MP Police Crisis: IPS कैडर का असंतुलन और रिटायरमेंट की मार, कैसे चलेगी पुलिस?

Ramanand Tiwari | Dec 27, 2025, 22:01 IST
Photograph: (the sootr)
प्रदेश पुलिस में असंतुलित IPS कैडर और रिटायरमेंट से प्रशासनिक दबाव बढ़ रहा है। अगले साल वरिष्ठ अधिकारियों की संख्या में कमी आएगी, जो पुलिस कार्यक्षमता को प्रभावित करेगा।

BHOPAL. प्रदेश में IPS अधिकारियों के कभी बड़े तो कभी छोटे बैच का असर अब पुलिस के कामकाज पर दिखने वाला है। वरिष्ठ अधिकारियों की संख्या घटने से प्रशासनिक संतुलन बिगड़ने के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले सालों में प्रदेश में पुलिस अधिकारियों की कमी साफ दिखाई देगी।



31 दिसंबर से शुरू होगा रिटायरमेंट का सिलसिला

इस साल के आखिरी दिन यानी 31 दिसंबर को स्पेशल डीजी पवन श्रीवास्तव सेवानिवृत्त हो जाएंगे। यह रिटायरमेंट वरिष्ठ स्तर पर खालीपन की शुरुआत मानी जा रही है।, 2026 में छह वरिष्ठ अधिकारी होंगे रिटायर,वर्ष 2026 में,3 स्पेशल डीजी,3 एडीजी सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। इससे शीर्ष नेतृत्व की संख्या में बड़ा झटका लगेगा।



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पदोन्नति की राह भी बेहद संकरी

2026 में एडीजी पद पर केवल एक अधिकारी पदोन्नत हो पाएंगे। जबलपुर के आईजी प्रमोद वर्मा 2001 बैच के अकेले अधिकारी हैं, इसलिए वही एडीजी बनेंगे।



वरिष्ठ अफसरों की संख्या तेजी से घटेगी

इन रिटायरमेंट और सीमित पदोन्नति के बाद वर्ष 2026 के अंत तक स्पेशल डीजी और एडीजी मिलाकर केवल 32 अधिकारी ही बचेंगे। फिलहाल डीजीपी को मिलाकर यह संख्या 39 है। केंद्र प्रतिनियुक्ति ने और बढ़ाई चुनौती मौजूदा स्थिति में स्पेशल डीजी और एडीजी स्तर के 9 अधिकारी केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर हैं। यानी प्रदेश में उपलब्ध वरिष्ठ नेतृत्व और भी सीमित हो चुका है।



एक अधिकारी, कई शाखाओं का बोझ

स्थिति यही रही तो आने वाले समय में एक स्पेशल डीजी या एडीजी को 2 से 3 शाखाओं का प्रभार संभालना पड़ेगा। इससे निर्णय प्रक्रिया और निगरानी पर असर पड़ना तय है।



अभी से दिखने लगे हैं असर

उदाहरण के तौर पर एडीजी चयन शाहिद अबसार के पास पुलिस प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (PTRI) का अतिरिक्त प्रभार भी है। यह व्यवस्था फिलहाल मजबूरी बन चुकी है। वरिष्ठ अधिकारियों पर बढ़ता दबाव,पंकज श्रीवास्तव -STF और नक्सल ऑपरेशन,योगेश चौधरी-प्रबंधन और योजना,अनिल कुमार-महिला सुरक्षा, कल्याण और लेखा, इन अधिकारियों के पास पहले से ही बहु-शाखीय जिम्मेदारियां हैं।



2027 में हालात और गंभीर होंगे वर्ष 2027 में

3 स्पेशल डीजी रिटायर होंगे, जबकि पदोन्नति के लिए केवल एक अधिकारी उपलब्ध होंगे। भोपाल के आईजी ग्रामीण अभय सिंह, जो 2002 बैच में अकेले अधिकारी हैं, वही प्रमोट हो पाएंगे।



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मध्य प्रदेश पुलिस के लिए यह स्थिति

सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि रणनीतिक चुनौती बनती जा रही है। समय रहते कैडर प्लानिंग, पदोन्नति नीति और प्रतिनियुक्ति संतुलन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में पुलिस की कार्यक्षमता प्रभावित होना तय है।



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