पुलिस हाउसिंग के दो अफसरों की पदोन्नति पर सवाल, PWD के पत्र से नया मोड़, गृह विभाग ने मांगी जानकारी
दो अधिकारी प्रमोट
पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन (Madhya Pradesh Police Housing) में जेपी पस्तोर और आलोक निगम को पदोन्नति मिली। दोनों अधिकारियों को 21 जुलाई को पदोन्नत किया गया था। पदोन्नति प्रक्रिया के खिलाफ शिकायतकर्ता ने विभागीय स्तर पर आपत्तियां उठाई थीं। शिकायतों में लोकायुक्त प्रकरण और पदोन्नति समिति को उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड का मुद्दा है। मामला गृह विभाग तक पहुंचने के बाद इन पदोन्नतियों पर विभागीय निर्णय महत्वपूर्ण हो गया है।
चीफ इंजीनियर ने खोली पदोन्नति समिति के रिकॉर्ड की परत
लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर (भवन) संजय मरस्के ने अठारह सितंबर को पत्र लिखा था। यह पत्र गृह विभाग को भेजा गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इक्कीस जुलाई की पदोन्नति समिति ने उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर निर्णय लिया। इस पदोन्नति समिति में लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी विभागीय प्रतिनिधित्व से जुड़े थे। मरस्के के पत्र के अनुसार, शिकायतकर्ता के दस्तावेज समिति के संज्ञान में नहीं थे। पत्र के मुताबिक, शिकायत संबंधी दस्तावेज भी उस समय पदोन्नति समिति के अभिलेखों में उपलब्ध नहीं थे। मरस्के ने वर्तमान में प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर विभागीय स्तर से उचित निर्णय लेने को कहा।
गृह विभाग ने लिखा पत्र, अब कार्रवाई पर निगाह
गृह विभाग की उप सचिव शुचिस्मिता सक्सेना ने दस सितंबर को कॉर्पोरेशन को पत्र भेजा था। इसमें नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई कर गृह विभाग को जानकारी देने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। पत्र का विषय दोनों अधिकारियों की पदोन्नति निरस्त करने, निलंबन और विभागीय जांच से संबंधित था। हालांकि, उपलब्ध पत्राचार से इन तीनों कार्रवाइयों के अंतिम आदेश जारी होने की पुष्टि नहीं होती है।
शिकायतों के बीच अफसरों को मिली पदोन्नति
पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन (Police Housing Corporation) के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। ग्वालियर में निर्माणाधीन भवन गिरने का मामला सामने आया था। सिवनी में आवासों की गुणवत्ता को लेकर भी शिकायतें सामने आई थीं। बालाघाट में निर्माण एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने का मामला भी पहले प्रकाशित समाचारों में सामने आया था। हालांकि, उपलब्ध पत्रों से इन मामलों में दोनों अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी प्रमाणित नहीं होती है। इन निर्माण विवादों के बीच वरिष्ठ अधिकारियों की पदोन्नति ने विभागीय निगरानी और जवाबदेही पर चर्चा बढ़ाई।
अंतिम कार्रवाई का आदेश सामने नहीं
गृह विभाग का पत्र और पीडब्ल्यूडी का जवाब पदोन्नति विवाद में अलग-अलग विभागीय भूमिकाएं स्पष्ट करते हैं। गृह विभाग ने कार्रवाई की जानकारी मांगी। वहीं, पीडब्ल्यूडी ने पदोन्नति समिति के अभिलेखों की स्थिति बताई। अब संबंधित अधिकारियों की पदोन्नति पर अंतिम निर्णय और उसकी आधिकारिक सूचना सामने आना बाकी है। पदोन्नति हो चुकी है और शिकायतें गृह विभाग तक पहुंच गई हैं। अब संबंधित विभागों की अगली कार्रवाई पर नजर है।