मध्य प्रदेश पुलिस की नई ट्रेनिंग नीति : साइबर क्राइम और AI से निपटने के लिए तैयार होंगे जवान

Sanjay Dhiman | May 06, 2026, 20:18 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश पुलिस पहली बार साइबर क्राइम, संगठित अपराध और AI जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए नई प्रशिक्षण नीति लागू करने जा रही है। यह नीति पुलिसकर्मियों को आधुनिक तकनीकों से लैस करेगी।

मध्य प्रदेश पुलिस में अब नई कार्यशैली अपनाई जाएगी। राज्य के पुलिस जवान साइबर क्राइम, संगठित अपराध और देशविरोधी गतिविधियों जैसे उभरते खतरों से निपटने के लिए तैयार होंगे। पुलिस विभाग की ओर से पहली बार प्रशिक्षण नीति लागू करने का निर्णय लिया गया है, जिसे प्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाना ने स्वीकृति दी है।



साइबर क्राइम और AI से निपटने का नया 'ब्रह्मास्त्र'

आजकल मोबाइल और इंटरनेट के जरिए ठगी करना बहुत ही आम बात हो गई है। इसी को देखते हुए नई नीति में साइबर कानून और डिजिटल फॉरेंसिक पर जोर दिया गया है। अब सिपाही केवल लाठी चलाना नहीं, बल्कि ऑनलाइन पोर्टल चलाना भी सीखेंगे। जवानों को साइबर हाइजीन और डेटा विश्लेषण की बारीकियां सिखाई जाएंगी। साथ ही, पुलिसिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कैसे करना है, इसके मॉड्यूल बनेंगे। अब अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस हाईटेक सॉफ्टवेयर का सहारा भी लेगी।



यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर बनेंगे 'स्मार्ट' पुलिस ऑफिसर

इस नीति की सबसे खास बात यह है कि पुलिस अब यूनिवर्सिटी से हाथ मिलाएगी। कॉलेजों में साइबर लॉ और डिजिटल फॉरेंसिक जैसे स्पेशल सर्टिफिकेट कोर्स चलाए जाएंगे। अब ट्रेनिंग सिर्फ मैदान तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्मार्ट क्लासरूम भी होंगे। मोबाइल आधारित लर्निंग के जरिए जवान कहीं भी और कभी भी पढ़ाई कर सकेंगे। यह कदम पुलिस विभाग को एक नई और आधुनिक पहचान दिलाने में मदद करेगा।



मार्शल आर्ट्स और योग से बनेंगे 'सुपर कॉप'

पुरानी ड्रिल की जगह अब खतरनाक मार्शल आर्ट्स को ट्रेनिंग का हिस्सा बनाया गया है। इसमें कलरिपयट्टू, क्राव मागा और मल्लखंभ भी शामिल किया गया है। अब कांस्टेबल और सब-इंस्पेक्टर को आत्मरक्षा के लिए लाठी के साथ नई तकनीकें सिखाई जाएंगी। केवल शरीर ही नहीं, बल्कि दिमाग को शांत रखने के लिए योग और ध्यान जरूरी होगा। मानसिक मजबूती के बिना पुलिस की ड्यूटी करना आजकल बहुत ही ज्यादा मुश्किल काम है। इसलिए अब योग को पाठ्यक्रम का एक अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है।



राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों से ली गई मदद

नई नीति बनाने के लिए नेशनल सिक्योरिटी एजेंसियों और अर्धसैनिक बलों से सलाह ली गई है। इसमें सीसीटीएनएस और आईजीजेएस जैसे पोर्टल्स को चलाने की ट्रेनिंग को अनिवार्य कर दिया गया है। अब आरक्षक से लेकर एएसपी रैंक तक के अधिकारी इस आधुनिक नीति के तहत ट्रेनिंग लेंगे।



अपराधियों के मेटा डेटा का विश्लेषण करना अब हर पुलिसकर्मी के बाएं हाथ का खेल होगा। मध्य प्रदेश पुलिस अब तकनीक के मामले में देश की सबसे बेहतर पुलिस बनेगी। यह बदलाव प्रदेश की जनता की सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है।



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