प्रमाणित नहीं हुई है। सबसे बड़ा सवाल है कि अगर सरकारी पैसे का नुकसान हुआ है, तो उसकी भरपाई किससे और कब कराई जाएगी?



63.20 करोड़ के नुकसान का दावा

शिकायत में कॉरपोरेशन के कई पुराने निर्माण कार्यों का जिक्र किया गया है। इनमें भवनों की खराब गुणवत्ता, निर्माण में अतिरिक्त खर्च और अधूरी परियोजनाओं से जुड़ी रकम शामिल है। हालांकि, शिकायत में बताई गई राशि को वास्तविक सरकारी नुकसान नहीं माना जा सकता। इसके लिए हर मामले की तकनीकी और वित्तीय जांच जरूरी है। फिलहाल यह जानकारी उपलब्ध नहीं है कि विभाग ने कितनी राशि वसूली योग्य मानी है।



अब तक कितने पैसे की Recovery हुई है और कितना बकाया है, इसका भी स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है। शिकायत में सागर का एक पुराना मामला वर्ष 2014 से जुड़ा है, जबकि किराये के वाहनों के अनुबंध वर्ष 2021 से 2024 के बीच के बताए गए हैं। ये आंकड़े शिकायत के आधार पर दिए गए हैं। किसी जांच में सभी रकम को सरकारी नुकसान या वसूली योग्य राशि घोषित किए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।



किन निर्माण कार्यों में कितने नुकसान का दावा?

शिकायत में अलग-अलग परियोजनाओं के लिए निम्न राशि दर्ज है।



परियोजना या मामलाकथित राशि
ग्वालियर के पद्मा स्कूल में निर्माणाधीन छत गिरना5 करोड़
बालाघाट के कनकी में 56 आवासों में जलभराव14 करोड़
सिवनी के बरघाट में 8 आवासों की गुणवत्ता2 करोड़
हुडको से वित्त पोषित आवासों में अतिरिक्त खर्च14 करोड़
जबलपुर में आवास योजना का अधूरा निर्माण15 करोड़
रायसेन में मैगजीन भवन की शिकायत50 लाख
जबलपुर में फायरिंग रेंज का निर्माण50 लाख
सागर में भवन की छत से जुड़ा मामला20 लाख
किराये के वाहन अनुबंध, 2021 से 20245 करोड़
वाहन अनुबंध में जीएसटी से जुड़ा विवाद1 करोड़
दतिया में स्कूल के लिए गलत जगह का चयन5 करोड़ (अनुमानित)
अशोकनगर के तुमेन स्कूल की छत तुड़वाना1 करोड़ (अनुमानित)
कुल दावा63.20 करोड़ रुपए

बालाघाट में 56 आवासों का मामला

बालाघाट जिले के कनकी में बनाए गए 56 आवासों को लेकर शिकायत में 14 करोड़ रुपए के कथित नुकसान की बात कही गई है। यह मामला आवासों में जलभराव से जुड़ा है। पहले प्रकाशित एक खबर में जेपी पस्तोर ने संबंधित निर्माण एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की जानकारी दी थी। लेकिन किसी एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करना और उससे सरकारी पैसे की वसूली करना अलग-अलग कार्रवाई हैं। उपलब्ध शिकायत में यह स्पष्ट नहीं है कि इस मामले में कोई वसूली आदेश जारी हुआ या नहीं। सरकारी खाते में कितनी रकम वापस आई, इसकी जानकारी भी नहीं दी गई है।



निर्माण में गड़बड़ी हुई तो जिम्मेदार कौन होगा?

किसी भी निर्माण परियोजना में गड़बड़ी की जिम्मेदारी तय करने के लिए पहले यह देखना होगा कि गलती किस स्तर पर हुई। इसके लिए जमीन के Site Selection, भवन के डिजाइन और तकनीकी मंजूरी की जांच जरूरी है। साथ ही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, काम की निगरानी और ठेकेदार को किए गए भुगतान की भी जांच करनी होगी। इस प्रक्रिया में मुख्य अभियंता की भूमिका सहित संबंधित अधिकारियों के काम की समीक्षा हो सकती है। यदि जांच में लापरवाही और वित्तीय नुकसान प्रमाणित होता है, तो ठेकेदार, उपयंत्री, एसडीओ या वरिष्ठ इंजीनियर की जिम्मेदारी तय की जा सकती है। हालांकि, जांच पूरी हुए बिना किसी अधिकारी या ठेकेदार को दोषी नहीं माना जा सकता।



ग्वालियर में छत गिरने से चार मजदूर हुए थे घायल

ग्वालियर के पद्मा स्कूल में 26 अक्टूबर को निर्माणाधीन छत गिरने से चार मजदूर घायल हुए थे। घटना के बाद दो इंजीनियरों को निलंबित किया गया था। परियोजना यंत्री को नोटिस भी जारी हुआ था। निर्माण सामग्री की Quality Check के लिए नमूने भेजे गए थे और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई थी। इस मामले में शिकायत के अनुसार पांच करोड़ रुपए के संभावित नुकसान का दावा है। हालांकि, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। इंजीनियरों के निलंबन और नोटिस से यह साबित नहीं होता कि सरकारी नुकसान की रकम तय हो गई है या उसकी वसूली हो चुकी है।



30 नवंबर को जेपी पस्तोर का रिटायरमेंट

मुख्य परियोजना यंत्री जेपी पस्तोर के 30 नवंबर 2026 को सेवानिवृत्त होने की सूचना है। ऐसे में पुराने निर्माण कार्यों की जांच और जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, किसी अधिकारी के पद पर रहने से ही हर निर्माण कार्य में उसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी साबित नहीं होती। इसके लिए संबंधित रिकॉर्ड और जांच के नतीजे जरूरी हैं। यदि किसी परियोजना में सरकारी धन का नुकसान साबित होता है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि उसकी भरपाई किस अधिकारी, कर्मचारी या ठेकेदार से कराई जाएगी।



क्या पुराने निर्माण कार्यों का ऑडिट कराएगी सरकार?

पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन से जुड़े इन मामलों में सबसे जरूरी सवाल सरकारी पैसे के हिसाब का है। शिकायत में 63.20 करोड़ रुपए का दावा किया गया है, लेकिन वास्तविक नुकसान और वसूली की स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में सवाल है कि क्या सरकार सभी पुराने मामलों का परियोजनावार ऑडिट कराएगी? क्या जांच के बाद वसूली योग्य रकम, जिम्मेदार पक्षों और अब तक जमा कराई गई राशि का विवरण सार्वजनिक किया जाएगा? फिलहाल इन सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं। अंतिम जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के बाद ही पता चल सकेगा कि वास्तव में कितना नुकसान हुआ और उसकी वसूली किससे की जानी है।

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