शहीद पुलिसकर्मी की पत्नी को ही नहीं, माता-पिता को भी मिलेंगे 50 लाख, मध्यप्रदेश सरकार ने बदला नियम

Sourabh Bhatnagar | Oct 21, 2026, 11:52 IST
एमपी में शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों को बड़ी राहत
मध्यप्रदेश सरकार ने शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब एक करोड़ रुपए की सहायता राशि दो हिस्सों में बांटी जाएगी। शहीद की पत्नी को 50 लाख रुपए मिलेंगे। बाकी 50 लाख रुपए उनके माता-पिता को दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस स्मृति दिवस पर यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए यह बदलाव किया गया है।
Major relief for families of martyred police personnel: parents, along with the spouse will also receive 50 lakh rupees.

भोपाल में CM मोहन यादव ने की घोषणा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को भोपाल के लाल परेड मैदान पहुंचे। यहां उन्होंने पुलिस स्मृति दिवस परेड में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी।



मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शहीदों के परिवारों के साथ खड़ी है। अब शहीद की पत्नी और बुजुर्ग माता-पिता को बराबर सहायता मिलेगी। सरकार ने परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया है।



एक साल में 9 पुलिसकर्मी शहीद

पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना ने शहीद जवानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में 9 पुलिसकर्मी शहीद हुए हैं। ये आंकड़े 1 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 तक के हैं।



डीजीपी ने कहा कि पुलिस की नौकरी सिर्फ एक सेवा नहीं है। इसमें जिम्मेदारी के साथ त्याग और समर्पण भी जरूरी है। शहीद जवानों के परिवार पूरे पुलिस विभाग का हिस्सा हैं। उनकी देखभाल करना विभाग की नैतिक जिम्मेदारी है।



35 साल बाद नक्सलवाद से मिली मुक्ति

मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश के नक्सल मुक्त होने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश ने 35 साल पुरानी चुनौती से मुक्ति पाई है।



मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस सफलता में पुलिस जवानों की बड़ी भूमिका रही है। जवानों ने मुश्किल हालात में काम किया। कई जवानों ने देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान भी गंवाई।



11 दिसंबर 2025 को नक्सल मुक्त हुआ एमपी

डीजीपी कैलाश मकवाना ने नक्सल विरोधी अभियान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश 11 दिसंबर 2025 को नक्सल मुक्त राज्य बना। उनके अनुसार यह उपलब्धि हासिल करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है।



प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री ने मार्च 2026 तक का लक्ष्य रखा था। इसके लिए मध्यप्रदेश पुलिस ने विशेष योजना तैयार की थी। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में लगातार अभियान चलाए गए।



डीजीपी ने बताया कि वर्ष 2025 इस अभियान के लिए महत्वपूर्ण रहा। बारिश के दौरान भी पुलिस ने अभियान जारी रखे। इसी साल सबसे ज्यादा मुठभेड़ और आत्मसमर्पण हुए।



नक्सली हमलों में 38 जवानों की मौत

डीजीपी ने नक्सलवाद से हुए नुकसान की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि नक्सली हमलों में 38 सुरक्षा जवानों की जान गई। इन हमलों में 58 नागरिकों की भी मौत हुई।



उन्होंने कहा कि नक्सलवाद लंबे समय तक सुरक्षा के लिए चुनौती बना रहा। इससे निपटने में पुलिस जवानों ने बड़ी भूमिका निभाई। उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।



इंस्पेक्टर आशीष शर्मा के बलिदान को किया याद

समारोह में हॉक फोर्स के दिवंगत निरीक्षक आशीष शर्मा को भी याद किया गया। डीजीपी ने बताया कि आशीष लंबे समय तक बालाघाट में तैनात रहे। उन्होंने नक्सल प्रभावित इलाकों में कई अभियानों में हिस्सा लिया।



आशीष शर्मा ने कई मुठभेड़ों में बहादुरी दिखाई। उनके बलिदान के बाद पुलिस ने नक्सल विरोधी अभियान तेज किए।



इस अभियान में बेहतर काम करने वाले जवानों को सम्मान भी मिला। कुल 110 पुलिसकर्मियों को Out of Turn Promotion दिया गया। आशीष शर्मा के भाई को अनुकंपा नियुक्ति भी दी गई है।



पुलिस विभाग में भरेंगे 22 हजार 500 पद

मुख्यमंत्री ने पुलिस भर्ती को लेकर भी बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि 18,500 पदों पर भर्ती का फैसला लिया गया है। अगले दो साल में सभी 22,500 खाली पद भरे जाएंगे।



इसके अलावा हर जिले में पुलिस बैंड की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए अगले साल तक 750 पदों पर भर्ती होगी।



डीजीपी ने बताया कि सरकार अब तक 18 हजार से ज्यादा रिक्त पदों पर भर्ती कर चुकी है। पुलिस बल को मजबूत बनाने के लिए प्रशिक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा।



साइबर अपराध और ड्रग्स बड़ी चुनौती

डीजीपी कैलाश मकवाना ने पुलिस की नई चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अब अपराध के तरीके तेजी से बदल रहे हैं।



Cyber Crime और नशीले पदार्थों का कारोबार बड़ी चुनौती बन रहे हैं। सोशल मीडिया से जुड़े अपराध भी लगातार नई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं।



इनसे निपटने के लिए पुलिस आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। जवानों को नई तकनीक का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।



लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाए गए हैं। इनमें 'नशे से दूरी है जरूरी' और 'सेफ क्लिक' शामिल हैं।



सिंहस्थ 2028 की सुरक्षा तैयारियां शुरू

डीजीपी ने उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन पुलिस के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगा।



श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए तैयारियां की जा रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। पुलिस विभाग बेहतर Security Management पर विशेष ध्यान दे रहा है।



गुजरात की परेड में शामिल होगी हॉक फोर्स

डीजीपी ने बताया कि 31 अक्टूबर को गुजरात में विशेष परेड होगी। इसका आयोजन सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर होगा।



परेड गुजरात के केवड़िया में आयोजित की जाएगी। इस बार इसकी थीम 'नक्सलमुक्त भारत' रखी गई है।



मध्यप्रदेश की हॉक फोर्स भी इस परेड में हिस्सा लेगी। हॉक फोर्स का बैंड भी कार्यक्रम में शामिल होगा।



क्यों मनाया जाता है पुलिस स्मृति दिवस?

देशभर में हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। यह दिन शहीद पुलिस जवानों के सम्मान में मनाया जाता है।



21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख में एक बड़ी घटना हुई थी। हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में चीनी सैनिकों के साथ मुठभेड़ हुई थी। इस मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 10 जवान शहीद हुए थे।



इन्हीं जवानों के बलिदान की याद में पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है।

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