भोपाल पुलिस का कारनामा, अपराध कहीं भी हो इनके पास गवाह पहले से तैयार

Aman Vaishnav | Jun 21, 2026, 08:02 IST
भोपाल पुलिस के पास फिक्स गवाह
भोपाल के मिसरोद थाने में (RTI) से बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने अपने ही ड्राइवर, चाय वाले और ढाबा संचालक को दर्जनों मामलों में सरकारी गवाह बना दिया। पुलिस ने ढाबा चलाने वाले को तो 36 मुकदमों में गवाह बनाया है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • भोपाल के मिसरोद थाने में कुछ चुनिंदा खास लोगों को ही गवाह बनाया गया है।
  • थाने का गाड़ी ड्राइवर सुरेश अहिरवार 22 मामलों में गवाह है।
  • एक ढाबा चलाने को पुलिस ने 36 मुकदमों में गवाह बनाया है।
  • ऐसा खेल भी हुआ जहां एक ही व्यक्ति को पहले गवाह फिर आरोपी बनाया।
  • इस पूरे मामले का खुलासा पुलिस के CCTNS सिस्टम की जानकारी से हुआ है।

मध्यप्रदेश पुलिस के साथ गवाहों को ढूंढने की कोई समस्या नहीं है। अपराध चाहे जहां भी हो, पुलिस के पास गवाह पहले से तैयार रहते हैं। इंदौर और मऊगंज के बाद अब ऐसा ही एक नया मामला राजधानी भोपाल के मिसरोद थाने से सामने आया है।



यहां पुलिस ने मुकदमों को मजबूत करने के लिए थाने के ही ड्राइवर को गवाह बना दिया। साथ ही पास के ढाबा संचालक, चाय वाले और गरीब मजदूरों को भी थोक के भाव में गवाह बना दिया।



इस अजीबोगरीब खेल का पर्दाफाश खुद पुलिस के ही सीसीटीएनएस (CCTNS) सिस्टम के डेटा से हुआ है। बता दें कि मध्य प्रदेश में ऐसे स्टॉक गवाहों को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी अपनी नाराजगी जता चुका है। इन पर नजर रखने के लिए एक खास कमेटी भी बनाई गई है।



RTI से खुला पुलिस की तफ्तीश का राज

आरटीआई कार्यकर्ता अजय पाटीदार ने जब इस संबंध में जानकारी मांगी, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। मिसरोद थाना प्रभारी रतन परिहार ने 2 दिसंबर 2025 को थाने में जॉइनिंग की थी। उनके आने के बाद से 16 अप्रैल 2026 तक थाने में कुल 146 केस दर्ज हुए।



मजेदार बात यह है कि इन 146 मामलों में से 103 केस ऐसे हैं, जिनमें घूम-फिरकर कुछ खास लोगों को ही गवाह बनाया गया है। इनमें से 36 मामलों में सिर्फ एक ढाबा संचालक है। साथ ही 28 मामलों में खुद थाने का स्टाफ ही गवाह बना बैठा है।



इन खास चेहरों पर टिकी पुलिस की गवाही

मिसरोद पुलिस के पास कुछ ऐसे फिक्स गवाह हैं, जो हर वक्त और हर अपराध के मौके पर पुलिस को मिल जाते हैं।



ढाबा संचालक विष्णु उर्फ देवा पाटिल: इंद्रा नगर (जाटखेड़ी) का रहने वाला विष्णु 11 मील पर देवराज ढाबा चलाता है। मिसरोद पुलिस ने उसे रिकॉर्ड 36 मामलों में गवाह बनाया है। पुलिस को हर अपराध के समय यह वहीं खड़ा मिलता है।



पुलिस का ड्राइवर सुरेश अहिरवार: सुरेश 11 मील बायपास का रहने वाला है। वह सुबह थाने के पौधों में पानी डालता है और रात को पुलिस की गाड़ी चलाता है। पुलिस ने उसे 22 मामलों में गवाह बना दिया। हद तो तब हो गई जब एक ही दिन में अलग-अलग FIR वाले 10 मामलों में उसकी गवाही लिख दी गई।



चाय-समोसे वाला धर्मेंद्र कुशवाह: धर्मेंद्र पुराने मिसरोद गांव का रहने वाला है और थाने के पास ही उसकी चाय-समोसे की दुकान है। उसे ढाबा संचालक विष्णु के साथ एक ही दिन में तीन अलग-अलग केस में गवाह बनाया गया।



मजदूर राघवेंद्र: राघवेंद्र मैना एक्सल एस्टेट झुग्गी में रहता है और मजदूरी करता है। पुलिस ने उसे 12 मामलों में गवाह बनाया है।



मजदूर दुर्गेश गिरी और राहुल अहिरवार: ये दोनों मजदूर तो एक ही दिन में, अलग-अलग समय पर चार अलग-अलग अपराधों के गवाह बन गए।



थाने का खुद का स्टाफ: थाने के आरक्षक, प्रधान आरक्षक, एएसआई और एसआई खुद 28 मामलों में गवाह बने हुए हैं।



सुबह गवाह शाम को आरोपी

मिसरोद पुलिस की जांच का अंदाज इतना अनोखा है कि यहां आरोपी और गवाह की अदला-बदली खेल की तरह की गई। ये सभी मामले सार्वजनिक जगहों पर शराब पीने से जुड़े हैं।



इस खेल की शुरुआत 13 दिसंबर 2025 को हुई। एक अपराध में मंडीदीप के रहने वाले भगवान दास अहिरवार को पहले गवाह बनाया गया। फिर उसी दिन पुलिस ने कमाल करते हुए दूसरे अपराध में उसे ही आरोपी बना दिया।



ऐसा ही एक और मामला 15 दिसंबर 2025 को सामने आया था। जहां एक अपराध में बरेली (रायसेन) के रहने वाले सतीश शर्मा को आरोपी और बाबई के संतोष मोरे को गवाह बनाया गया था। इसके ठीक बाद उसी दिन पुलिस ने पासा पलट दिया। अब संतोष को आरोपी और सतीश को गवाह बना दिया गया।



जो मौके पर होगा, गवाह तो वही बनेगा

इस मामले में मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार का कहना है कि, मैं सिर्फ इतना ही कहूंगा कि अपराध के समय घटनास्थल पर जो व्यक्ति मौजूद रहेगा, गवाह तो उसी को बनाया जाएगा। किसी बड़ी कॉलोनी से लाकर या घर बैठे लोगों को मौके पर लाकर गवाह थोड़े ही बना दिया जाएगा।



संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगेंगे

भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने बताया कि,एक ही व्यक्ति को यदि 30 से अधिक मामलों में गवाह बनाया गया है तो संबंधित अधिकारियों से इसकी वजह पूछेंगे। अन्य मामलों में भी ऐसा हो रहा है तो इसे दिखवा लेते हैं। नियमानुसार कार्रवाई के लिए संबंधित थाना प्रभारी को भी निर्देशित करेंगे।



ये खबरें भी पढ़िए...

व्यापमं घोटाले में स्टॉक गवाह, पुताई करने वाला ही बना 847 आरोपियों का साक्षी



पुलिस की खुली पोल, जिस लड़की को मृत मानकर पिता-भाई को भेजा जेल, वो प्रेमी के साथ आई वापस



अजब प्रेम की गजब कहानी, कोर्ट में चुना प्रेमी, बाहर आते ही पति संग पत्नी फरार



भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर को लगी सुसु तो रात को खुलवा दिया बैंक



Tags:
  • सुप्रीम कोर्ट
  • मध्यप्रदेश पुलिस
  • भोपाल पुलिस
  • गवाह
  • संजय कुमार
  • थाना प्रभारी